सहेली के बॉयफ्रेंड को अपना चोदू यार बना लिया- 2

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जंगल में सेक्स की कहानी में पढ़ें कि एक दिन मेरा बॉयफ्रेंड मुझे जंगल की ओर ले गया. उसने बीच सड़क पर गाड़ी में मेरी चूत मारी. फिर गाड़ी जंगल में खराब हो गयी.

दोस्तो, मैं सोनम एक बार फिर से अन्तर्वासना पर अपनी जंगल में सेक्स की कहानी लेकर आई हूं.
मेरी चुदाई की कहानी के पहले भाग

में आपको मैंने बताया था कि कैसे अपनी सहेली का दोस्त रमेश मुझे पसंद आ गया और हम दोनों में प्यार हो गया.

धीरे धीरे हम दोनों बाहर मिलने लगे. फिर वो मुझे रूम पर ले गया और मसाज के बहाने मेरी चूत चोद दी.

फिर एक दिन वो मुझे बाहर घुमाने ले गया. कार में हम दोनों ने मस्ती की.

एक भिखारी को उसने चलती कार में मेरे चूचे दिखवाये और मेरी चूत और गांड भी दिखाई.
फिर मैं उसके लंड को चूसने लगी और वो कार को आगे लाकर अपना लंड चुसवाता रहा. फिर उसने अपनी पैंट निकाल दी.

अब आगे जंगल में सेक्स की कहानी:

यह कहानी सुनें.

रमेश ने अपनी पैंट निकाल दी और वो भी नीचे से नंगा हो गया. ऊपर उसने टीशर्ट को पहने रखा. फिर वो कार को थोड़ा और नीचे ले गया. वहां पर काफी गहराई थी और रोड से देखने पर गाड़ी की छत ही दिख सकती थी.

उसने मुझे आगे वाली सीट पर घोड़ी बना लिया और मेरी चूत में लंड को रगड़ने लगा. मेरी चूत काफी देर से पानी छोड़कर लंड की प्यासी हो गयी थी. उसने मेरी चूत में लंड डाला और मुझे वहीं गाड़ी में चोदने लगा.

मुझे भी चुदते हुए मजा आने लगा. गाड़ी हल्की हल्की हिल भी रही थी और उसकी जांघों मेरे चूतड़ों पर आकर लग रही थीं.

गाड़ी में जोर जोर से पट पट की आवाज आ रही थी.
इस आवाज से रमेश के लंड से चुदने का अहसास और भी ज्यादा तेज हो जाता था.

मैं भी पूरी मस्त होती जा रही थी.

अब उसके धक्के काफी तेज हो गये थे और उसने मेरे मुंह में हाथ फंसा लिया और जोर से चोदने लगा.

मेरा सिर गाड़ी के शीशे से टकराने लगा. मुझे बहुत मजा आने लगा.

फिर अचानक से पुलिस की गाड़ी जैसा सायरन बजा और हम दोनों घबरा गये. फिर हम जल्दी से अलग हुए और हड़बड़ाहट में कपड़े पहन लिये।

हमने गाड़ी को वहां से बाहर निकाला और फिर रोड पर आ गये. हम सीधे चलने लगे लेकिन रोड पर कोई पुलिस नहीं थी.

फिर हम थोड़ी देर चले ही थे कि गाड़ी गर्म हो गयी. रमेश ने बाहर जाकर देखा तो गाड़ी के इंजन में पानी की कमी हो गयी थी.

अब हम जंगल के बीच में फंस गये थे. हम दोनों जंगल की ओर गये कि कहीं पानी मिल जाये. मगर उसी वक्त बारिश शुरू हो गयी. हम दौड़कर एक झोपड़ी की ओर भागे क्योंकि हम गाड़ी से काफी दूर आ गये थे.

वहां पर हमने देखा कि एक बाबा घूम रहे थे. वो बारिश में अपना सामान अंदर उठाकर रख रहे थे.
रमेश ने मेरे कान में कहा- इससे चुदवाओगी?

मैंने देखा कि बाबा की धोती भीग चुकी थी. उनका लंड उनकी भीगी धोती में अलग ले लटका हुआ दिख रहा था.

मैंने कुछ देर पहले ही रमेश के लंड को चूसा था और चूत में डलवाया था.

मेरी चुदास रमेश का लंड लेकर और ज्यादा बढ़ गयी थी. मुझे अपनी चूत की प्यास को शांत करना था.

बाबा का लंड देखकर मुझे चुदने का मन कर रहा था. चूत की चुदास अभी अंदर ही भड़क रही थी.

बीच जंगल में बाबा का लंड देखकर मेरे अंदर भी रोमांच आने लगा और मैंने बाबा से चुदाई करवाने के लिए हां कर दी.
वो बोला- ठीक है, मैं बाबा से पानी लेकर गाड़ी में डालने जाऊंगा. तब तक तुम बाबा को अपनी चूचियां दिखाकर गर्म कर देना.

मैंने वैसा ही किया.
हम बाबा के पास गये. रमेश ने बाबा से पानी मांगा और कहा कि हमारी गाड़ी खराब हो गयी है, मैं गाड़ी में पानी डालने जा रहा हूं. हमारी गाड़ी रोड से दस मिनट पैदल की दूरी पर खड़ी थी.

उसके बाद रमेश चला गया और मैंने बाबा से कहा- मेरी लैगी खराब हो गयी है, आप थोडा़ सा पानी डालकर इसको भी धुलवा दो.
बाबा ने कहा- ठीक है, मैं पानी लाता हूं.

फिर वो पानी लेकर आये और मैं नीचे झुककर अपनी लैगी धोने लगी.
मेरी चूचियां बाबा के सामने थीं और मैं जानबूझकर ऐसे झुकी थी कि बाबा को मेरी चूचियां हिलती दिख जायें.

मैं जोर जोर से चूची हिलाते हुए लैगी धो रही थी. मेरी गांड भी मैंने उठा रखी थी.
मैंने देखा कि धीरे धीरे बाबा का लंड आकार लेने लगा था. मैंने दो मिनट बाद नजर उठाकर देखा तो बाबा का लंड उनकी धोती को उठा चुका था.

नीचे ही नीचे मैं मुस्कराने लगी. फिर मैं दूसरी तरफ घूम गयी. बाबा वैसे ही खड़े रहे.

मैं धोने का नाटक करती रही और मैंने धीरे धीरे बाबा के लंड की ओर अपनी गांड पास में कर दी.

मेरी गांड और बाबा के लंड अब दोनों एक दूसरे से सटने वाले थे. मैंने फिर थोड़ा और सरक कर बाबा के लंड पर अपनी गांड सटा दी.

अब बाबा से भी रुका न गया और उन्होंने मेरी गांड पर लंड को सटा दिया.
मैंने कुछ नहीं कहा.

जब उनको लगा कि मैं कुछ नहीं बोल रही हूं तो उन्होंने और थोड़ा आगे आकर मेरी गांड पर लंड रगड़ना शुरू कर दिया.
मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा.

अब बाबा लंड को धीरे धीरे धकेलने लगे थे और मैंने फिर एकदम से पीछे हाथ ले जाकर बाबा की कमर को पकड़ा और अपनी गांड पर उनके बदन को सटा लिया.

अब बाबा ने लोटा नीचे फेंका और मेरे ऊपर झुक कर अपने लंड को मेरी गांड में घुसाने लगे.

उनके हाथ मेरी चूचियों पर आ गये और वो मेरे ऊपर झुककर मेरी चूचियों मसलने लगे.
मैं भी यही चाहती थी.

वो मेरी गांड में कपड़ों के ऊपर से धक्के लगाने लगे.

अब बाबा से रुका नहीं गया तो उन्होंने मेरी लैगी खींच दी. मैंने अपनी पैंटी निकाल दी और बाबा ने धोती उठाकर अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया.

अगले ही पल बाबा ने अपने लंड को पकड़ा और मेरी चूत पर सटाकर एक धक्का देते हुए मेरे ऊपर झुक गये.

उनका लंड मेरी चूत में घुस गया और मेरी चूत चौड़ी फटकर फैल गयी.
बाबा का मोटा लंड मेरी चूत में था और उन्होंने मेरी चूचियों से मुझे पकड़ लिया और वहीं पर कुतिया बनाकर चोदने लगे.
तेजी से मेरी चूत में बाबा ने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

मुझे मजा आने लगा.
जंगल में ऐसी बारिश में खुली चुदाई करवाकर मुझे अलग ही मजा आ रहा था.

मेरे मुंह से जोर जोर की सिसकारें निकलने लगीं- आह्ह … आह्ह … आह्ह … बाबा … ओह्ह … आह्ह … ऊहह … आह्ह।

बाबा की जांघें मेरी गांड पर टकरा कर पट पट की आवाज कर रही थीं. बाबा मुझे कुत्ते की तरह चोदने में लगे हुए थे.

फिर उन्होंने मुझे खड़ी कर लिया और मुझे अपनी तरफ घुमाया.

मैंने बाबा के लंड को पकड़ लिया और वो मेरे होंठों को चूसने लगे.
मैं भी बाबा के होंठों को चूसने लगी.
उनकी बड़ी बड़ी दाढ़ी-मूछ थी लेकिन उनके होंठ चूसने में बहुत मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने मेरी कुर्ती को उतरवा दिया और मेरी ब्रा को भी निकलवा दिया.
वो मेरी चूचियों पर टूट पड़े और उनको जोर जोर से दबाते हुए मेरी चूचियों के निप्पलों को पीने लगे.

मैं भी बाबा की पीठ को सहलाने लगी.

बाबा ने फिर अपनी धोती खोल दी और वो पूरे नंगे हो गये. अब वो मुझे अंदर ले गये और झोपड़ी की दीवार के साथ मुझे सटा दिया.

फिर मेरी टांग उठा ली और मुझे दीवार से लगाकर चोदने लगे.
मैं भी उनकी बांहों में लिपट गयी और उनसे खड़ी खड़ी चुदने लगी.

बाबा के लंड में बहुत दम था. वो बहुत जोर से धक्के दे रहे थे.

कुछ देर चोदने के बाद बाबा पीछे हट गये और मुझे उनके गद्दे पर चलने को कहा. नीचे उनका गद्दा बिछा हुआ था और वो उस पर जाकर लेट गये.

मैं उनके पास गयी तो उन्होंने मेरे सिर को अपने लंड पर झुका दिया. मैं बाबा का लंड चूसने लगी.
वो स्स … आह्ह … स्स्स … आह्ह करके मेरे मुंह को लंड पर धकेलने लगे.

बाबा पूरा लंड गले तक घुसा रहे थे. मैंने पांच मिनट तक बाबा का लंड चूसा मगर वो अभी भी नहीं झड़े.

फिर बाबा ने मुझे लंड पर बैठने को कहा और मैं उनके लंड पर बैठ गयी.
मैंने चूत में बाबा का लंड ले लिया और वो मेरी गांड पकड़ कर मुझे अपने लंड पर ऊपर नीचे करने लगे.

बाबा का लंड 7 इंच का था जो मेरी चूत में अंदर मेरे पेट तक जाकर ठोक रहा था.
मैं चुदते हुए अब तक दो बार झड़ चुकी थी.

फिर बाबा ने मुझे नीचे पटका और मेरी टांगों को चौड़ी करवा कर मेरी चूत में लंड पेल दिया.

वो मेरी टांगों को अपनी कमर पर लिपटवाकर मेरे ऊपर लेट गये और मेरे होंठों को चूसते ही मेरी चूत में लंड को पेलने लगे.
मैंने भी बाबा की पीठ को सहलाना शुरू कर दिया और चुदाई में मदहोश हो गयी.

बाबा का लंड मेरी चूत की बखिया उधेड़ रहा था और मैं इस दर्द भरी चुदाई का पूरा मजा ले रही थी.
रमेश के लंड से बाबा का लंड कहीं ज्यादा मजा दे रहा था.

मुझे लग रहा था कि बाबा को काफी समय से चूत नहीं मिली है. वो रुक ही नहीं रहे थे. बस हवस में पागल होकर मेरी चूत को चोदे जा रहे थे.

आधे घंटे तक बाबा ने मेरी चूत को चोद चोदकर उसकी चटनी बना दी.
मेरी चूत का हाल बेहाल हो गया. पूरी चूत में जलन होने लगी थी.

फिर उनके धक्के और ज्यादा तेज हो गये. मैं अब दर्द में रोने लगी. मगर बाबा मेरी चूत को फाड़ने पर तुले हुए थे.

फिर पांच मिनट के बाद बाबा ने बेरहमी से चोदने के बाद मेरी चूत में ही अपना पानी निकाल दिया.
मेरी चूत के चिथड़े उड़ गये थे. मैं बदहवास होकर पड़ी हुई थी और बाबा भी बुरी तरह से हांफ रहे थे.

अब बारिश भी रुक गयी और बाहर सब कुछ शांत हो गया.
मैंने बाबा का लंड चाटकर साफ कर दिया.
बाबा बोले- बाहर जाकर देख, कोई है तो नहीं पास में?

मैं गांड मटकाते हुए बाहर गयी और देखने लगी.
बाहर कोई नहीं था.

फिर मैं वापस आकर अपने कपड़े पहनने लगी.
बाबा बोले- इतनी क्या जल्दी है … आजा एक बार मेरी जांघों पर!

बाबा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी गोद में अपनी जांघों पर बिठा लिया. बाबा मुझे बांहों में लेकर मेरे होंठों को चूसने लगे. मैं भी बाबा के होंठों को चूसने लगी.

कुछ देर बाद बाबा का लंड मुझे तनाव में आता हुआ महसूस हुआ.
देखते ही देखते बाबा का लंड मेरी गांड पर नीचे ही नीचे टकराने लगा.
बाबा का लंड एक बार फिर से चुदाई के लिये तैयार हो गया था.

उन्होंने मुझे उठने को कहा. मैं उठी और बाबा ने लंड को हाथ में लेकर ऊपर की ओर कर लिया; मुझे उनके लंड पर बैठने को कहा.
मैं धीरे से बाबा के लंड पर बैठ गयी और उनका लंड एक बार फिर से मेरी चूत में उतर गया.

लंड को चूत में लेकर मैं उछलने लगी. बाबा का लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर होने लगा. बाबा ने मेरे चूचों को मुंह में भर लिया और चूसने लगे. अब मुझे दोगुना मजा आने लगा.

वो मेरी चूचियों को पीते रहे और मैं लंड पर कूदती रही.

15 मिनट की चुदाई के बाद अबकी बार हम दोनों साथ में झड़ गये. मेरी चूत पूरी बाबा के वीर्य से भर गयी.

उसके बाद मैंने फिर से बाबा के लंड को चाटकर साफ कर दिया.
वो खुश हो गये और बोले- मेरे एक गुरूजी हैं, उनका लंड मेरे लंड से भी ज्यादा बड़ा है. बोलो, कब सेवा दोगी?

मैं बोली- बहुत जल्दी … शायद अगले हफ्ते!
वो बोले- ठीक है, तो फिर दो दो लंड से चुदने के लिए तैयार रहना.
मैंने कहा- ठीक है बाबा … बहुत मजा आयेगा.

फिर मैंने अपने कपड़े पहने और बाबा ने भी अपनी धोती बांध ली.

मैंने बाहर देखा तो रमेश थोड़ी दूर से आता हुई दिखाई दे रहा था.
वो झोपड़ी में आया और उसने बाबा का बर्तन वापस कर दिया.

उसके बाद हमने बाबा को धन्यवाद कहा और हम झोपड़ी से बाहर आकर कार की ओर जाने लगे.
मैंने पूछा- तुम अभी लौटे हो?
वो बोला- नहीं, मैं तो यहीं बाहर से छुपकर तुम्हारी जोरदार चुदाई देख रहा था.

मैंने उसके लंड को पकड़ कर उसकी गोटियों को भींच दिया और वो सॉरी बोलने लगा.
फिर मैंने उसकी गोटियां छोड़ दीं और उसने मुझे किस कर लिया.

फिर हम वापस अपनी कार में आ गये और जाने लगे.
रमेश बोला- तो फिर दो दो लंड से कब चुदोगी अब?
मैंने कहा- अगले हफ्ते.

वो बोला- लगता है बाबा का लंड बहुत पसंद आ गया तुम्हें?
मैंने कहा- दिलाया भी तो तुमने ही है.
ये बोलकर मैंने रमेश को बांहों में भर लिया और उसके लंड को सहलाते हुए उसके गालों पर चूमने लगी.

तो दोस्तो, ये थी मेरी चुदाई की कहानी.
आपको मेरी जंगल में सेक्स की कहानी कैसी लगी मुझे आप लोग जरूर अपने मैसेज में बताना. मुझे आप लोगों के फीडबैक का इंतजार है।
मेरा ईमेल आईडी है

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