I wasn’t ready for what happened next… but once it started, there was no turning back.
बिकिनी गर्ल न्यूड वाक का मजा ले गया मेरा पड़ोसी दोस्त जिससे मैंने जोश जोश में शर्त लगा ली थी. उसने मुझे सिर्फ चड्डी में चल कर दिखाया तो मुझे भी …
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मेरी पहली कहानी
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यह कहानी सुनें.
What happened next changed everything…
यह बिकिनी गर्ल न्यूड वाक तब की बात है, जब मैं 12वीं क्लास में थी. यह वो समय होता है जब लड़के भोंदू और गोलू से हैंडसम होने लगते हैं और लड़कियां क्यूट और स्वीट से सेक्सी.
लड़कियों के बीच लड़कों की बातें होने लगती हैं.
हमारे ग्रुप में भी कुछ ऐसा ही था. सबकी रुचि लड़कों में बढ़ गई थी.
किसी किसी का तो चक्कर भी चल रहा था और जब वो कभी बताती थी कि लड़के ने उनको टच किया तो पूरे शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती थी.
मैं और मेरी बेस्ट फ्रेंड प्रिया भी यही सोच रहे थे कि कोई हमें भी टच करे.
वो बोली- तेरे तो घर में ही है मस्त आइटम!
मैंने कहा- कौन वो राहुल? कुछ भी बोलती है तू!
पहले मैं राहुल के बारे में बता दूँ. वो हमारे मकान मालिक का लड़का है. ग्राउंड फ्लोर पर वो लोग रहते हैं … और फर्स्ट फ्लोर पर हम लोग.
हम लोग एक ही क्लास में होने की वजह से दोस्त भी हैं और पढ़ाई भी साथ में होती है.
एक दूसरे के साथ हम बहुत खुले हुए थे लेकिन ऐसा कभी सोचा नहीं था.
पर आज उसने सोचने पर मजबूर कर दिया.
‘जिस लड़के के पीछे इतनी लड़कियां मरी जा रही हैं, तू उसे कुछ भी बोल रही है?’
प्रिया की यही सब बातों का नतीजा यह निकला कि मैंने और राहुल ने रात में साथ पढ़ने का समय भी बढ़ा दिया था. क्योंकि दिन में ज्यादा समय अब मिलता ही नहीं था. रात में कभी वो मेरे यहां कभी मैं उसके यहां!
अक्सर सबके सो जाने के बाद तक पढ़ाई चलती रहती थी.
एक रात को उसके यहां ही पढ़ना था क्योंकि उसके घर पर कोई नहीं था, सब दूसरे शहर गए थे.
रात में हमारे घर पर ही उसका खाना हुआ.
उसके बाद मम्मी ने कहा- नीचे जाकर ही पढ़ लो, वहां कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
मैंने राहुल से कहा- तुम चलो, मैं थोड़ी देर में आती हूं.
थोड़ी देर बाद जब मैं वहां पहुंची तो जनाब पढ़ने के बजाय फैशन शो देख रहे थे.
मैंने कहा- तुम्हारी ये पढ़ाई चल रही है?
वो बोला- पढ़ाई तो रोज़ ही चलती है, आज कुछ मजे करते हैं.
मैंने कहा- तो ये नंगी लड़कियां देखकर मजे करने वाले हो?
“नंगी कहां हैं यार … कपड़ों में तो हैं!”
“ये ज़रा जरा सी ब्रा और पैंटी, इनको कपड़े कह रहे हो?”
वो मेरी आंखों में देखने लगा.
‘ये तो बेशर्म हैं ही, तुम भी वही बन जाओ.’
‘इसमें बेशर्म वाली कौन सी बात है, किसी के पास कुछ अच्छा है, तो दिखा रही है.’
‘अच्छा है … तो दिखाने की क्या जरूरत है … रखे अपने पास?’
‘किसी फूल में खुशबू बहुत अच्छी है और कोई उसको सूंघे ही नहीं, तो पता कैसे चलेगा कि कैसी खुशबू है?’
अब मैं एक पल को चुप हो गई.
‘कोई चीज अगर अच्छी है तो लोगों को पता भी चलना चाहिए और उसकी तारीफ़ भी होनी चाहिए. इनका फिगर अगर इतना अच्छा है तो दिखाने में बुराई क्या है?’
‘इतना ही अच्छा है तो तुम क्यों नहीं दिखाते?’
‘पर हमको देखने का किसे शौक है. आप दिखाएं तो कुछ और बात हो.’
‘पहले आप … हमने कहा क्योंकि हमको पता था कि बोलने में तो सब आगे रहते हैं, पर जब खुद को करना पड़ता है तो किसी की हिम्मत नहीं पड़ती.’
उसने कहा- ठीक है, पर अगला नंबर आपका है. रैम्प वॉक के लिए तैयार हो जाइए.
मैंने कहा- पहले आप तो करें जनाब!
वो अन्दर स्टडी रूम में चला गया और मैं बाहर ही ड्रॉइंग रूम में रुकी रही. वो फैशन शो देखते हुए, जिसमें लड़कियां बीच बीच में टॉपलेस भी आ जाती थीं.
मुझे पता था कि थोड़ी देर में वो वैसे ही वापस आ जाएगा.
हालांकि कपड़े उतार कर लड़की के सामने आना उसके बस की बात नहीं थी.
मैं थोड़ी देर इंतजार करती रही … और वो सिर्फ बनियान और चड्डी में वापस आ गया.
मुझे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ.
मस्त नज़ारा था.
फिर भी मैंने कहा- ये बनियान में क्या है तुम्हारे पास छुपाने के लिए?
उसने पूछा- क्या मतलब?
‘मतलब बनियान हटाओ तभी तो लगेगा कुछ दिखाया है.’
उसने बिना कुछ सोचे बनियान उतार दी.
अब मैं क्या बोलती, मैं तो बस उसे देखती ही रह गई.
आंखें खुली की खुली रह गईं.
वो सिर्फ चड्डी में खड़ा था और इधर उधर टहल रहा था.
मैंने शर्म के मारे मुँह दूसरी तरफ घुमा लिया.
उसने कहा- अब क्या हुआ. अब क्यों मुँह घुमा लिया. तुमको ही तो देखना था ना. जो देखना है देख लो क्योंकि अब तुम्हारी बारी है.
ये सुनते ही मेरी तो हालत खराब हो गई.
अब वो मुस्करा रहा था और मैं परेशान स्टडी रूम की तरफ जा रही थी.
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. क्या पहने रहूँ और क्या उतार दूँ.
बड़ी मुश्किल से टी-शर्ट और लोअर उतारा और चल पड़ी रैम्प वॉक के लिए.
वहां घुसते ही ऐसा लगा कि दोस्त की आंखें लाज और शर्म के बजाय आज वासना को समेटे हुई थीं.
उसकी आंखें अब हर जगह देख रही थीं, जहां कभी भूले से भी नजर ना पड़ी थी. उस ब्रा और पैन्टी में चलते हुए मुझे ऐसा लग रहा था मानो कुछ पहना ही ना हो.
अचानक उसने बोला- मैडम, ये तो बेईमानी है. हमारी बनियान उतरवा दी और अपनी ब्रा को अभी भी कलेजे से लगाए हो.
उसको कलेजे से हटाने की हिम्मत तो मुझमें थी नहीं. मैं तो बस जल्दी से जल्दी वहां से निकालना चाह रही थी.
‘इतना ही काफी है.’ बोलकर मैं वहां से बाहर निकली और अपने कपड़े वापस पहन कर ऊपर अपने घर भाग गई.
अगले दिन जब प्रिया को सब बताया तो वो तो साली जैसे मजे ले रही थी.
वो बोली- कितना सही मौका था यार, मैं तेरी जगह होती तो ब्रा क्या, पैंटी भी हटा कर जाती!
मैंने कहा- बोलना आसान है. जब लड़का खुद केवल चड्डी में बैठा हो और बेशर्म की तरह वहीं हाथ रखे हो तो सारी हवा निकल जाती है.
उसने तपाक से दोबारा पूछा- तो हाथ कहां था उसका?
मैंने कहा- चड्डी पे.
‘और उसके नीचे क्या पकड़े था बता ना साली.’
‘अरे वही होगा जो लड़कों के पास होता है और क्या?’
‘मतलब वो अपना लंड पकड़ कर बैठा था और तू उसके सामने आधी नंगी घूम रही थी?’
‘अरे ऐसा नहीं था, मैं बस वो वॉक करके वहां से निकल गई.’
उसने कहा- अरे ऐसा मौका कभी कभी ही मिलता है और तूने गंवा दिया.
‘तो और क्या करती?’
वो मुस्करा कर बोली- अरे उसके हाथ की जगह अपना हाथ रख देती.
‘हट पागल.’
तभी राहुल वहां आ गया.
वो बोला- अगली बार आपकी बारी है.
प्रिया ने अनजान बनते हुए पूछा- कैसी बारी?
उसने कहा- इन्हीं से पूछ लीजिएगा.
मैंने हड़बड़ाते हुए कहा- वो कल कुछ पढ़ाई का रह गया था.
राहुल बिना कुछ बोले मुस्करा कर वहां से चला गया.
प्रिया आंख मार कर बोली- पता है क्या पढ़ रही है तू आजकल … और रात में क्या पढ़ कर आयी है … और अगली बार ये पढ़ाई पूरी करके आना, बीच में छोड़े बिना.
अगली बार पता नहीं कब आना था क्योंकि ऐसे मौके रोज रोज नहीं मिलते थे, पर उसको सोच सोच कर ही मेरा हाल बुरा था.
उस पर प्रिया कुछ ज्यादा ही एक्साइटेड थी और चुहलबाजी का कोई मौका छोड़ती नहीं थी.
दिन बीतते गए और सब कुछ नॉर्मल होता गया.
कुछ समय बाद फिर से ऐसा मौका आ गया, जब उसके घर में कोई भी नहीं था.
वो स्कूल में ही कहता हुआ गया कि आज आपकी बारी है.
राहुल तो चला गया लेकिन प्रिया ने पूछा कैसी बारी?
मेरी तो जान ही सूख गई ये बताने में कि आज उसके घर में कोई नहीं है. उसने भी अंधेरे में तीर मारते हुए कहा- वाह आज तो मज़े हैं तेरे!
मैंने कहा- कैसे मजे?
उसने कहा- अब बन मत … आज तो सब दिखा डाल और देख भी ले, नखरे मत कर … ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा.
मैं मुस्कुरा दी.
‘और पिछली बार की तरह ऐसे ही मत चली जाना. थोड़ा तैयार होके अच्छे से जाना. मैं शाम को आती हूं तेरे पास!’
मेरे दिल की धड़कनें अब बढ़ चुकी थीं पता नहीं क्या होने वाला था.
लड़का कुछ करे ना करे, ये लड़की मुझे नंगा करवा देगी.
वो शाम को मेरे घर पर आ धमकी. पता नहीं कौन से शो की तैयारी करवा रही थी.
पहले पूरा वैक्स किया गया. हर अनचाही जगह के बाल हटाए गए.
हां हां वहां से भी.
वो मेरे लिए एक स्टाइलिश ब्रा पैंटी का सैट भी लायी थी.
ब्रा तो फिर भी ठीक थी, पर पैंटी में तो कुछ था ही नहीं. पीछे से सिर्फ एक डोरी जो चूतड़ों के बीच में गुम जाती थी. मतलब पीछे से देखो तो पूरे चूतड़ नजर आते थे.
और आगे से भी इतनी छोटी कि बस वही जगह छुपी थी.
उसे पहन कर तो उसमें से झांटें भी बाहर झांक रही थीं, जिसको उसने पूरा साफ़ करवाया.
मैंने कहा- मैं ये इतनी छोटी पहन कर उसके सामने नहीं जा सकती.
वो हंस कर बोली- पता है मुझे, तू सब उतार कर जाने वाली है. पर यहां से पहन कर यही जाने वाली है. अब जरा एक बार चल कर तो दिखा सब उतार के.
और उसने कई बार वहीं रिहर्स करवाया … और बेस्ट ऑफ लक बोल कर निकल ली.
मुझे लग रहा था कि कहीं मम्मी को कुछ पता ना चल जाए. कोई मेकअप किए बिना भी सब चमक रहा था इसलिए और कुछ नहीं कर सकते थे.
लिपस्टिक काजल वगैरह पेंसिल बॉक्स में रख लिया था कि मौका मिला तो वहीं लगा लेंगे.
बाकी का समय कट नहीं रहा था.
किसी तरह समय आ ही गया और मैं उसके सामने.
वो आराम से आज भी कुछ वैसा ही देख रहा था.
मुझको देख कर तो जैसे उसकी आंखों में चमक आ गई.
उसने सवालिया अंदाज में कहा- तैयार?
मैंने कहा- किसलिए?
उसने कहा- अपनी बची हुई वॉक के लिए बिना ब्रा और पैंटी के.
‘पागल हो गए हो?’
‘ये तो बेईमानी है. मेरा तो सब उतरवा लिया और अपनी बारी में मुकर गई.’
‘मुकर नहीं गई, लेकिन बिना ब्रा पैंटी के तो ना हो पाएगा.’
‘तो ठीक है ब्रा तो उतार कर करो, कम से कम कुछ तो वादा पूरा करो.’
मैं बिना कुछ बोले ही उसके सामने से उठ कर बाहर चली गई, लिपस्टिक काजल वगैरह लगाया.
कपड़े उतारे और ब्रा को अनहुक करके जैसे ही हटाया, हिम्मत जवाब देने लगी.
ब्रा को वापस पहना और ऐसे ही जाने का फैसला किया.
जैसे ही वापस अन्दर पहुंची वो एकटक देखता ही रह गया.
आज भी केवल ब्रा पैंटी ही थी पर आज का लुक एकदम अलग था.
उसमें कुछ छुप भी नहीं रहा था. ब्रा से आधी चूचियां बाहर छलक रही थीं.
सच में इतनी छोटी ब्रा मैंने आज तक नहीं पहनी थी और पैंटी तो ऐसा लगा रहा था कि पहनी ही नहीं है.
फिर भी उसने ब्रा हटाने की मांग तो रख ही दी.
मुझे लगा आज तो हिम्मत करनी ही पड़ेगी.
पीछे मुड़ी और ब्रा को अनहुक करके धीरे से कंधों से नीचे सरकाया, तब याद आया कि पीछे का नज़ारा तो और भी संगीन है.
पैंटी के नाम पर पीछे तो कुछ है ही नहीं.
पर अब क्या हो सकता है चूतड़ों की नुमाईश तो हो चुकी थी और ये ब्रा हाथ में थी.
अब कुछ हो नहीं सकता था … तो उसे नीचे गिरा दिया.
अपने दोनों हाथ अपनी निर्वस्त्र हो चुकी चूचियों पर रखकर वापस उसकी तरफ मुड़ी.
उसकी आंखों में जैसे चमक आ चुकी थी.
उसने कहा- हाथ तो हटाओ.
मैंने ना में सिर हिलाया और बिकिनी गर्ल ने वॉक स्टार्ट की.
देखने के लिए कुछ बचा तो था नहीं वो पैंटी के नाम पर ज़रा सा कपड़े का टुकड़ा मेरी इज्जत का रखवाला बना हुआ था.
नीचे वो पैंटी और ऊपर हाथ से चूचियों को ढके मैंने उसकी तरफ बढ़ना शुरू किया.
उसके पास पहुंच कर स्टाइल से खड़ी हो गई.
ऊपर से मेरा बिंदासपन दिख रहा था और अन्दर से गांड फटी हुई ही कि अब ये क्या करेगा आ कहेगा.
अगले भाग में मिलती हूँ कि बिकिनी गर्ल न्यूड वाक सेक्स कहानी में आगे क्या हुआ. आप कमेन्ट करके जरूर बताएं.
बिकिनी गर्ल न्यूड वाक कहानी का अगला भाग:
