कमसिन कुंवारी लड़की की बुर का मजा- 4

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18 साल की लड़की की सेक्सी बुर का मजा मैंने लिया. वो लड़की एकदम अनछुई कोरी कंवारी थी. उसकी बुर मेरे लंड से कैसे फटी, पढ़ कर आप भी मजा लें.

साथियो, मैं विभोर देव अपनी सेक्स कहानी में आपका स्वागत करता हूँ.
कहानी के तीसरे भाग

में अब तक आपने पढ़ा था कि मैंने गुनगुन की कुंवारी चूत में लंड पेल कर उसकी सील फाड़ दी थी और लंड पेले हुए उसके ऊपर चढ़ा था.

अब आगे 18 साल की लड़की की सेक्सी बुर:

गुनगुन अपनी में मेरा लंड फंसाए बेबस सी लेटी थी.

मेरे मन में उसके लिए प्यार उमड़ने लगा था.

उसने तो अपना कर्ज अपनी कुंवारी चूत देकर चुकता कर दिया था, पर मुझे अब फील होने लगा था कि मैंने कुछ ज्यादा ही वसूल लिया था.
बहरहाल अब जो हुआ सो हुआ, मैंने अपना ध्यान इन बातों से हटा कर चुदाई पर केन्द्रित कर दिया और लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

“गुनगुन, अब कैसा लग रहा है, दर्द तो नहीं है न अब?” मैंने पुचकारते हुए उसका गाल चूम कर पूछा.

“साबजी, निर्दयी हो आप … मुझ पर जरा भी दया नहीं की और बेदर्दी से कुचल कर रख दिया मुझे.”
उसकी आवाज में दर्द और बेबसी साफ साफ झलक रही थी.

“आई एम सॉरी डियर, देखो, जब चूत की सील लंड से टूटती है तो दर्द हर लड़की को होता ही है. अब मैंने कोई जानबूझ कर तुझे कोई तकलीफ तो नहीं दी न!” मैंने समझाया.

“छी कैसे कैसे गंदे शब्द निकल रहे हैं आपके मुँह से?” उसने उलाहना दिया.

“अरे बेबी, मेरी जान … तुम अभी अभी लड़की से औरत बनी हो, चुदाई का पूरा मज़ा तो अभी तुम्हें मिला ही नहीं. अभी तो तुम्हारी चूत में लंड घुसाई की रस्म ही पूरी हुई है. लंड का असल आनन्द तो मैं तेरे को बाद में दूंगा. फिर तू खुद भी यही गंदे गंदे बोल अपने इस प्यारे मुख से निकाल उछल उछल कर मेरा लंड अपनी इसी चूत में लीलेगी न … तब बोलना ये सब!” मैंने उसे चूमते हुए कहा.

मेरी बात सुन गुनगुन चुप रह गयी.
शायद उसने बहस से बचना चाहा होगा.

मैं उसे धीरे धीरे फर्स्ट गियर में बड़े आराम से बड़ी एहतियात से चोदता रहा ताकि उसे ज्यादा दर्द न हो और उसकी चूत कुछ रमा हो जाए तो फिर आगे स्पीड से चुदाई करूं.

गुनगुन की बॉडी लैंग्वेज से मुझे लग रहा था कि उसे चुदना अच्छा तो लग रहा है पर चूत का दर्द उसे मजे नहीं लेने दे रहा.
सो मैंने यूं ही आराम से करते करते झड़ जाने का सोचा और आंख मूंद कर उसे यहां वहां सब जगह चूम चूम कर चोदता रहा.

कुछ ही देर बाद गुनगुन का बदन जोर से थरथरा उठा- आह साब जी … जोर से पकड़ लो मुझे … आह मुझे कुछ हो रहा है.
वो कसमसा कर बोली और मुझसे कसके लिपट गयी.

मैं समझ गया कि उसने स्खलन का पहला मज़ा ले लिया है.
फिर मैं भी धीरे धीरे चोदते हुए उसकी चूत में ही झड़ गया.

मैंने उसकी चूत में झड़ते हुए आंखें मूंद लीं और उसकी चूत के कसाव का वो अलौकिक आनन्द अनुभव लेने लगा.

मेरे झड़ते ही जैसे उसकी चूत ने अपनी भी रियेक्ट किया और वो लंड को रह रह कर भींचने लगी.

जब उसकी चूत के स्पंदन शिथिल पड़े तो मैंने लंड को चूत में से खींच लिया.

18 साल की लड़की की सेक्सी बुर मंथन से रक्त रज वीर्य का मिश्रण बह निकला जो मेरी लुंगी में समाता चला गया.
झड़ने के बाद मैं उसे सहारा देकर वाशरूम ले गया और उसे बिठा कर गीजर के गुनगुने पानी से उसकी चूत अच्छे से धो दी.

काफी देर तक गर्म पानी से उसकी चूत की सिकाई करता रहा.
अब वो आराम महसूस करने लगी थी.

कमरे में लौट कर वो बेड पर लेट गयी और उसने अपने नंगे बदन पर चादर ओढ़ ली.

मैंने टाइम देखा तो दस बजने वाले थे.
मतलब गुनगुन सुबह सुबह आठ के पहले ही आ गयी थी और इन दो घंटों में इतना सब घट चुका था.

फिर अचानक मुझे इसकी मां रती की याद आई, जो राशन लेने दुकान पर गयी थी.

मैंने रती को फोन लगाया.
वो बोली- हां साबजी!
मैंने पूछा- राशन ले लिया?
वो बोली- अरे साब जी, राशन की दुकान अभी कुछ ही देर पहले खुली है और भीड़ भी बहुत है. मैं लाइन में लगी हूं. देर हो जाएगी.

“चलो कोई बात नहीं, आराम से आ जाना, आज मैं भी ऑफिस नहीं जा रहा. गुनगुन को मैंने किचन और अलमारी साफ करने को बोला है.”
रती बोली- ठीक है साबजी, आप अपना काम अच्छे से करवा लो. मैं घर लौट कर आपको फोन कर दूंगी.

इसके बाद मैंने गुनगुन को दर्द की टेबलेट खिला दी और साथ ही में वो गर्भ निरोधक गोली भी खिला दी क्योंकि कुंवारी लड़की के साथ किसी भी तरह का रिस्क लेना बहुत बड़ी परेशानी पैदा कर सकता था.

फिर मैं उसे बता कर बाहर नाश्ता लेने चला गया और पास के चौराहे से गर्म गर्म समोसे, जलेबी और ताजा दही लेकर आया.

इसी बीच गुनगुन ने कपड़े पहन लिए थे और बिस्तर पर उदास सी लेटी थी.

मैं उसके तन और मन के दर्द को अच्छे से समझ रहा था.
उसे नार्मल होने में टाइम तो लगना ही था तो वो सब समय पर छोड़ कर उसे आग्रह पूर्वक अपने हाथों से नाश्ता करा दिया.

मैंने बड़ी मीठी आवाज में पूछा- अब कैसा फील हो रहा है मेरी जान को?
“साबजी, रहने दो ये चिकनी चुपड़ी बातें, बस ठीक ही हूं. आपने अपना कर्ज वसूल लिया न मेरे कुंवारे तन से … बस अब मेरी फ़िक्र मत करो.” वो आहत स्वर में दुखी सी होकर बोली.

“अच्छा एक मिनट रुक.” मैं बोला और उसके सामने ही अपने फोन से उसके वो चोरी वाले दोनों वीडियो पूरी तरह से डिलीट कर दिए और उसे अपने सीने से लगा कर प्यार मुहब्बत भरी बातें करने लगा.

धीरे धीरे गुनगुन का मूड भी नार्मल होता जा रहा था और वो मेरी बातों का जवाब कभी हंस कर मुस्कुरा कर, कभी गुस्से से देख कर देने लगी थी.
कुल मिला कर सारे गिले शिकवे दूर हो चुके थे.

अब मैंने चुदाई का सेकेण्ड राउंड खेलने की नियत से उसे छेड़ना चूमना शुरू कर दिया.
“नहीं साबजी, अब आज और नहीं!” वो मुझे दूर हटाती हुई बोली.

“यार, अभी मेरा मन नहीं भरा तुझे जी भर के तरह तरह से प्यार करना चाहता हूं.” मैंने बड़े अपनत्व से कहा.
“ये कहिये न कि तरह तरह से वो सब करना चाहते हो, मैं जानती हूं.” इस बार वो कुछ विनोद पूर्वक बोली.

“हां डार्लिंग, यही समझ लो.”
वो बोली- तो आज तो बिल्कुल नहीं, फिर कभी देखूंगी.

मैंने कहा- चल कोई नहीं, जाने से पहले एक बात बता कर जा!
“जी साबजी?”

मैंने उत्सुकतावश पूछा- तू मेरे वॉलेट से पैसे निकालती थी तो उन पैसों का करती क्या थी?

वो दुखी सी होकर बोली- साब जी, जाने दो न उन बातों को, अब कभी कोई ऐसा गलत काम नहीं करना मेरे को, इतनी बड़ी सजा भुगत ली … बस बहुत है.

“गुनगुन बता न, पता तो चले कि तेरी ऐसी क्या मजबूरी थी, जो तुझे चोरी करनी पड़ती थी. तेरी मम्मी ये सब करवाती थी तुझसे?”
“नहीं साबजी, मम्मी को तो कुछ भी नहीं पता, आप भी उनसे कभी मत कहना नहीं तो वो मुझे मार ही डालेगी.”

“अरे तो फिर ऐसी कौन सी आफत आन पड़ी थी, जो तुझे चोरी करना पड़ रही थी?” मैंने कुछ जोर देकर पूछा.

“साबजी, मेरी सहेलियों का ग्रुप है. हम लोग हर सन्डे को पार्टी करते हैं, कभी इडली डोसा, बर्गर, चाउमीन वगैरह. पैसे खर्च करने का नंबर सबका बारी बारी से आता था.”
वो इतना बोल कर चुप हो गयी.

“ठीक है मैं समझ गया, आगे से तुझे जितने पैसे चाहिये हों, मेरे पर्स में से ले लिया कर.” मैंने उसका गाल चूम कर कहा.

वो बोली- नहीं साब जी, मैंने तो अपनी फ्रेंड्स से मना कर दिया कि अब मुझे पार्टी ज्वाइन नहीं करनी.

इन बातों के कुछ देर बाद रती का फोन आ गया कि वो घर पहुंच गयी है.

मैं गुनगुन को बाइक पर बिठा कर उसके घर के पास गली के मोड़ तक छोड़ कर आया.
वो मुझे बाय बोलकर अपने घर की ओर चल दी.

मैंने पीछे से देखा कि उसकी चाल में वो पहले वाली बात नहीं थी.
लोग सच ही कहते हैं कि एक बार की चुदाई में ही लड़की के चलने फिरने का अंदाज बदल जाता है.

उस दिन के बाद से मैं याद करूं तो चार पांच दिनों तक गुनगुन के दर्शन ही नहीं हुए.

मैं रोज प्रतीक्षा करता कि आज तो रती नहीं गुनगुन ही काम करने आएगी.
पर मायूसी ही हाथ लगती.

क्योंकि गुनगुन के करारे बदन के साथ खुल कर खेलना तो अभी शेष था.

पहली बार की चुदाई तो एक रस्म अदाएगी किस्म की होकर रह गयी थी. मेरे दिल के बाकी अरमान, उसे हचक कर चोदना जैसी मेरी हसरतें निकलना तो अभी बाकी ही थीं.

एक दिन की बात, मुझे अच्छे से याद है उस दिन गुड फ्राइडे की छुट्टी थी.
सुबह लंड देव पूर्ण जाग्रत अवस्था में थे, सो मैं यूं ही अलसाया उनीन्दा सा लेटा हुआ लंड सहला रहा था कि डोर बेल बज उठी.

टाइम देखा तो साढ़े सात होने को थे.
अब इतनी सुबह कौन हो सकता है, यही सोच कर मैंने लुंगी को डबल तह करके कमर में लपेट लिया कि चड्डी में बना हुआ टेंट न दिखे.

दरवाजा खोला तो सामने गुनगुन खड़ी थी.
उसे देख तबियत खुश हो गयी.

“नमस्ते साबजी.” वो अन्दर आते हुए बोली.

मैंने उसकी नमस्ते का जवाब दिया और दरवाजा भीतर से लॉक कर दिया.

“पूरे एक हफ्ते बाद आई हो!”
मैंने शिकायत भरे स्वर में कहा.

“क्या करती साब जी जब मम्मी भेजेगी तभी तो आ सकती हूं.” वो झाडू उठाती हुई बोली.

“अरे झाड़ू छोड़, पहले जरूरी काम कर लेते हैं.”
मैंने कहा और उसे कस कर बांहों में भर लिया और दोनों गाल चूम लिए.

वो स्नान करके आई थी सो उसके बालों से उठती शैम्पू की मस्त भीनी भीनी सुगंध बहुत ही मस्त अहसास दे रही थी.

वो बोली- नहीं साब जी, मुझे काम कर लेने दो. मम्मी ने कहा था काम करके जल्दी लौट कर आना. घर में कोई नहीं है.

मैंने खुश होकर पूछा- क्यों, तेरी मम्मी कहां गयी?
वो बोली- साब जी, वो अपने मायके गांव गयी है, पास में ही है. उनके भाई की लड़की की शादी के लिए आज लड़के वाले देखने आ रहे हैं. मम्मी शाम तक लौट आएगी.

“वाओ, फिर क्या ख़तरा है. अब तो सारा दिन अपना है. आज सारे अरमान पूरे हो जाएंगे.”
मैं ख़ुशी से बोला और गुनगुन को बांहों में उठा कर एक चक्कर लगा दिया और बेड पर धकेल दिया.

“साबजी, कैसे हो आप? अभी सुबह के आठ भी नहीं बजे हैं और आपको वो सब करने की पड़ी है. जाइए मुझे अपना काम करने दीजिए और आप अच्छे से नहा कर आइए; रात की दारू की बास अभी तक आपके मुँह से आ रही है.”
वो बोली और अपने काम में लग गयी.

मैं खिसियाना सा वाशरूम में घुस गया और अच्छे से ब्रश करके फिर माउथवाश करके डिटॉल बॉडीवाश से नहाकर और रेडी होकर बाहर निकला.

गुनगुन साफ सफाई का काम कर चुकने के बाद हाथ धोकर नैपकिन से ड्राई करती हुई नाश्ते का पूछने आई.

“अरे यार वो सब बाद में देखेंगे, पहले एक राउंड खेल लेते हैं न!”
मैंने ललचाई निगाहों से उसके मम्मों की चोटियों को घूरते हुए कहा.

लेकिन वो एक न मानी और ब्रेकफास्ट के बाद का बोली.

मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उससे लिपट चूमा चाटी करने लगा.
वो बार बार शरमा कर अपना मुँह दाएं बाएं करती मुझे रोकती.
पर धीरे धीरे उसका वो विरोध भी खत्म हो गया.

इसी छेड़छाड़ के चलते हम दोनों के कपड़े कब उतर कर फर्श पर जा गिरे, इसका हमें कोई होश ही नहीं रहा.

अब गुनगुन का नंगा बदन उसकी नंगी जवानी मेरे नंगे बदन के आगोश में थी.
हमारे होंठ एक दूसरे को चूस रहे थे, काट रहे थे. हमारी जीभें आपस में अठखेलियां करती हुई चुदास को और भड़का रही थीं.

उसके करारे से उरोज मेरी मुट्ठियों में कैद थे और मैं उन्हें मसलने गूंदने में लगा था.

ऐसे फोरप्ले से गुनगुन की रही सही लाज शर्म भी छूट गयी.
उसने मेरा लंड पकड़ लिया और मुठियाने लगी.

उसके हाथ से लंड छुड़ा कर मैं बैठ गया और उसके पेट को चूमता, उसकी नाभि में जीभ से चाटता नीचे की ओर बढ़ चला.
मैंने गुनगुन के पैर ऊपर की ओर करके फैला दिए.

“वाओ, कितनी सुन्दर चूत है.” मेरे मुँह से बरबस ही निकल गया.
उस दिन गुनगुन अपनी चूत की झांटें शेव करके चुदने आई थी.

उसकी गुलाबी होंठों वाली कचौरी जैसी फूली चूत को देख कर मैंने उसे चाटना शुरू कर दिया. उसकी चूत का चीरा भी काफी बड़ा नीचे तक दिख रहा था.

मैंने उसकी चूत के बाहरी गोरे गोरे होंठ खोले और रसभरी चूत में अपनी जीभ रख कर नमकीन रस का पान करने लगा.

“साबजी आआह आह्ह मत करो ऐसे, य्य्यम्म्म्म … मत सताओ … अब अपना वो घुसा दो बस, जो आग लगा दी है उसे बुझा दो जल्दी से.”
वो अपनी बहती चूत को उठा कर बोली.

“गुनगुन मेरी जान … क्या घुसवाना है, कहां घुसवाना है … ये तो बता दो पहले?”
मैंने कहा और उसकी चूत के दाने को बेसब्री से चाटने लगा.

दाना चाटने से कौन कामिनी खुद पर काबू रख सकती है. फिर गुनगुन तो ताजा ताजा जवान हुई पहली पहली बार लंड का मज़ा ले चुकी थी, सो उसकी जवानी अब चुदने के लिए ज्यादा जोर मार रही थी.

“मत सताओ साहब, जो उस दिन मेरी इसमें घुसा कर मेरा कुंवारापन लूट लिया था आपने … बस वही अब फिर से घुसा कर मुझे यूं तड़पने से बचा लो.” वो मुझसे चिपटती हुई बोली.

“गुनगन, मेरी जान ..जरा खुल कर बोलो न क्या घुसवाना है … किसमें घुसवाना है तेरे को?”
“आपका वो लं लं … लंड सरजी आप अपना लंड मेरी चूत में डाल दीजिए बस.” वो लाज शर्म त्याग कर बोल ही उठी.

“हां हां जरूर डालूंगा मेरी जान, अब तो तू ही इस लंड की मालकिन है. बस एक बार इसमें तेल लगा कर अच्छे से मालिश कर दे इसकी. फिर देखना ये कैसे तेरी चूत में सटासट सटासट अन्दर बाहर होकर तुझे चुदाई का रियल मज़ा देता है.”
मैंने कहा और पास की मेज से तेल की शीशी उसे पकड़ा दी.

गुनगुन ने खूब सारा तेल अपनी हथेली में लेकर मेरे लंड पर चुपड़ दिया और फिर एक दो मिनट तक लौड़े की मालिश कर दी.
मेरा लंड खूब अच्छी तरह से चिकना होकर ट्यूबलाइट की रोशनी में दमकने लगा.

फिर मैंने गुनगुन से अपनी चूत पसारने को कहा तो उसने झट से अपने दोनों हाथ अपनी चूत पर रखे और चूत को खूब अच्छे से खोल दिया.
मैंने लंड को उसकी चूत के छेद से मिलाया और उसके दोनों दूध कस कर दबोच कर लंड को पूरी ताकत से उसकी चूत में भौंक दिया.

तेल से सराबोर मेरा चिकना लंड बिना किसी बाधा के तीर की तरह उसकी चूत में फच्च से घुसता चला गया.
मेरी नुकीली सी झांटें उसकी चिकनी चूत के कोमल होंठों से जा मिलीं.

“आह आह मम्मी …मर गई …साबजी ने मार डाला रे … ” गुनगुन के मुँह से दर्द भरी कराह निकली और उसने बेड की चादर अपनी मुट्ठियों में ऐसे पकड़ ली, जैसे अब उसी का सहारा था.

दोस्तो, उम्मीद है कि 18 साल की लड़की की सेक्सी बुर की कहानी में आपके लंड चूत अकड़कर चुदाई की गुहार लगाने लगे होंगे.
पर पहले मुझे मेल कर दो ताकि आगे की सेक्स कहानी में रस का भरपूर मजा आ सके.

18 साल की लड़की की सेक्सी बुर की कहानी का अगला भाग:

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