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मेरे चोदू यार का लंड घर में सभी के लिए- 1

मेरी न्यू अन्तर्वासना स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मैं अपनी इंस्टीट्यूट के ऑफिस के एक लड़के की ओर आकर्षित हो गयी. मैं उसके लंड का मजा लेना चाहती थी.

दोस्तो, मेरा नाम मानसी सक्सेना है और मैं उत्तर प्रदेश के एक सुल्तानपुर जिले की रहने वाली हूँ।
मेरी उम्र 21 की और मेरी चूचियाँ 38ई हैं और मेरी कमर 28 और मेरी गांड भी बड़ी है, 38 की है।
मेरे शरीर की बनावट बिल्कुल पोर्न एक्ट्रेस कैसीडी बैंक्स की तरह है।
मैं एक इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर का कोर्स कर रही हूँ।

तो चलिए अब सीधे मेरी न्यू अन्तर्वासना स्टोरी पर आते हैं।

इस कहानी को सुन कर मजा लें.

मेरे घर में मेरे अलावा मेरी मम्मी है जिनका नाम सुधा सक्सेना है। इनका फिगर 34D-30-46 है।
मम्मी की उम्र अभी 40 की है लेकिन अभी भी वो एकदम माल है. इतना भरा फिगर होने के बाद भी मम्मी अभी भी बहुत सेक्सी साड़ी बहुत सेक्सी तरीके से पहनती हैं।

मेरी मामी भी हमारे साथ रहती है और उनका फिगर 36-22-36 का है. मामा की ये दूसरी बीवी है. पहली की मौत अपनी बेटी को जन्म देते ही समय हो गयी थी.
और मामी की कम उम्र में शादी हुई थी जब वो बस 20 साल की थी. अब वो 25 की है.

मेरे मामा की पहली पत्नी की बेटी जूही है जो अभी 19 साल की है। ये अभी एकदम जवान और सील पैक है और बहुत कड़क भी है।
जूही अपने पापा की जगह एक सरकारी आफिस में नौकरी पाई है।

मेरे मामा और पापा दोनों एक सड़क हादसे में चार साल पहले चल बसे थे। अब घर में बस हम चार औरतें ही रहती हैं।
पापा और मामा की मृत्यु के कुछ दिनों के बाद हम लोगों को पैसे की बहुत दिक्कत हुई. क्योंकि तब जूही नाबालिग थी तो उसको नौकरी नहीं मिल सकी।

अभी इसी साल 19 की होने पर उसकी नौकरी मामा के जगह मिली तो घर के कुछ हालात सुधरे।
मैं और मेरी मम्मी घर घर जा कर दुल्हन का शृंगार करती हैं और मामी घर संभालती है।

अब काम के साथ साथ मैंने एक कंप्यूटर का कोर्स करने के लिए एक इंस्टीट्यूट में अपना एडमिशन करवा लिया.
दस से पांच की मेरी क्लास रहती और शाम को मम्मी के साथ जाती।

एक दिन मुझे इंस्टीट्यूट से अपना आई डी कार्ड बनवाना था तो अपनी टीचर से पूछा.
तो वो बोली- आफिस में जाकर पता कर लो, वहीं से मिलेगा।

अब मैं चली आयी आफिस!
वहां तीन या चार लोग अलग अलग केबिन में बैठे थे.
तो मैं सब में देखने लगी.

लास्ट वाले केबिन में एक बीस साल का लंबा, चौड़ा, गोरा बहुत स्मार्ट सा एक लड़का बैठा था.
मैंने उससे ही पूछा तो उसने मुझसे नाम और सारी डिटेल पूछ कर कार्ड बना दिया.
और मैं वहां से अपने क्लास चली आयी।

वैसे तो मैंने अब तक तीन लड़कों से बात की थी. जिनमें से दो मुझे नियमित रूप से चोदते भी थे. लेकिन अभी मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं था.

मुझे वो आफिस वाला लड़का बहुत ही ज़्यादा अच्छा लगा। अब जब भी मैं उसके बारे में सोचती तो मेरी चुत में कुछ होने लगता.
तो अब मैंने सोचा क्यों न अभी मेरा तीन साल का कोर्स है, इसी से अपनी सेटिंग कर लूं, ये मेरी यहाँ भी मदद कर देगा और मुझे एक नया लन्ड भी चुदने के लिए मिल जाएगा।

अब उस दिन के बाद से मैं हमेशा उसी के पास जाने लगी किसी न किसी काम से।

हमारे इंस्टिट्यूट का ड्रेस स्कर्ट और वाइट शर्ट था। मैं हमेशा से सेक्सी ही कपड़े पहनती थी मेरे घर में भी!
और मुझे अच्छा लगता है कि जब कोई मुझे या मेरे शरीर को देखता है.

मेरा इतना सेक्सी शरीर है ही इसी लिए … उसको छुपा कर रखने का क्या मतलब!
मैं हमेशा से ही खुले कपड़े पहनती हूँ जिससे मेरे बदन का आकार और हिस्सा लोग देखें।

अब मैंने इंस्टिट्यूट ड्रेस स्कर्ट को मिनी स्कर्ट करवा लिया था और शर्ट वाइट! वो भी बिल्कुल टाइट थी जिसमें मेरे बड़े बड़े मम्में साफ दिखते थे.
मैं अपने शर्ट का कलर के बाद वाला भी बटन खुला रखती हूं जिससे मेरे क्लीवेज भी दिखती है।

हमेशा मैं फैंसी ब्रा और पैंटी पहनती हूँ; लाल लिपस्टिक और लाल नेल पेंट और काजल … ये मैं हमेशा लगाए रहती हूं।

अब वो ऑफिस वाला लड़का मेरे फिगर मेरी नंगी टांगें, मोटी गांड को घूरता; जब किसी काम के लिए झुकती तो वो मेरे क्लीवेज भी ताड़ता।
वो धीरे धीरे मेरे शरीर से मोहित होता जा रहा था।

एक दिन मुझे एक क्लास की लड़की ने बताया कि मेरी साथ की एक अन्य लड़की, जिससे मेरी बातचीत होती थी क्लास में, ने उस लड़के का नंबर ले लिया था।
अब मुझे जल्दी ही कुछ करना था क्योंकि उसके पीछे कई लड़कियाँ लगी थी और एक लड़की तो नंबर पा गयी थी उसका।

मैं किसी काम के बहाने से उस लड़के के पास गई. आज मैंने उससे थोड़ी बात इधर उधर की करी और इसी बीच मैंने उसका नाम.
पूछा तो तो बोला कि मेरी नाम सागर है।

मुझे जल्दी उसका लन्ड लेने की चाह होने लगी. लेकिन मैंने थोड़ा धीरज रखा और फिर मैंने एक झूठ बोला- मैं आपके पास काम से अक्सर आती हूँ लेकिन आपका केबिन बन्द रहता है. तो सर, आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए मैं आपसे पूछ कर आ जाऊंगी।
सागर ने मुझे अपना नंबर दे दिया. मैंने भी अपना नम्बर उसे दे दिया.

और क्लास में आते ही मैंने अपनी व्हाटसअप पर अपनी एक बहुत सेक्सी वाली डी पी लगा लिया जिससे जब वो मेरा नंबर देखे तो उसे दिख जाए।

मैंने शाम तक इंतज़ार किया कि वो मैसेज करेगा. लेकिन उसका कोई मैसेज नहीं आया.
तो मैंने ही पहले सागर को हेलो लिख कर भेजा.

करीब दस मिनट बाद उसका रिप्लाई आया. तो फिर हालचाल पूछना हुआ. उसके बाद थोड़ी बहुत साधारण बात हुई.
उसने मेरे घर के बारे में पूछा तो मैंने बताया।

वो बोला- मैं तो अक्सर उधर काम से आता हूं।
तो मैंने भी मौका देख कर बोला- ठीक है, अब आप आना तो हमारे घर भी आना.
वो पूछने लगा कि घर में कौन कौन है.
मैंने बताया सब उसको।

एक दिन हमारे ही माहौल के एक भय्या की शादी थी तो हम लोग सब तैयार होकर 9 बजे शादी में गए.

तो कुछ ही देर बाद मुझे सागर भी वहां दिखा आइसक्रीम खाते हुए।
क्या लग रहा था … काली शर्ट और पैन्ट में था।

मैंने लाल रंग का गाउन पहना हुआ था जो कि बिना आस्तीन के था और आगे से हल्का डीप गला!

मैं तुरंत सागर के पास गई।
मुझे देख कर वो हैरान हुआ बोला- तुम यहाँ कैसे?
मैंने बोला- मेरे जानने वाले हैं जिन भय्या की शादी है।

अब उसने एक आइसक्रीम मुझे भी लाकर दिया.
हम दोनों किनारे खड़े होकर बात करने लगे.

तभी तक मेरी मम्मी सुधा मेरे पास आई.
तो मैंने भी उनका परिचय सागर से कराया.

मम्मी ने बड़ी वासना भरी नज़रों से उसको ऊपर से नीचे देखा जिसको सागर भी भाम्प गया।
मेरी मम्मी को मैं घर में सुधा ही बोलती हूँ तो आगे मैं सुधा ही बोलूंगी आप समझ जाना।

सुधा पर मुझे पिछले एक साल से शक था कि शायद इनका चक्कर बाहर किसी से चल रहा है.
क्योंकि जब तक पापा थे, तब तक हर हफ्ते सुधा उनसे चुदती थी और सुधा को अपनी गांड बजवाने का भी बहुत शौक है, इसीलिए उनका पिछवाड़ा भैस की तरह बाहर आ गया है।

अब उन्होंने सागर से हाथ मिलाया और फिर वो उससे उसके बारे में पूछने लगी।

कुछ देर बाद जूही आयी तो मैंने उसका भी परिचय सागर से कराया.
जूही बोली- दीदी चलो, खाना शुरू हो गया है. भीड़ बहुत है चलो खा लिया जाए।

सुधा ने सागर से बोला- चलो बेटा तुम भी खा लो।

हम चारों चले गए खाने के प्लेट लेने.
वहां मेरी मामी खड़ी थी; तो उनसे भी सागर को मिलवाया.

फिर हम लोग उसी भीड़ में घुस गए.
मैं जानबूझकर सागर के आगे चल रही थी जिससे वो भीड़ में मेरे ही साथ ही घुसे.
उसके बगल में सुधा उससे बतियाती हुई चल रही थी।

मैं आगे थी. एक आदमी अपनी प्लेट में खाना निकाल कर पीछे हटा तो वो मुझे धकेलते हुए निकला। वहां जगह ना होने के वजह से मैं एकदम पीछे को गिरने को हुई.
तो पीछे से सागर ने मेरी कमर पकड़ कर मुझे सहारा दिया और उसका हाथ जैसे ही मेरी कमर को छुआ मुझे कुछ कुछ होने लगा।

मैं कुछ आगे बढ़ी ही थी कि तब तक पीछे से एक और धक्का लगा.
अबकी सागर का हाथ मेरे पेट पर रखा गया. मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा और पीछे मुंह करके बोली- आप मुझे पकड़े ही रहो, वरना मैं गिर जाऊंगी।

वो मेरे पेट पर हाथ रख कर मुझे पकड़े रहा जब तक मैंने खाना नहीं ले लिया।

हम लोग खाने लगे.

सागर की प्लेट में पनीर खत्म हो गया तो वो लेने जाने लगा.
तभी सुधा बोली- रुको बेटा, मैं भी चलती हूँ मुझे भी लेना है।

मैं थोड़ा आगे होकर उन दोनों पर नज़र बनाए थी। वो दोनों बात करते हुए जा रहे थे।

जब वो दोनों भीड़ में घुसे तो सागर ने अपना हाथ सुधा की गांड पे लगा लिया और सुधा भी बिना कुछ बोले भीड़ में आगे बढ़ी जा रही थी।
मुझे ये नहीं समझ आया कि इतनी जल्दी पटा कैसे लिया सुधा ने सागर को?
जो भी हो … लेकिन मेरे लिए अब और आसानी हो गयी थी।

कुछ देर हम लोग शादी में एन्जॉय करते रहे. फिर ग्यारह बजे मम्मी बोली- मानसी बेटा, चलो अब चला जाए।
सागर भी हमारे साथ बाहर आया और वो चला गया अपनी स्कूटी निकालने!

हम चारों बाहर आकर ऑटो का इंतज़ार करने लगे।

सागर गाड़ी लेकर बाहर आया तो उसने मम्मी से बोला- कैसे जाएंगी आप लोग?
तो सुधा बोली- अभी ऑटो आ जाए … उसी से।
सागर बोला- इतनी रात को इस रूट पर ऑटो नहीं चलती है. लेकिन चलिए कुछ देर इंतज़ार कर लेते हैं, शायद आ जाए. तब तक मैं रुका हूँ।
सुधा बोली- अरे बेटा, तुम परेशान मत हो. हम चले जाएंगे.
लेकिन सागर नहीं माना और रुका रहा।

देखते देखते आधा घंटा हो गया लेकिन कोई गाड़ी नहीं आई.
अंदर शादी में और बाहर भी बहुत सन्नाटा हो गया था।

सागर मम्मी से बोला- आप रुकिए, मैं देखकर आता हूं आगे कोई ऑटो या रिक्शा हो तो बुला लाऊं।

करीब 20 मिनट बाद वो आया और बोला- कोई नहीं है दूर दूर तक … हाईवे का किनारा है इसलिए मुश्किल है. 12 बज चुके हैं, चलिए दो बार में आप लोगों को घर छोड़ दूँ। आप और मामी अंदर जाकर रुकिए, मैं इन दोनों को घर छोड़ आता हूं क्योंकि इन दोनों का अकेले रुकना ठीक नहीं है।

सागर ने मुझे बुलाया और मैं अपना गाउन उठा कर इधर उधर पैर करके बीच में बैठ गयी और मेरे पीछे सपना बैठी तो मैं बिल्कुल सागर के अंदर घुस गई।

अब वो चला और मेरी दोनों चूचियाँ उसके पीठ पर बिल्कुल चिपकी थी. जब वो ब्रेक मारता तो मेरी चूची रगड़ती।
मैंने अपने दोनों हाथों को उसकी जांघ पर रख दिये और मज़ा लेते हुए घर आ गयी।

अब सागर फिर वापस गया और सुधा बीच में बैठ कर आई।

प्रिय पाठको, इस भाग में आपको ज्यादा सेक्स नहीं मिला. लेकिन अगले भागों में आपको सेक्स का मजा जरूर मिलेगा.

मेरी न्यू अन्तर्वासना स्टोरी का अगला भाग:

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