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मेरी मम्मी की चुदाई सहकर्मी अध्यापक के साथ

हॉट मदर सेक्स कहानी मेरी मम्मी की है. वो एक स्कूल टीचर हैं, मैंने उन्हें अपने स्कूल के एक जवान टीचर से अपनी चूत चुदाई करवाते देखा.

दोस्तो, मेरा नाम निखिल है, मैं छत्तीसगढ़ के एक शहर से हूँ. मेरी उम्र अभी 21 वर्ष की है.

यह एक सच्ची घटना है, जिसमें मेरी मम्मी की चुदाई उनके स्कूल के एक सहकर्मी अध्यापक के साथ हुई थी.
अपनी मम्मी की चुदाई को मैंने अपनी आंखों से देखा था.
उस घटना के बाद मुझे मेरी मम्मी की हकीकत के बारे में पता चला.

यह हॉट मदर सेक्स कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं क्लास में पढ़ता था. तब मेरी उम्र जवानी की दहलीज पर हिलोरें ले रही थी.

मेरे परिवार में मैं, मम्मी और पापा और एक बहन हैं. हमारा बाकी परिवार गांव में रहता है.
मेरी बहन भी गांव में दादी दादा चाचा चाची व उनके परिवार के साथ रहती है.
हम लोग यानि मैं और मम्मी पापा शहर में रहते हैं.

मेरी मम्मी जहां टीचर हैं, वहां पापा ने जमीन लेकर एक छोटा सा घर बना लिया था और हम तीनों वहीं रहने लगे थे.

मेरी मम्मी सरकारी स्कूल में टीचर हैं और पापा की मोबाइल की छोटी सी दुकान है.

मैं अब आप सबको अपनी मम्मी का परिचय दे देता हूँ.
मेरी मम्मी का नाम निधि है. उनकी उम्र उस समय 39 वर्ष थी, पर वह 27-28 की उम्र की लगती थीं.
उनकी हाइट 5 फुट 3 इंच है. उनका गोल चेहरा है और वो बहुत गोरी हैं.

मम्मी की बॉडी न ज्यादा मोटी है और न ही ज्यादा पतली है. उनका फिगर साइज कुछ यूं है कि कमर 32 इंच की, गांड 36 की और मम्मों का आकार 34D की ब्रा में कसा सा रहता है.

वह हमेशा ही अपनी साड़ी को चुस्त ही बांधती हैं और एकदम टाइट गहरे गले और बिना आस्तीन का ब्लाउज पहनती हैं जिसमें से उनके बड़े-बड़े संतरे और अधिक आकर्षक लगते हैं.

मेरी मां की पीठ ज्यादातर खुली ही रहती है जो एकदम मारू लगती है.
उनकी इस कमनीय काया पर लगभग सभी मर्दों की नजरें अटकी रहती हैं.
उन्हें पहली नजर में ही देखकर कोई भी उनको चोदने के लिए पागल हो जाता है.

मेरी मां जब ड्यूटी जाती हैं तो ज्यादातर ऐसे ही टाइट साड़ी व टाइट ब्लाउज पहनकर जाती हैं.
जिसमें से उनके मम्मों पर साड़ी का पल्लू रहने पर भी उनकी भरी हुई चूचियों के आकार का अनुमान कोई भी आसानी लगा सकता है.

इस घटना के समय मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी पर जैसे जैसे मैं बड़ा होता गया तो सब समझता गया.

अपनी मम्मी की उस चुदाई वाली घटना से तथा अपनी मम्मी के आकर्षक जिस्म को देखकर ही मैं बहुत रोमांचित हो जाता था.
मैंने अपनी मम्मी की चुदाई को देखा था लेकिन इसके बारे में मैं किसी को बता भी नहीं सकता था क्योंकि इसमें बदनामी हमारे घर की ही होती.

साथ ही इस घटना को मैं अपने मन में दबाकर रख पा रहा था.
मुझे बहुत बैचैनी होती थी इसलिए बहुत सोच विचार के बाद इसे मैंने आप लोगो के साथ शेयर करना उचित समझा.

मैं अब सेक्स कहानी के रूप में उस घटना को विस्तार से आपके सामने रख रहा हूँ कि कैसे मेरी मम्मी और उनके सहकर्मी अध्यापक के साथ उनकी चुदाई हुई.

मेरी मम्मी रोज अपनी स्कूटी से स्कूल जाती हैं.
उनका स्कूल हमारे घर से करीब दस किलोमीटर की दूरी पर है.

उन्हीं के स्टाफ में एक महेश सर (बदला हुआ नाम) नामक टीचर हैं.
उनकी उम्र उस समय 27-28 वर्ष की थी. वह दिखने में काफी हट्टे-कट्टे थे और कुंवारे थे.

वह बहुत ही मजाकिया स्वभाव के थे तथा पापा से उनकी अच्छी जान पहचान भी थी.
वो अकसर ही हमारे घर आते जाते रहते थे जिससे मम्मी और उनकी अच्छी घुटने लगी थी.

वो दोनों एक ही जगह जॉब करने के कारण काफी घुले-मिले थे.
मेरी मम्मी के आकर्षक जिस्म के कारण महेश सर मम्मी के बहुत करीब आने लगे थे.
ऊपर से वे अनमैरिड भी थे.

परन्तु मम्मी पहले ऐसी नहीं थीं. उनका सजना संवरना सिर्फ पापा के लिए था तथा वह पापा के साथ बहुत खुशी से रहती थीं.
मम्मी पापा दोनों एक दूसरे से एक दोस्त की तरह रहते थे.

ऐसे ही उनका जीवन चल रहा था और उधर महेश सर भी मम्मी के बहुत करीब आ रहे थे.
हालांकि ये बात मुझे उन दोनों के बीच सेक्स होने के बाद में पता चली थी.

एक दिन हमारे गांव से खबर आई कि हमारे दादाजी की तबियत बहुत खराब है, तो हमें वहां जाना था.
परंतु मेरे एग्जाम थे और मम्मी के स्कूल में भी एग्जाम होने वाले थे तो उनको भी छुट्टी नहीं मिल रही थी.

इस कारण से पापा अकेले ही गांव चले गए.
अब घर में मैं और मम्मी बस थे.

ऐसे ही दो दिन बीत गए.
फिर पापा का कॉल आया कि मैं कुछ दिन और नहीं आ सकता, पिताजी की तबियत भी ठीक नहीं है और यहां फसल की कटाई भी करवाना है.
मम्मी बोलीं- ठीक है, आप उधर का देख लो, मैं इधर मैनेज कर लूंगी.

ऐसे ही 4 दिन और बीत गए.

फिर एक दिन मम्मी की स्कूटी खराब हो गई और बाइक पापा लेकर चले गए थे.

अब मम्मी को स्कूल ले जाने के लिए महेश सर घर आने लगे थे और वो उन्हें छोड़ने भी आते थे.
इस बीच मम्मी और महेश बहुत ही क्लोज हो गए थे.

मुझे उन दोनों पर थोड़ा शक भी होने लगा था परन्तु मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

उन दिनों मेरे एग्जाम की तैयारी चल रही थी तो मैं पूरे दिन घर पर ही रहता था.
आने वाले संडे को मुझे मम्मी की स्कूटी बनवाने के लिए ऑटोमोबाइल जाना था.

मैं अपने एक दोस्त की मदद से स्कूटी को लेकर चला गया.

मैंने मम्मी को बोल दिया कि मैं स्कूटी छोड़कर अपने दोस्तों के साथ उनके घर में स्टडी करूंगा और स्कूटी बनने के बाद ही शाम को वापस आऊंगा.
मम्मी ने हामी भर दी.

सुबह 10 बजे मैं घर से निकल गया.
गाड़ी वाले की दुकान में जाकर देखा कि मैं अपना पर्स घर पर ही भूल गया था.
फिर मैं वहां से किसी से लिफ्ट लेकर घर पहुंचा.

घर के पास जाते ही मैंने देखा कि महेश सर मेरे घर के पास इधर उधर देख रहे थे.

मैं वहीं रुककर देखने लगा और अचानक से वो मेरे घर में गेट से अन्दर चले गए.
उन्होंने गेट को अन्दर से बंद कर दिया.

मुझे कुछ अजीब लगा.
मैंने जाकर देखा तो घर का गेट अन्दर से बंद था.

अब मुझे लगा कि कुछ तो गड़बड़ है. मैं घर के दूसरी तरफ गया और दीवार से कूदकर चुपके से अन्दर चला गया.
छत की सीढ़ियों के नीचे से बरामदे में खिड़की से देखा तो हैरान रह गया.

महेश सर मम्मी को पीछे से पकड़े हुए थे वो अपने हाथ को मम्मी के शरीर के आगे कमर पर इधर उधर कर रहे थे और वो दोनों आपस में कुछ बात कर रहे थे.

मम्मी कुछ ही देर पहले नहा कर निकली थीं, उनके बाल कुछ गीले थे और बाल खुले भी थे.
उस समय मेरी मम्मी बड़ी कयामत लग रही थीं. वो साड़ी पहनी हुई थीं.

मैं चुपके से उन दोनों को देखने लगा.
कुछ पल बाद मम्मी महेश की तरफ घूम गईं और महेश सर के होंठों में अपने होंठ लगाकर किस करने लगीं.

वो दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान लगातार कर रहे थे और उनके हाथ दोनों के शरीर में इधर उधर चल रहे थे.

महेश सर लगातार किस करते करते मम्मी की कभी गांड दबाते तो कभी उनके बालों को सहलाते.

वैसे ही वो दोनों 5-7 मिनट तक एक दूसरे का रसपान करते रहे.
फिर दोनों अलग हुए तो दोनों की सांसें तेज गति से चल रही थीं.

मुझे मम्मी की शरीर पूरा दिखाई दे रहा था, उनकी प्रत्येक सांस के साथ उनकी ऊपर नीचे हो रही थीं.

फिर वो दोनों मम्मी के रूम में चले गए.
मैं भी बड़ी चतुराई से मम्मी से रूम के पास वाली खिड़की के नजदीक आ गया.
वहां एक कूलर लगा था, जिसके बाजू में से कमरे के अन्दर का नजारा दिख रहा था.

फिर अन्दर जाते ही महेश सर ने मम्मी को पकड़ कर बेड पर गिरा दिया और वह उनके ऊपर आ गए.

वो मेरी मम्मी के गालों में, गले पर किस करने लगे और उनके होंठ को अपने होंठों से काटने लगे.
कुछ 5 मिनट तक वो दोनों ऐसे ही करते रहे.

फिर महेश सर उठकर बेड पर बैठ गए और मम्मी को उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया.

वो अपने हाथों से मम्मी के पीछे पीठ का मजा लेने लगे, मम्मी के ब्लाउज के बाहर उनकी गोरी पीठ पर अपने होंठ फेरने लगे.

फिर महेश सर ने मम्मी की साड़ी का पल्लू हटाकर उनके मम्मों को पकड़ लिया और गोलाइयां नापने लगे.

इससे मम्मी की सांस तेज-तेज चलने लगीं.
उनके बड़े बड़े संतरे उनके टाइट ब्लाउज से ऊपर की तरफ बहुत ज्यादा ऊपर नीचे होने लगे और उनकी दोनों चूचियों के बीच की नाली बहुत मस्त दिखने लगी.

महेश सर मम्मी की चुचियों के बीच की दरार में अपनी जीभ लगाकर मजा लेने लगे.

फिर महेश ने मम्मी को लेटा दिया और उनके पेट पर चूमने लगा.
वो धीरे धीरे मम्मी के पूरे शरीर पर चूमने चाटने लगे.

मेरी मम्मी की साड़ी को भी पूरी तरह से उतार कर अलग कर दिया.
अब मम्मी ब्लाउज और पेटीकोट में थीं.

फिर महेश ने मेरी मम्मी को बेड पर बैठाया और उनके पीछे आकर पीछे से उनको अपनी गोद में बैठा लिया.

मेरी मम्मी के दोनों संतरों को महेश ने अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और वो मम्मी के चूचों को जोर जोर से दबाने व सहलाने लगे.
साथ ही मम्मी की गर्दन पर किस करने लगे.

मम्मी भी पूरा पूरा उनका साथ दे रही थीं.

फिर महेश ने मम्मी का ब्लाउज के बटनों को एक एक करके खोल दिया और उसे हटा दिया.

मेरी मम्मी सिर्फ ब्रा में आ गईं. उनके 34D कप साइज की ब्रा के ऊपर से मम्मी के चुचे कयामत लग रहे थे.
ये देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था.

अब महेश सर ने मेरी मम्मी को लेटा दिया और उनकी ब्रा के ऊपर से उनके मम्मों को मसलने व चूमने लगे.

कुछ देर बाद मम्मी की ब्रा को निकालकर उनके एक दूध को अपने मुँह में लेकर महेश सर चूसने लगे.
मम्मी के दूध को पूरा निचोड़ कर पीने लगे. साथ ही दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगे.

मैं मम्मी के बड़े बड़े मम्मों को पूरा नंगा देख पा रहा था, जिसे महेश सर कितने मजे से पी रहे थे और मेरी मम्मी आह आह करती हुई उन्हें अपने दूध पिला रही थीं.

महेश सर ने खड़े होकर अपने कपड़े उतारे और अंडरवियर में आ गए, जिसमें से उनका लंड काफी टाइट लग रहा था.

फिर महेश सर ने मम्मी के पेटीकोट और पैंटी को एक साथ उतार दिया और अपनी जीभ मम्मी की चूत पर ले जाकर चूसने लगे.

मम्मी लगातार सीत्कार भर रही थीं और अपने ही हाथों से अपने मम्मों को दबा रही थीं.

चूत चाटने के बाद महेश सर ने अपना अंडरवियर उतार दिया और मम्मी के ऊपर लेट गए.
महेश सर ने मम्मी के दोनों पैरों को पकड़ कर अपने लंड को चुत पर सैट किया और एक ही धक्के में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.

शायद महेश सर का लंड 7 इंच लंबा और 3 इच मोटा था जिसके चुत में घुसने से मेरी मम्मी की आवाज निकल गई- आह मर गई महेश … धीरे करो. तुम्हारा बहुत बड़ा और मोटा है.
मगर महेश सर ने मम्मी कि एक न सुनी और लगातार धक्के पर धक्के लगाते रहे.

कुछ देर बाद शायद मेरी मम्मी को भी मजा आने लगा था और वो ही नीचे से उनके हर एक धक्के का जवाब अपनी गांड उठा उठा कर दे रही थीं.

लगातार 20 मिनट तक ताबड़तोड़ चुदाई करने के बाद वो दोनों एक साथ झड़ गए.
महेश सर ने अपना माल मम्मी की चूत के अन्दर ही छोड़ दिया.

फिर कुछ मिनट तक दोनों ऐसे ही लेटे रहे.
उसके कुछ देर बाद एक बार फिर से दोनों में घमासान चुदाई का युद्ध हुआ.
इस बार उन दोनों 3 अलग अलग पोजिशनों में चुदाई का मजा लिया.

महेश सर ने मम्मी की जमकर चुदाई का मजा लिया और कपड़े पहन कर चले गए.

उन दोनों की बातों से मुझे पता चला कि पापा जब से गांव गए थे, उसके तीसरे दिन से ही हर रात मम्मी और महेश सर के बीच चुदाई हो रही थी.

मेरे सोने के बाद मम्मी कितनी चतुराई से महेश सर को घर में बुलाकर अपनी चुत की आग को मिटा रही थीं.
उनकी बातों से ये भी जानकारी मिल गई थी कि मेरे पापा का लंड मम्मी की चुत आग ठंडी करने में असमर्थ है.

आज मुझे मम्मी की चुदाई देखकर उनकी हकीकत के बारे में पता चला, हॉट मदर सेक्स देख मैं बस चुप रह गया.

धन्यवाद दोस्तो, मुझे कमेंट्स में बताइएगा कि आपको मेरी हॉट मदर सेक्स कहानी कैसी लगी?

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