मम्मी की सहेली को नंगी देखा

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I wasn’t ready for what happened next… but once it started, there was no turning back.

न्यूड बाथ सेक्स स्टोरी एक आंटी की चूत चुदाई की है. वो मेरी मम्मी की सहेली हैं. मैं उनके घे किसी काम से गया तो मैंने उनको बाथरूम में नंगी नहाती देखा. उसके बाद …

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इस काल्पनिक न्यूड बाथ सेक्स स्टोरी के दो पात्र हैं.
एक मैं कुमार और मेरी मां की सहेली शीतल आंटी.

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एक बार मैं अपनी मम्मी के कहने पर शीतल आंटी के घर कुछ सामान लेने पहुंचा.

What happened next changed everything…

जब मैं घर में दाखिल हुआ तो दरवाज़ा खुला था.
मैंने शीतल आंटी को आवाज दी.

वो बाथरूम में नहा रही थीं.
उन्होंने मुझे हॉल मैं बैठने को कहा.

मैं हॉल में बैठ कर आंटी का इंतज़ार कर रहा था.
उस दिन बाहर तेज हवा चल रही थी.
घर की खिड़कियां खुली थीं.

आंटी के बाथरूम का दरवाज़ा हॉल के सामने था.
अचानक तेज हवा से बाथरूम का दरवाज़ा खुल गया.

शीतल आंटी ने शायद इसलिए दरवाज़ा बंद नहीं किया था क्योंकि वो घर में अकेली थीं.

दरवाज़ा खुलने पर जो मुझे दिखा, वो देख कर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.
मेरे सामने मेरी 38 साल की शीतल आंटी एकदम नंगी नहा रही थीं. उनके 36 इंच के चूचे और 38 इंच के कूल्हे देख कर मेरा गला सूखने लगा.

शीतल आंटी की 30 की कमर मुझे एकदम साफ नजर आ रही थी.
पानी उनके चेहरे से गिर कर उनके तने हुए चूचों से होता हुआ नाभि के रास्ते उनकी चूत की झांटों को भिगो रहा था.

आंटी का गोरा बदन पानी में भीगता हुआ बड़ा ही सेक्सी लग रहा था.

शीतल आंटी की आंखों पर साबुन लगा था इसलिए वो न तो तो खुला हुआ दरवाजा देख पा रही थीं और न ही मुझे नहीं देख सकती थीं.
पर मैं आंटी को न्यूड बाथ लेते देख रहा था.

फिर शीतल आंटी ने अपने बदन पर लगे साबुन को हटाने के लिए पानी डालना शुरू किया.
मैं घबराहट की वजह से हॉल की दूसरी तरफ जाकर बैठ गया.

कुछ देर बाद शीतल आंटी कपड़े पहन कर मेरे सामने आईं.
उन्हें देख कर यकीन नहीं हो रहा था कि इन कपड़ों के अन्दर इतना मादक और खूबसूरत बदन छुपा है.

आंटी ने गुलाबी साड़ी गुलाबी ब्लाउज पहना था. उनकी थोड़ी सी दिखती कमर मुझे मदहोश कर रही थी.

मैंने शीतल आंटी से सामान मांगा तो उन्होंने मुझे चाय के लिए पूछा.

वैसे तो मैं हमेशा मना कर देता था, पर उस दिन मैं शीतल आंटी को बस देखता रहना चाहता था, इसलिए मैंने चाय के लिए हां कर दी.

शीतल आंटी चाय बनाने किचन में गईं तो मेरी आंखों के सामने फिर से वही सब घूमने लगा और मैं शीतल आंटी के नंगे बदन को याद करके लंड सहलाने लगा.

कुछ देर बाद आंटी चाय लेकर आईं.
उन्होंने चाय मेज पर रखी तो उनके ब्लाउज से उनके आधे चूचे दिखाई देने लगे.

इससे पहले मैंने कभी शीतल आंटी को उस नजर से नहीं देखा था.
मैंने चाय पीनी शुरू की और छुपी नजर से शीतल आंटी की कमर को देखता रहा.

इतने मैं बाहर बारिश शुरू हो गयी.

शीतल आंटी ने कहा- बाहर बारिश शुरू हो गई है, तुम बारिश रुकने के बाद ही जाना.
मैं भी मान गया.

अब आंटी अन्दर गईं और कुछ देर बाद वापस आकर मेरे पास बैठ गईं.
मैं और शीतल आंटी कुछ देर तक बातें करते रहे.

तभी आंटी ने मेज पर से चाय के कप की ट्रे उठाई और जैसे ही वो आगे बढ़ीं कि न जाने कैसे, गिर गईं.

मैंने जल्दी से आगे बढ़ कर शीतल आंटी को संभाला.
मेरा एक हाथ उनकी पीठ पर था और दूसरा हाथ उनकी गोरी बाजू को पकड़े हुए था.

मैंने शीतल आंटी को सोफे पर बैठाया और उनसे पूछा कि उन्हें चोट तो नहीं आयी.
शीतल आंटी ने कहा- मेरा पैर मुड़ गया है तो लचक सी आ गई है. शायद घुटने में भी कुछ लगी है.

उस समय उनकी आंखें मुंदी हुई थीं.
मैंने उनके पैर को देखा.

मैं आंटी का पैर मसलने लगा और धीरे धीरे साड़ी ऊपर करता गया.
अब शीतल आंटी की साड़ी घुटनों से ऊपर जा चुकी थी. उनकी गोरी और मखमली टांगें मलाई जैसी थीं.

मैंने उनकी टांगों पर हाथ फेरा.
जब मैं साड़ी को और ऊपर करने लगा, तो शीतल आंटी ने अचानक मुझे रोका और साड़ी नीचे कर ली.

फिर उन्होंने गुस्से से मेरी तरफ देखते हुए कहा- ये क्या कर रहे थे?
मैंने घबरा कर जवाब दिया- कुछ नहीं आंटी. वो मैं आपकी चोट देख रहा था.

उन्होंने फिर से गुस्से से कहा- मुझे सब पता है कि तुम क्या कर रहे थे। तुम मेरा फायदा उठाना चाहते हो, मुझे क्या समझा है?
मैं नजर नीचे करके बैठ गया.

फिर पांच सेकंड तक चुप रहने के बाद वो मुस्कुराईं और उन्होंने आगे बढ़ कर मेरे चेहरे को हाथ लगा कर ऊपर उठाया.
मैं आंटी के मुस्कुराते हुए चेहरे को देखने लगा.

तभी आंटी मेरे होंठों को चूमने लगीं.
मैं सकपका गया मगर मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनके चुम्बन कर मजा लेने लगा.

मैं शीतल आंटी की गर्म होती सांसें महसूस कर सकता था.
मुझे यकीन नहीं हुआ कि ये सब हो रहा है.

करीब 20 सेकंड तक किस करने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- मैं मज़ाक़ कर रही थी. बाथरूम का दरवाज़ा मैंने ही खोला था और मेरा गिरना भी एक नाटक था ताकि तुम मुझे छुओ.

मैं उस वक्त आंटी के साथ बहुत कुछ करना चाहता था, पर समझ नहीं आ रहा था कि कैसे करूं.

अचानक से मुझमें हिम्मत आ गयी और मैंने शीतल आंटी के होंठों को पागलों की तरह चूमना शुरू कर दिया.

होंठ चूमते चूमते मैंने शीतल आंटी के होंठ अपने होंठों के बीच ले लिए और अपनी जीभ शीतल आंटी के होंठों पर फिरा कर होंठ चाटने लगा.

वो भी मस्त हो गईं और हम दोनों खड़े होकर चुम्मी का मजा लेने लगे.
उनका गर्म शरीर मुझे बेहद उत्तेजित कर रहा था.

यूं ही किस करते करते मैंने शीतल आंटी को दीवार से लगा दिया और उनके चूचे दबाने लगा.

करीब दस मिनट तक किस करने और मम्मे दबाने के बाद शीतल आंटी मुझे बेडरूम में ले गईं.
उन्होंने मुझसे कहा- अगर आज तुमने मुझे खुश कर दिया तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो जाऊंगी. तुम मुझे कभी भी पा सकोगे.

यह कह कर आंटी ने साड़ी को ऊपर उठा दिया और अपनी पैंटी नीचे करके बेड पर कुतिया सी झुक गईं.

मैंने शीतल आंटी के एक कूल्हे पर ज़ोर से झापड़ मारा.
शीतल आंटी कराह उठीं- आह आहह.

मैंने उनकी गांड पर हाथ फेरा.
शीतल आंटी ने मुझसे कहा- आ जाओ ना … मेरे साथ प्यार करो.

मैंने कहा- ऐसे नहीं.
शीतल आंटी ने कहा- तो फिर कैसे?

मैंने कहा- जैसे पहली सुहागरात पर होता है, बिना एक भी कपड़े पहने एक दूसरे की बांहों में लिपट कर!
ये सुनकर शीतल आंटी ने मुस्कुराकर अपनी साड़ी नीचे की और कहा- तो तुम्हें रोका किसने है, कपड़े उतारो.

मैंने शीतल आंटी की साड़ी का पल्लू पकड़ कर खींचा और उनकी साड़ी उतार दी.
अब मैंने उनके ब्लाउज के हुक को खोलने की कोशिश की, पर वो अटक गया था.

मैं इतने ज्यादा जोश में था कि मैंने शीतल आंटी का ब्लाउज फाड़ दिया और उतार कर फेंक दिया.

शीतल आंटी की हालत भी कुछ ऐसी थी.
उन्होंने मेरी शर्ट के बटन तोड़ डाले और मेरी बनियान फाड़ डाली.

शीतल आंटी का पेटीकोट उतरते ही वो सिर्फ गुलाबी ब्रा और गुलाबी पैंटी में रह गई थीं.
अब मेरे अन्दर का जानवर जाग चुका था.

मैंने आंटी की ब्रा को खींचा तो हुक टूट गया.
ब्रा हटते ही शीतल आंटी के मोटे चूचे उछल कर बाहर आ गए.

मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने शीतल आंटी के दोनों चूचुकों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया.

मैं पागलों की तरह शीतल आंटी के चूचे चूस रहा था और आंटी भी पागल होती जा रही थीं.
वो दीवार से सटी हुई थीं और अपना एक हाथ ऊपर करके आंखें बंद करके जीभ निकाल कर मादक आवाज में सिसक रही थीं.

वो मेरा नाम ले रही थीं ‘इस्स आंह कुमार आआह हम्म और करो.’

कुछ देर बाद मैंने शीतल आंटी के बाल खोले और उनके बाल पकड़ कर उनके होंठों को चूम लिया.

अब मैं शीतल आंटी की पैंटी की ओर बढ़ा और मैंने उनकी पैंटी उतार दी.

शीतल आंटी की रसीली चूत ऐसी लग रही थी जैसे हल्की झाड़ियों में कोई सुरंग से रस बह रहा हो.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने आंटी की एक जांघ हवा में उठाकर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.

मैं वासना से पागल होता जा रहा था और यही हाल शीतल आंटी का भी था.
वो मेरे बालों को खींच रही थीं और मादक आवाज में चिल्ला रही थीं ‘आह आआह कुमार और अन्दर और अन्दर …’

कुछ देर बाद शीतल आंटी झड़ गईं और उनकी चूत का रस निकल गया.

पर मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था; मैंने शीतल आंटी की जांघों को भी चाटा और दांतों से उधर काटा भी.

कुछ देर बाद शीतल आंटी ने मुझे हटाया और बेड पर धक्का दे दिया.

फिर उन्होंने मेरी पैंट और अंडरवियर को उतारा और मेरे लंड को पागलों की तरह चाटने चूसने लगीं.

फिर उन्होंने मेरा पूरा लंड मुँह में ले लिया और उसे गले तक ले गईं.

मैंने शीतल आंटी के बाल पकड़ कर उनके मुँह को चोदना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद मेरा रस आंटी के मुँह में निकल गया.

फिर शीतल आंटी अल्मारी की ओर गईं.
वो कुछ ढूंढ रही थीं.

मैं पीछे से अपना लंड उनकी गांड पर फिरा रहा था.
मेरे पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं कंडोम ढूंढ रही हूँ.

मैंने कहा- उसकी जरूरत नहीं है.
शीतल आंटी ने कहा- अगर मैं पेट से हो गयी तो?

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा.
वैसे शीतल आंटी के बच्चे नहीं थे.

फिर मैंने शीतल आंटी को पीछे से पकड़ा और बेड पर ले आया.
शीतल आंटी मेरे नीचे नंगी लेटी थीं.

मैंने उनकी टांग उठाई और अपने कंधे पर रख कर एक ही झटके में चूत में लंड पेल दिया.

शीतल आंटी की चूत बहुत गर्म थी और मैं ज़ोर ज़ोर से शीतल को चोदने में लगा था.
आंटी और मैं पागलों की तरह चिल्ला रहे थे.

शीतल आंटी- आह आह कुमार इस्स्स अह्ह्म आआह आईईई मांआ मर गई.
मैं- आह शीतल आंटी मजा आ गया आह

कुछ देर उस तरह चुदाई करने के बाद मैंने शीतल को कुतिया बना लिया.
अब मैं पीछे से उनकी चुदाई करने लगा.

कुछ देर बाद मैंने शीतल आंटी को खड़ा करके बेड पर टांग रखवाकर पीछे से बाल पकड़ कर चोदा.

उसके बाद मैं उनको घुटनों पर लाकर उसके चूचों में लंड डालकर चोदने लगा.

शीतल आंटी अब थक चुकी थीं, पर मैं नहीं.
मैंने आंटी को जमीन पर खड़ा किया और पैर उठाकर चोदने लगा.

शीतल आंटी को दर्द हो रहा था पर मज़ा भी आ रहा था.
वो चिल्ला रही थीं- आह्ह कुमार … मुझे रांड बना दो … करो ज़ोर से मुझे मां बना दो आहहह अपनी शीतल रंडी को चोद दो.

मैंने धकापेल चुदाई की और उनकी चूत में ही झड़ गया.
कुछ देर बाद हम दोनों अलग हुए तो मैंने कहा- अभी मैं आपके लिए गर्भनिरोधक दवा ला देता हूँ.

आंटी ने मुस्कुरा कर कहा- उसकी कोई जरूरत नहीं है. मैं तुमसे बच्चा ले लूंगी. एक बार तुम्हारे कर लूंगी और उन्हें यही लगेगा कि ये उनका बच्चा है.
मैंने उन्हें चूम लिया और हम दोनों दूसरी पारी खेलने की तैयारी करने लगे.

इस तरह से उस दिन मैं और शीतल आंटी 5-5 बार रस में डूबे और हमेशा के लिए एक दूसरे के बिस्तर के साथी हो गए.
शीतल आंटी ने मेरे घर से निकलते वक़्त मुझे किस किया और कहा- मैं आज से तुम्हारी रांड हूँ, जब मन कर आ जाना. हो सके तो हर रोज चोदने आ जाना.

आपको मेरी ये न्यूड बाथ सेक्स स्टोरी कैसी लगी, कमेंट्स में बताएं.

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