फैशन शो में नग्न परेड के बाद चुदाई- 2

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पहली चुदाई न्यूड गर्ल की हुई पड़ोस के जवान लड़के से! एक दूसरे के सामने कपड़े उतार कर रैंप वाक करने के चक्कर में मेरी कुंवारी बुर चुद गयी यार!

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी में बता रही थी कि क्या हुआ.
कहानी के पहले भाग

में अब तक आपने पढ़ा था कि राहुल के सामने मैं कैटवाक करती हुई लगभग नंगी खड़ी थी.
मेरी गांड फटी हुई थी, तब भी खुद को किसी तरह से संयत किए हुई थी.

अब आगे पहली चुदाई न्यूड गर्ल:

यह कहानी सुनें.

उसने पीछे हाथ ले जा कर मेरे चूतड़ों को सहलाया और कहा- मस्त है तू तो!
उसके हाथ लगाते ही मैं तो जाने कहां पहुंच गई.

तभी अचानक उसने दोनों हाथों से मेरी पैंटी को नीचे जांघों तक सरका दिया और वहां देख कर बोला- वाह एकदम चिकनी चमेली.
मेरी तो समझ में ही नहीं आया कि क्या करना है.

मैं पीछे मुड़ गई पर मुझे लग रहा था कि पैंटी नीचे स्लिप हो रही है इसलिए पैरों के बीच में गैप बढ़ा दिया ताकि पैंटी नीचे ना गिरे.

पर अचानक उसने अपनी एक उंगली वहां टांगों के बीच रख दी और बोला- ये तो जबरदस्त गीली हो रही है.
मैं हडबड़ा कर पैर मिला कर सीधी खड़ी हो गई पर इस सब में पैंटी कदमों में ढेर हो गई.

जो मैं नहीं चाहती थी, वही हो गया.
मैं निपट नंगी हो गई थी.

पैंटी उठाने के लिए झुकने का मतलब था पीछे से बुर के दर्शन सुलभ कर देना और ना उठाने का मतलब ऐसे ही नंगी खड़ी रहना.

फिर सोचा कि तू ऐसे ही होने तो आयी थी, तो कर डाल एक वॉक ऐसे ही.
मैं पीछे उसकी तरफ मुड़ी.

उसकी आंखें अब मेरी टांगों के जोड़ पर थीं, जहां पर चिकनी बुर की शुरूआत की पर्याप्त झलक मिल रही थी.
सारी रिहर्सल याद आ गयी जो प्रिया ने करवाई थी.

मैंने हाथ भी किसी तरह हटाए चूचियों से … और पूरी नंगी ही उसकी तरफ चल दी.
उसकी आंखें ऊपर से नीचे तक हर हिस्से की नाप-जोख में लगी थीं और मेरे निप्पल तन कर उसके सामने खड़े हुए थे.
उसकी आंखें कभी मस्त चूचियों को निहारतीं, कभी चिकने बदन पर फिसलती हुई नीचे आ पहुंचतीं.

मेरा हाथ बार बार उसे छुपाने के लिए टांगों के बीच पहुंच रहा था पर मैं कंट्रोल कर रही थी.

मैंने कहा- देख लिया, मैं भी कर सकती हूँ ये सब … और तुमसे ज़्यादा!
इतना सुनना था कि उसने कहा- मैं भी कर सकता हूँ, बोलो क्या करना है?

मैंने कहा- तो उतारो सब!
उसने झट से अपना सब उतार दिया और जैसे ही उसका हाथ चड्डी पर पहुंचा, मेरी तो दिल की धड़कनें ही रुक गईं.

उसने उसको धीरे धीरे नीचे करना शुरू किया और मेरी आंखें वहीं टिक गईं.
अगले ही पल उसकी चड्डी नीचे और लहराता हुआ लंड बाहर था.

मेरे तो दिल और दिमाग सुन्न पड़ गए थे.
उसने अपने खड़े लंड पर हाथ फेरा. मेरा दिमाग कह रहा था कि उधर ना देखो, पर नजर वहां से हट ही नहीं रही थी.

यही तो है वो जो किसी लड़की को पूर्णता प्रदान करता है; बिना इसके एक लड़की अधूरी ही रहती है.
जिसे देखने मात्र से मन प्रफुल्लित हो उठता है.

उसने अपनी वॉक शुरू की.
पहली बार किसी लड़के को ऐसे चलते देख रही थी. मन तो कर रहा था कि हम भी उस पर अपना हाथ फ़ेर कर देखें, पर बोल नहीं सकती थी.

दोनों लोग अगल बगल बैठ गए थे, बोलने के लिए कुछ बचा नहीं था.

मैं वहां से उठी और बोली- अब सब खत्म किया जाए!
उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ कर खींचा और अपनी जांघ पर बैठा लिया.

उसने कहा- इतनी जल्दी भी क्या है?
मेरे नंगे चूतड़ अब उसकी जांघों पर रखे हुए थे और उसका एक हाथ मेरी चूचियों पर आ गया था.
दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया.

आह … पूरे शरीर में मानो करंट दौड़ गया.

उसने मेरे हाथ को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया … और मैं किसी रोबोट की तरह वही क्रिया दोहराने लगी.
मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था और वो दोनों स्तनों को सहलाने में लगा था.

मेरे निप्पल भी बेशर्म तन कर खड़े होकर उसका ही साथ दे रहे थे.

धीरे धीरे उसने मेरी पूरी बॉडी का जायजा लेना शुरू कर दिया.
उसका एक हाथ नीचे की ओर बढ़ चला और दोनों टांगों के बीच पहुंच गया. दूसरा हाथ अभी भी चूचियां मसलने में व्यस्त था.

मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था. उसका हाथ मेरी टांगों को खोलकर चिकनी बुर तक पहुंच चुका था, जो उस समय रस से सराबोर थी.

उसने धीरे धीरे भग्नासा को छेड़ना शुरू कर दिया. मेरा खुद पर से नियंत्रण खत्म हो चुका था.
अब मैं वही कर रही थी, जो वो कह रहा था.

उसने मुझे अपनी टांगों के बीच में बैठा लिया. मेरे मुँह के ठीक सामने उसका लंड था जो मेरे मुँह में जाने के लिए तैयार था.
मैंने उसके आगे के भाग पर अपनी जीभ फिरायी.

कुछ अजीब सा था टेस्ट … पर उस पर कोई रिएक्शन दे पाती, उससे पहले ही उसने आधा लंड मेरे मुँह में ठूंस दिया.
उसने मेरे बाल पीछे से पकड़ कर मेरे सर को आगे पीछे करने लगा.

इस तरह से मेरा मुख चोदन आरंभ हो गया.
अब मुँह से केवल गूं गूं की आवाज ही निकल पा रही थी.

जिसको कुछ देर पहले ही छूने मात्र की अभिलाषा रोमांचित कर रही थी, उसको अब मुँह में लेकर आनंदित थी.

पर ये नहीं पता था कि इसको कहीं और जाने के लिए मैं स्वयं ही प्रेरित एवं तैयार कर रही हूं, जिसके लिए मैं खुद ही तैयार नहीं हूं.

उधर मेरी चूचियों पर उसके हाथों का बढ़ता दबाव, मेरी टांगों के बीच का गीलापन बढ़ा रहा था.
मेरी कोशिश अभी भी टांगों को मिलाए रखने की थी, जिससे वहां का नज़ारा उपलब्ध ना हो, परन्तु क्लीन शेव्ड बुर को इस प्रकार से छुपाना सम्भव नहीं होता.

वो अपनी झलक देकर लंड को उकसाने का काम बखूबी करती रहती है, साथ ही टांगों को गीला भी करती रहती है.

उसने पूछा- अब तो शर्म नहीं आ रही है ना?
मैंने ना में सिर हिलाया.

उसने कहा- गुड. तो अब बिना शर्माये और बिना कुछ छुपाये एक वॉक हो जाए.

अब कुछ शर्माने को बचा नहीं था इसलिए मैं उठी और अबकी बार बिना हाथ से कुछ भी छुपाये वॉक करने लगी.

इस बार वो हर अंग का पूर्ण लुत्फ उठा रहा था. चाहे वो ऊपर नीचे होती हुई चूचियां हों, चाहे चिकनी बुर हो या फिर मटकती हुई गांड़.

वॉक होने के बाद मैं जमीन पर पड़ी हुई अपनी पैंटी उठाने के लिए जैसे ही झुकी, उसको टांगों के बीच का नज़ारा पीछे से देखने का मौका सुलभ हो गया.

उसी पल उसने अपना हाथ वहां रखकर कहा- इसको तुम्हारी पैंटी की नहीं इसकी ज़रूरत है.
उसका दूसरा हाथ उसके लंड पर था.

मैंने शर्म के मारे मुँह दूसरी ओर घुमा लिया.
मेरी चड्डी को मैं हाथ में पकड़े हुए थी.

उसने मुझको अपने हाथ में उठा लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को किस करते हुए बेड तक आ गए.
मुझे तो इस बात का होश ही नहीं रह गया था कि जो पैंटी मैं हाथ में पकड़े हुए थी, उसे पहनना भी था.

उसने मुझे बेड पर पटका और मेरी दोनों टांगें खोल दीं.
मेरा हाथ अपने आप ही टांगों के बीच पहुंच गया और अपनी उस नाम मात्र की पैंटी से मैंने उसे छुपाने की कोशिश की जो बेकार ही साबित हुई.

जल्द ही उसे मुझसे छीनकर अलग कर दिया गया.
अब मैं पूर्णतया नंगी टांगें खोले उस बेड पर पड़ी थी और मेरे अंग प्रत्यंग का बारीकी से मुआयना किया जा रहा था.

ऐसा तो कभी मैं अकेले कमरे में भी नहीं लेटी थी, जैसा उसने मुझे कर रखा था.
उसकी उंगलियां मेरी बुर का जायजा ले रही थीं और मैंने शर्म से मुँह दूसरी ओर घुमा रखा था.

लेटे लेटे उसने अपना मुँह मेरे निप्पल पर रखा और उसे चूसने लगा.
मेरा अपने ऊपर से नियंत्रण खोने लगा था.
धीरे-धीरे उसकी एक उंगली मेरी बुर में प्रवेश कर गई और मेरी सांसें तेज़ होने लगीं.

मैंने उसे मना किया कि वहां उंगली मत डालो!
उसने कहा- तो फिर क्या लौड़ा डालूँ?

ये सुनकर तो मेरी बोलती ही बंद हो गई.
तो आज क्या ये भी होने वाला है, ऐसा तो सोचा ही नहीं था.

हमने तो सिर्फ फैशन परेड प्लान किया था. यहां तो पहले नग्न परेड करवा दी गई और अब बढ़ते बढ़ते बात बुर के उद्घाटन तक पहुंच गई है.

उसने कहा- वैसे आयी तो तू पूरी तैयारी से है.
मैंने कहा- कैसी तैयारी?

उसने कहा- चुदने की और किसकी? इतनी सज-धज के, पूरी चिकनी होके, बुर को भी चिकना करके.
मैं मन ही मन सोच रही थी कि मरवा दिया इस प्रिया ने!

अब तो ये मेरी बुर चोद कर ही दम लेगा.
तब तक उसने उंगली की जगह अपना लंड रख दिया था. अब मेरी बुर पर लंड घिसा जा रहा था और ना चाहते हुए भी मेरी सिसकारियां निकल रही थीं.

वो मेरी टांगों के बीच आ गया और धीरे-धीरे उसके लंड का दबाव बढ़ता जा रहा था पर शायद बुर एकदम टाइट होने की वजह से वो अन्दर जा नहीं पा रहा था.
मेरे ऊपर ही लेट कर वो मुझे किस करने लगा और अचानक एक तेज़ झटका लगा.

मेरी तो चीख ही निकल गई होती अगर उसके होंठ मेरे होंठों को बंद ना किए होते … और शायद आवाज मेरे घर तक भी पहुंच जाती.

अभी तक जो लंड मेरी बुर के बाहर रगड़ खा रहा था, वो अब बुर के अन्दर धमाल मचाने की तैयारी में था.
काफी देर तक चले इस कार्यक्रम में मुझे पूरी तरह से निचोड़ लिया गया था.

मुझे कुछ होश नहीं था कि मेरा कितनी बार हुआ, बस लगातार मज़ा आ रहा था.
उसका होने के बाद वो तो बेड पर निढाल पड़ गया, पर मुझे काफी देर तक मज़ा आता रहा.

सब होने के बाद मैं वहां से उठी और कपड़े पहनने लगी पर पैंटी वहां मिली ही नहीं.
उसने कहा- कल ले लेना.
आमतौर पर मैं 12 बजे से पहले ही वापस ऊपर अपने घर चली जाती थी. लोग अक्सर सो चुके होते थे. पर आज तो 1:30 बज गया था.

पहली चुदाई के बाद न्यूड गर्ल बिना चड्डी पहने ही थोड़ा लड़खड़ाती हुई मैं वापस पहुंची.
सब सो चुके थे.

अगले दिन मेरी चुदायी का पूरा किस्सा प्रिया ने पूरे चटखारे लेकर सुना.
राहुल से आंख मिलने की हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी.

अब इस रात को तो शर्म के मारे, पढ़ने जाने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी. पर तभी याद आया कि पैंटी वापस लेनी है तो जाना तो पड़ेगा ही.
तो चल पड़े अनायास ही कदम उस ओर … तभी याद आया कि उसको हाथ में वापस लेकर तो आएंगे नहीं, इसलिए वैसे ही जाना पड़ेगा, जैसे कल वापस आए थे यानि बिना चड्डी के.

वापस कमरे में गई, चड्डी उतारी और केवल स्कर्ट में ही चल दी उस ओर.
वहां पहुंचते ही नज़रें झुकाए दोनों हाथ से किताब पकड़े खड़ी हो गई थी.

मैंने उसकी तरफ हाथ बढ़ा कर कहा- पैंटी?
उसने कहा- पहने तो हो.

मेरे मुँह से निकल गया- नहीं पहनी है.
उसकी आंखों में तो चमक आ गई.

उसने कहा- दिखाओ.
मैं वैसे ही खड़ी रही.

उसने कहा- नहीं पहन कर आयी होगी, तभी मिलेगी.
अब क्या करूं सोच कर कि आगे से उठा कर तो नहीं दिखा सकती.

मैं पीछे घूमी और पीछे से स्कर्ट उठा दी.
उसने चूतड़ों को प्यार से सहलाया और कसके एक चमाट लगा दी. दोनों को बारी बारी से लाल किया गया और कुतिया बना कर स्कर्ट ऊपर कर दी गई.

पैंटी तो थी नहीं, नंगे चूतड़ पेश ऐ खिदमत थे.
जिनकी एक बार फिर से भरपूर सेवा की गयी.

आज की रात एक बार फिर से कुछ अलग एंगल में मेरी फटी चूत की जबरदस्त खिदमत की गई और मैं अपनी पैंटी लेकर वापस लौट गयी.

उम्मीद है आपको ये पहली चुदाई न्यूड गर्ल कहानी भी पिछली कहानी की तरह पसंद आयी होगी.
कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं.

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