गर्म चूत की चुदाई का चस्का- 5

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डबल पेनेट्रेशन सेक्स कहानी में पढ़ें कि पति ने अपनी बीवी की चूत में अपने दोस्त का लंड घुसवा दिया. लेकिन पति ने भी साथ में अपना लंड उसी चूत में घुसाना चाहा तो …

कहानी के पिछले भाग

में आपने पढ़ा कि पति अपनी बीवी की चूत अपने दोस्त से चुदवा चुका था. बीवी को भी मजा आया और उसने पति की गैरमौजूदगी में भि पति के दोस्त से चूत मरवा ली.

अब आगे डबल पेनेट्रेशन सेक्स कहानी:

रवि ने उसकी फ्रॉक ऊपर उठाकर उसकी पेंटी के अंदर हाथ डालना चाहा तो पिंकी घबराकर बोली- रवि, बस इससे ज्यादा नहीं, कोई आ जाएगा।
कहने को तो उसने कह दिया और वो और ज़ोर से चिपट गयी रवि से!

रवि उसे गोदी में उठाकर बेडरूम में ले गया और वहाँ दोनों के कपड़े प्याज़ के छिलकों की तरह उतर गए।
दोनों 69 हो गए।

पिंकी रवि के लंड को निचोड़ देना चाहती थी अपने मुंह में!
रवि ने पिंकी को घोड़ी बनाकर उसकी चूत में पीछे से लंड पेला और हाथ बढ़ाकर उसके मम्मे मसलने शुरू किए।

पिंकी ने भी गर्दन घुमाकर अपनी जीभ से रवि की जीभ को चूमा।

थोड़ी धकापेल के बाद चूंकि समय कम था तो विजय ने पिंकी को सीधा लिटाकर पेल दिया अपना मूसल रेशमी चूत में।
पिंकी ने रवि के फोन के बाद ही अपनी चूत को चिकना किया था।
उसे मालूम था कि जब दोनों अकेले होंगे तो आग तो भड़केगी ही।

आज रवि भी अपनी झांटें चमकाकर आया था। उसने कसमसाकर पिंकी से कहा कि वो रोज रात को उसका ख्याल कर मूठ मारता है।

रवि के धक्के जोरदार लग रहे थे। रवि बार-बार पिंकी के मांसल मम्मों को अपने मुंह में लेने की कोशिश कर रहा था।
पर आज सेक्स में वो गर्मी नहीं थी, जो उस रात थी।

असल में पिंकी और रवि दोनों के मन में ही किसी के आने का डर था.
चुदाई जब डर के माहौल में होती है तो काम तमाम जल्दी ही हो जाता है।
रवि का जल्दी ही हो गया।

दोनों ने साथ साथ शावर लिया।

उसके बाद पिंकी ने उसे जल्दी वापिस जाने को कहा।
फटाफट चूमचाटी की फ़ार्मैलिटी करके पिंकी ने रवि को भेजा।

थोड़ी देर बाद में फोन करके पिंकी ने रवि को साफ बोला कि अब कभी भी वो इस तरह विजय के पीछे नहीं आए।
पिंकी का मन उसे गलत कह रहा था।

रात भर पिंकी और रवि की फोन पर बातें होती रहीं।

असल में विजय को शक न हो, इसलिए रवि ने एक फोन और एक नया सिम काफी पहले पिंकी को दे दिया था।
तो जब भी उन्हें लंबी बातें करनी होती थीं, वो नए नंबर पर ही करते, उसी से मेसेज भेजते, ताकि कभी पकड़ न हो।

अगले दिन विजय सीधा ऑफिस चला गया था।

रात को विजय ने पिंकी से बहुत पूछा कि वो उदास क्यों है?
पर पिंकी बोली- सिर में दर्द है।

विजय ने उसे छेड़ते हुए कहा- रवि से कोई झगड़ा तो नहीं हो गया?
तो पिंकी बोली- मेरी कोई बात नहीं होती उससे।

अगले दिन रवि के फोन आने पर पिंकी ने फोन नहीं उठाया।

दो-तीन दिन ऐसे ही निकल गए।

रवि ने विजय को अपने फ्लेट पर ड्रिंक्स के लिए बुलाया और वहाँ वो भावनात्मक होने कि नौटंकी करते हुए विजय से बोला- यार, उस दिन भाभी बुरा मान गयी हैं। मैंने बहुत बुरा किया।
विजय बोला- नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं।

रवि बोला- उस दिन जब मैं आम देने घर गया था तो भी उन्होंने ठीक से बात नहीं की।
विजय बोला- नहीं यार, हम तीनों ने ही उस दिन एंजॉय किया। मुझे तो उस दिन तुझसे चुसवा कर बहुत मजा आया। मैं तो चाहता हूँ कि अबकी बार हम तीनों साथ साथ नहाएँ फिर मस्ती करें।
और विजय चुदाई के खुमार में रवि को अगले दिन आने को न्यौत भी आया।
घर आकर चुदाई के दौरान विजय ने पिंकी को बताया कि कल रवि आएगा।

पिंकी भी अब नॉर्मल हो चुकी थी और इस समय चुदासी हो रही थी।
उसने विजय से कहा- कल की कल देखेंगे, अभी तो तुम मेरी खुजली मिटाओ।

विजय ने स्पीड बढ़ते हुए कहा- कल फिर मस्ती करेंगे।
पिंकी ने पहले तो ना-नुकुर की, फिर चुदाई के नशे में हाँ कह दी।

विजय ने निबटने के बाद उससे कहा- कल हम तीनों साथ नहायेंगे, फिर मस्ती करेंगे।
पिंकी बोली- मैं नहीं नहाने वाली तुम दोनों के साथ। तुम दोनों साथ नहाना, एक-दूसरे की गांड मारना।

अगले दिन विजय के ऑफिस जाने के बाद रवि का फोन आया पिंकी के पास!
पिंकी ने उठा लिया।

रवि ने उसे सॉरी बोलते हुए कहा कि अगर वो हाँ कहेगी तभी वो उसे घर आएगा।
पिंकी ने झूठमूठ की नाराजगी दिखते हुए कहा- रवि को तो विजय ने बुलाया है, घर विजय का है, तो रवि को आने से कौन रोकेगा।

रवि ने फिर खुशामद की और कहा- मैं तो तब ही आऊँगा जब तुम बुलाओगी।
खूब मान मुनव्वल और घंटों फोन पर बात के बाद पिंकी मुस्कुरा दी और उसने फोन पर रवि को डीप किस दी और कहा कि शाम को वो उसका इंतज़ार करेगी।

रात को आठ बजे करीब विजय और रवि साथ साथ आए।
लगता था कि रवि विजय के ऑफिस से उसके साथ ही आया था क्योंकि उसका ब्रीफकेस उसके साथ था।

रवि ने आते ही पिंकी से कहा- मैंने विजय से बहुत कहा कि घर होकर नहाकर आता हूँ. तो विजय ने कहा कि यहीं नहा लेना वो कपड़े दे देगा।
पिंकी ने शरारत से मुसकुराते हुए कहा- हाँ ठीक ही तो है, तुम दोनों साथ नहा लो, एक दूसरे को रगड़ भी लेना।

तीनों ने बीयर पी.

विजय रवि से बोला- चेंज कर ले। नहाना है तो नहा ले, मैं तो नहाऊँगा।

रवि ने संकोच दिखते हुए कहा- चल तेरे बेडरूम में चलते हैं, पहले तुम नहा लेना फिर मैं नहाऊँगा।
पिंकी उन्हें देख कर मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी।

विजय ने बेडरूम में जाकर रवि से कहा- चल साथ नहायेंगे।
उसने पिंकी को आवाज दी और कहा- आ जाओ … चलो सब साथ नहायेंगे।

पिंकी ने वहीं से जवाब दिया- मेरे पर मेहरबानी करो, तुम दोनों ही नहा लो।

तो दोनों कपड़े उतारकर नंगधड़ंग बाथ रूम में घुस गए।
शावर के नीचे खड़े रवि का लंड तो पिंकी की चूत के ख्यालों में खोया था, वो सोच रहा था कि काश वो भी नहाने आ जाती तो क्या मजा होता।
उसे मालूम था कि विजय ठरकी है, अगर उसे चढ़ गयी कि पिंकी को बाथरूम में बुलाना है तो वो बुलाकर ही मानेगा।

रवि ने धीरे से विजय का लंड पकड़ कर सहलाना शुरु किया और नीचे बैठकर रवि ने विजय का लंड मुंह में ले लिया।
विजय का तो तन गया इतनी देर में!

अब रवि ने उससे कहा- यार भाभी को भी बुला ले तो जानें तुझे!
विजय ने पिंकी को आवाज देकर बुलाया।

पिंकी आई और नखरे दिखती हुई बोली- अब क्या हो गया?
विजय बोला- दो मिनट के लिए आ जाओ और हमारी पीठ पर साबुन लगा दो।
पिंकी बोली- क्यों … तुम दोनों एक दूसरे के ही लगा लो न!

पर विजय पीछे पड़ गया और बाथरूम में अंधेरा करके पिंकी को अंदर बुला ही लिया।

पिंकी ने भी ‘जो होगा देखा जाएगा’ सोचकर अंदर आकर अंधेरे में ही जो सामने आया उसकी पीठ पर साबुन लगाना शुरू कर दिया।

विजय ने खुराफात दिखाई और पिंकी के हाथ में रवि का लंड पकड़ा दिया।

अब रवि और विजय के बीच में पिंकी थी और दोनों ने उसका दबाकर सेंडविच बना दिया।
रवि ने शावर खोल दिया।

पिंकी चीखती रह गयी पर दोनों ने उसे नहीं छोड़ा और पूरा भिगो दिया।

बस फिर क्या होना था … विजय ने पिंकी की फ्रॉक उतार फेंकी।
ब्रा रवि ने खोल दी तो पेंटी पिंकी ने खुद उतार दी।

अब तीनों चिपट गए।
नीचे धधकते जिस्म, फनफनते लंड, आग लगाती प्यासी चूत, ऊपर से टप टप करता पानी!

रवि और पिंकी के तो होंठ ऐसे भिड़े जैसे फैविकोल का जोड़।
पीछे से पिंकी की गांड की दरार में जगह बनाता विजय का लंड।

विजय पिंकी की पीठ को चूम चाट कर उसे उकसा रहा था।
रवि ने अपनी एक उंगली पिंकी की चूत में घुसा रखी थी।

विजय नीचे बैठ गया और पिंकी की टांग उठाकर बाथटब की दीवार पर रख दी और जीभ घुसा दी उसकी चूत में!

रवि उसके मम्मों पर पिला पड़ा था।
शावर की तेज धार उनकी कामाग्नि को और भड़का रही थी।

विजय ने पिंकी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत में लंड पेल दिया।
पिंकी के आगे रवि खड़ा हो गया और उसने अपने लंड उसके मुंह में दे दिया।

तीनों वासना की आग में जल रहे दे। ऊपर से गिरते पानी ने आग और भड़का रखी थी।

पिंकी बार बार फिसल रही थी तो उसे मजा नहीं आ रहा था।
उसने कहा- छोड़ो मुझे!
कहकर वो खड़ी हो गई और बोली- चलो बेड पर!
अब वो भी बेशर्म हो गयी थी, बोली- जब चुदाई हो ही रही है तो मज़ा पूरा आना चाहिए।

बदन पौंछ कर तीनों बेडरूम में पहुंचे।
फिल्मी स्टाइल में पिंकी नीचे बैठ गयी और दोनों के लंड बारी बारी से चूसने लगी।

रवि का लंड तनतना रहा था उसकी चूत के लिए।
उसने पिंकी को खड़ा किया और उसके होंठ से होंठ भिड़ा कर अपनी जीभ से उसकी जीभ को टकराने लगा।

वो दोनों भूल ही गए कि विजय भी खड़ा है।
पिंकी रवि से कस कर चिपट गयी थी और अपने लंबे नाखूनों से रवि की पीठ खरोंचे दे रही थी।

रवि भी अपने हाथों से उसके चेहरे को और नजदीक और नजदीक लाने की कोशिश कर रहा था।

पिंकी ने उसको चूमते हुए अचानक रवि के कान पर चूमते हुए उसे अपनी जीभ से चाटने लगी।

रवि के लिए ये नया अनुभव था।
वो बेचैन हो उठा।

पिंकी ने अपने दांतों से उसके कान को पकड़ लिया और फिर अपनी जीभ कान के अंदर कर के उसकी आग और भड़का दी।
रवि ने जैसे तैसे उससे अपने को छुड़ाया और सीधे उसके मम्मे अपने मुंह में ले लिए और अबकी बार उन्हें लगभग दबोच लिया।
बीच बीच में वो दांतों से उनको हल्के से काट भी लेता।

अब पिंकी की चूत भी बगावत कर गयी।
पिंकी ने रवि और विजय का हाथ पकड़ा और उन्हें लेकर बेड पर चढ़ गयी।

बेड पर लेटते ही पिंकी ने विजय का सिर तो अपनी चूत की ओर किया तो विजय ने उसकी टांगें चौड़ा कर अपनी जीभ घुसा दी उसकी चूत में!

रवि पिंकी के सिर की ओर आ गया और अपना लंड उसके मुंह में कर के हाथों से उसके मम्मे दबाने लगा।
विजय ने जल्दी ही पिंकी को बेहाल कर दिया।

पिंकी अब नीचे से निकालने को छटपटाने लगी।
उसने रवि को नीचे लेटने को कहा और उसके सिर की ओर मुंह करके चढ़ गयी उसके ऊपर अपने हाथ से रवि का लंड अपनी चूत में सेट कर लिया और धीरे धीरे उसके लंड के ऊपर चक्की की तरह घूमते हुए चुदाई करवाने लगी।

विजय उसके पीछे बैठ गया और पीछे से उससे चिपट गया, पिंकी के मम्मे उसने दबोच रखे थे।
पिंकी भी गर्दन घुमा-घुमाकर उसे चूम रही थी।

अब पिंकी धीरे धीरे अपनी उछलने की स्पीड बढ़ा रही थी तो विजय ने उसे खुला छोड़ दिया।
उधर रवि ने नीचे से धक्के बढ़ा दिये।

अब पिंकी और रवि दोनों ही हाँफ-हाँफ कर चुदाई करने लगे।

पिंकी रवि के ऊपर से हटी तो विजय ने उसे नीचे लिटा कर उसकी टांगें चौड़ा दी और पेल दिया अपना लंड उसकी चूत में!

विजय की स्पीड भरपूर थी … उसने रवि के लिए कोई मौका न छोड़ते हुए, पिंकी के मम्मे भी दबोच रखे थे।
आज विजय की भाषा भी गंदी हो चली थी, वो कह रहा था- रवि आज दोनों मिल कर इसकी चूत का भोसड़ा बनाएँगे। मैंने इसकी कभी गांड नहीं मारी है, आज इसकी चूत और गांड एक साथ बजाएँगे।

उधर पिंकी भी बोली- देखती हूँ तुम दोनों को, देखना दोनों का खा जाऊँगी! अब जरा स्पीड बढ़ा कर चोदो मेरे राजा!

“रवि, तू क्या खड़ा खड़ा मूठ मार रहा है? तू भी घुस जा कहीं न कहीं!”
विजय की यह बात सुन कर रवि को भी तैश आ गया, उसने पास रखी वेसलीन लगा कर विजय की गांड में लंड पेल दिया।

क्या मजेदार सीन था।
पिंकी की चूत में विजय का लंड घुसा था और विजय की गांड में रवि का लंड गांड मारी कर रहा था।

विजय की जान निकल रही थी क्योंकि रवि का मूसल काफी मोटा था।
उसने हथियार डालते हुए कहा- रवि तू नीचे लेट!
रवि नीचे लेट गया।

अब विजय ने पिंकी से कहा- तू रवि के ऊपर उल्टी बैठ और अपनी चूत में रवि का लंड घुसा ले।

पिंकी समझी नहीं कि विजय क्या चाह रहा है.
पर फिर भी वो झटपट रवि के ऊपर उल्टी होकर बैठ गयी और अपनी टांगें चौड़ा कर रवि का लंड अंदर ले लिया।

अब विजय सामने से आया और उसने पिंकी की टांगें थोड़ी ऊपर की और चौड़ा कर अपना लंड रवि के लंड के बगल में पिंकी की चूत के मुंहाने पर रख दिया।
डबल पेनेट्रेशन का सोच कर पिंकी चीखी- दोनों एक साथ नहीं, मैं मर जाऊँगी।

पर उसकी सुनता कौन?

विजय ने धीरे धीरे अपना लंड घुसा दिया।

पिंकी को दर्द तो हुआ पर उस जैसी चुदक्कड़ के लिए ये नया अनुभव था।
अब तीनों ही इस अनोखी चुदाई का मजा लेने लगे।

थोड़ी देर की धकापेल के बाद रवि का लावा फूट गया और उसका माल पिंकी की चूत से बाहर आने लगा।
रवि ने पिंकी को छोड़ दिया।

पिंकी रवि के ऊपर से हटी तो विजय ने उसके मम्मों पर अपने हाथ से ही अपना लंड खाली कर दिया और साथ ही ये कह दिया- रात को बाकी कसर निकाल दूँगा।

अब तीनों के बीच शर्म-लिहाज जैसे कोई चीज़ नहीं रह गयी थी।
अगले छह महीने तक जब तक रवि की शादी नहीं हो गयी, हफ्ते में दो बार दोनों मिलकर पिंकी का बाजा जरूर बजाते।

विजय जब भी कभी शहर से बाहर होता तो उस दिन रवि और पिंकी की चुदाई मदमस्त होती।
सच है कि कामवासना अच्छे-अच्छे को बेवफा कर देती है।

हालांकि विजय की तरफ से कोई मनाही, कोई रोक टोक नहीं थी; फिर भी उसकी गैरमौजूदगी या गैरजानकारी में चुदाई करवाने में पिंकी को अलग ही मज़ा आता।
वो जितना चुदती, उसकी कामवासना उतनी ही और बढ़ जाती।

और उसे उकसाने में विजय की सोच जिम्मेदार थी।
उसे किसी गैर मर्द से अपनी बीवी को चुदवाने में बहुत मज़ा आता था।

अब तो ऐसा होता कि तीनों की चुदाई के बाद रात को विजय और पिंकी की फिर एक बार पहली चुदाई को याद कर करके घमासान चुदाई होती।

पिंकी हमेशा विजय की प्यारी बनी रही क्योंकि उसने बिस्तर पर कभी भी विजय को शिकायत का मौका नहीं दिया।

रवि ने शादी से पहले ही इन दोनों से ये वादा कर लिया था कि इस खेल में जल्दी ही वो अपनी नयी नवेली बीवी को भी शामिल कर लेगा।

दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी डबल पेनेट्रेशन सेक्स कहानी?

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