सहेली के घर गर्लफ्रेंड की सील तोड़ी

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हॉट GF चुदाई कहानी मेरे दोस्त की बहन के साथ दोस्ती और पहली चुदाई की है. मैं दोस्त के घर जाता था तो उसकी बहन मुझे देखती थी. एक दिन उसने मुझे प्रोपोज किया.

अन्तर्वासना साइट से जुड़े मेरे सभी दोस्तों को नमस्कार.
मैंने अन्तर्वासना पर कई सारी कहानियां पढ़ी हैं.

मैं कोई लेखक तो नहीं हूँ, पर जीवन से जुड़े कुछ किस्से ऐसे होते हैं, जो बातें किसी अन्य व्यक्ति से साझा नहीं किए जा सकते.
वो मैं अपनी कहानी के माध्यम से आप लोगों के साथ साझा कर रहा हूं.

मैं आज अपने साथ हुई जिस बात को आप सभी के सामने रखने जा रहा हूं, वो बिल्कुल सत्य घटना है.

ये हॉट GF चुदाई कहानी तब की है, जब मैं बारहवीं कक्षा में था. मेरी 19 साल की उम्र थी.
आज मेरी उम्र आज 28 साल है. मेरी हाईट 6 फीट है और मेरी बॉडी साधारण है.

मेरा नाम अश्विन (काल्पनिक) है. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूं.

मैं उत्तर प्रदेश के शहर से हूं, जो दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं है.
मैं जिम वगैरह नहीं करता हूँ. मेरा वजन 72 किलो है. इससे आपको अंदाजा हो जाएगा मैं कैसा दिखता होऊंगा.

मेरी कहानी की नायिका का नाम प्रिया (काल्पनिक) है.
थोड़ा सा उसके बारे में बता दूँ.

वो बेहद गोरी थी, उसका क्यूट सा चेहरा, बच्चों जैसी मासूमियत, बहुत प्यारी दिखती थी.
उसका फिगर 34-30-36 का था. उसके पीछे आस-पास के बहुत लड़के लगे थे. शायद उसको उनमें कोई पसंद ही नहीं आया.

मैं 12 वीं क्लास में होने के कारण एक जगह ट्यूशन पढ़ने जाता था.

वहां मेरी एक लड़के से दोस्ती हो गई थी.
उसके घर में 4 सदस्य थे. बहन भाई और उसके मम्मी पापा.

हम दोनों साथ में ही ट्यूशन आते जाते थे.
उसका घर पहले आता था. हम वहीं गेट पर खड़े होकर कुछ देर बात करते, फिर मैं अपने घर चला जाता.

हमारा रोज का यही रूटीन था.
उसकी बड़ी बहन अक्सर हम दोनों को बातें करते देखती थी.

धीरे धीरे मेरा उसकी फैमिली से मिलना जुलना ज्यादा हो गया.
ज्यादातर उसकी मम्मी से और बहन से ही मेरी मुलाक़ात होती थी.

उसके पापा तो उस समय घर पर होते नहीं थे तो उनसे कम ही मिलना होता था.
सब ठीक चल रहा था.

धीरे धीरे उसकी बहन मुझसे बात करने के बहाने उसी टाइम आ जाती, जब हम साथ में खड़े होते.
प्रिया जब भी मेरे सामने आती, उसके चेहरे पर अलग ही चमक होती.

फिर उसका मुझसे हंसी मजाक भी शुरू हो गया.

मेरे दोस्त के पास फोन नहीं था. उनके घर में एक कॉमन मोबाइल फोन था. उसने मुझे वही नंबर दे रखा था ताकि जब भी कोई पढ़ाई संबंधी बात करनी हुई, तो उससे मेरी बात हो जाए.

मैं जब भी फोन करता, उसकी बहन ही फोन उठाती थी.
हाय हैलो के बाद वो अपने भाई को फोन देती थी.

फिर वो मुझे शायरी मैसेज करने लगी.

मुझे लगा कि ये मेरा दोस्त कर रहा है; मैं भी फ्री टाइम में ऐसे ही मैसेज भेजने लगा.
अब ये काम रोज का हो गया.

फिर प्रिया कुछ रोमांटिक मैसेज करने लगी.
अब मुझे समझते देर न लगी कि ये मैसेज कौन कर रहा है.

धीरे धीरे मेरी उसकी बहन से मैसेज से बात होने लगी.
वो मुझे पसंद करने लगी थी.

हालांकि मेरे मन में उसके लिए कोई गलत भावना कभी नहीं आई थी, बस सब नॉर्मल ही लेकर मैं उससे बात करता रहा.
अब शायरी और चुटकुले से आगे बढ़ कर हमारी मैसेज से बातें भी शुरू हो गईं.

मैंने अपनी दोस्ती के लिए उससे दूरी बनानी चाही, पर वो बोली- दोस्त तो मैं भी हूं. मेरी दोस्ती पसंद नहीं क्या? तुम मुझसे अलग क्यों होना चाहते हो?
तो मैंने भी सोचा कि बात ही तो कर रहे हैं और तो कुछ नहीं.

अब वो मुझे लवर वाली डबल मीनिंग बात करने लगी.
समय बीतता गया.
वो भी अब मुझे अच्छी लगने लगी.

जब मैंने अपनी ओर से पहल नहीं की तो दस महीने बाद उसने मुझे प्रपोज कर दिया.
मैंने भी हां कर दी क्योंकि मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी.

हम दोनों रात रात भर बातें करने लगे. पूरे दिन लगे रहने लगे कभी मैसेज में तो कभी कॉल पर.

जल्द ही हम दोनों में इतना प्यार हो गया कि एक दूसरे की थोड़ी भी तकलीफ दूसरे को सहन नहीं होती थी.

प्यार में डूबे जब काफी समय बीत गया तो हमने मिलने का प्लान बनाया.

वो जैसे ही आई, मैंने अपनी बांहें फैला दीं और वो आगे बढ़ कर मेरी बांहों में कैद हो गई.

मैं उसके लिए गिफ्ट भी लेकर गया था, मैंने उसको वो दिया.
फिर हमने थोड़ी बातें की और जाते वक्त हमारी एक छोटी सी किस हुई.

मुलाकात के बाद हम दोनों अपने अपने घर आ गए.

एक रात हम चैट कर रहे थे.
उसका भाई पढ़ाई में लगा था.

उसके भाई ने उससे कहा- दी, मेरे लिए चाय बना दो.
वो मुझे वेट करने का बोल कर चाय बनाने चली गई.

उसके भाई के मन में न जाने क्या आया, उसने फोन उठा कर चैक कर लिया.

उसने हम दोनों की पूरी चैट देख ली और गुस्से में जाकर अपनी मम्मी को बता दिया कि ये अश्विन के साथ बातें करती है. उसने उनको सब मैसेज भी दिखा दिए.

दोनों ने गुस्से में आकर उसको बहुत मारा और जब उसकी फैमिली को हम दोनों का पता चल ही गया तो प्रिया के भाई ने मुझसे दोस्ती भी खत्म कर ली.

मैंने समझाने की बहुत कोशिश की, पर वो नहीं समझा.
खैर, जो हो गया तो हो गया, क्या कर सकते थे.

समय बीतता गया.
उसके घर का माहौल हल्का होता गया.

हमारी बातें अब और भी ज्यादा होने लगी थी. हमारा प्यार भी अधिक गहरा होता गया.
अब वो मैसेज नहीं करती थी सीधे बात करने लगी थी.

परिवार के डर की वजह से हम दोनों 3 साल तक नहीं मिल पाए.
मैं बराबर प्रिया से मिलने की कहता रहा.

फिर प्रिया ने हिम्मत करके मुझे मिलने को हां कर दी.

हम सही मौके और जगह की तलाश करने लगे.
एक दिन वो बोली- मेरी एक फ्रेंड है, हम दोनों उसके घर मिलेंगे.

दिन भी तय हो गया.
वो दिन भी ज्यादा दूर नहीं था, पर हम दोनों को बरसों का इंतजार जैसा लगा.

फिर वो दिन भी आ गया जब मैंने अपनी जान से प्यारी गर्लफ्रेंड की चूत की सील तोड़ी.

प्रिया की सहेली के घर उस दिन कोई नहीं था, उसके मम्मी पापा बाहर गए हुए थे.
छोटा भाई था, वो भी स्कूल गया हुआ था.

मैं ठीक 10 बजे (हमारा यही समय तय हुआ था) उसकी सहेली के घर के पास पहुंच गया.
कुछ मिनट बाद उसका फोन आया.

वो अन्दर आने को बोली और उसने कहा कि गेट खुले हैं, सीधे अन्दर आकर गेट बंद कर देना.

मैं जब वहां पहुंचा तो मैं उसको देख कर दंग ही रह गया.
उसने डीप गले का रेड कलर का सूट पहना हुआ था, जिसमें से उसके चूचों का क्लीवेज मुझे साफ दिख रहा था.
शायद मिलने की बेचैनी में वो दुपट्टा रूम में ही छोड़ आई.

हमने खुद पर कंट्रोल किया क्योंकि उसकी सहेली भी वहीं मौजूद थी.
हम तीनों ड्राइंग रूम में जाकर बैठ गए और बातें करने लगे.

मैं प्रिया को और प्रिया मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रही थी.
हमें मिले हुए 3 साल हो गए.

उसकी सहेली पानी लेने चली गई.
उसके जाते ही मैंने प्रिया के सूट के ऊपर से हाथ रख दिया और अगले ही पल अन्दर हाथ डालकर अपनी उंगलियां बूब्स पर चलाने लगा.

मैंने उसको बोला- ये हमें अकेला कब छोड़ेगी?
प्रिया की सांसें तेज तेज चल रही थीं. वो बोली- देखती हूं, कुछ करती हूं.

उसके आने की आहट पर हम अलग हुए.
हमें पानी देकर वो कुछ खाने पीने का सामान लेने जाने लगी.

प्रिया उसको मना करने के बहाने से उसके पीछे गई और बाहर जाकर उसको बोली- यार, हमें कुछ देर अकेले में मिलना है.
वो बोली- ठीक है. ऐसा करो ऊपर मेरा बेडरूम है. तुम दोनों उसी में चले जाओ और आराम से बातें करो. घर में कोई आ भी गया, तो नीचे ही मैं उसको देख लूंगी. तुम दोनों को डिस्टर्ब नहीं होगा.

प्रिया उसको थैंक्स बोल कर मेरे पास आकर बोली- चलो ऊपर रूम में चलते हैं. यहां कोई भी आ सकता है.

हम बेडरूम में आते ही दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपक गए, जैसे सांप चन्दन के पेड़ से लिपटा होता है.
दोनों एक दूसरे में खोए हुए थे. दोनों की धड़कनें तेज रफ्तार पर चल रही थीं.

करीब 20-25 मिनट तक हम चिपके रहे.

फिर मैंने उसका चेहरा हाथों में लेकर उसकी आंखों में देखा, वो बहुत प्यारी लग रही थी.
हमने कुछ देर तक इधर उधर की बात की, लेकिन आग दोनों तरफ बराबर लगी थी.

मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा. एक हाथ उसके बालों में डाल कर उसको करीब लिया और हमारे होंठ आपस में टकराने लगे.
दिल की धड़कन तेज हो गईं.

दो मिनट ऐसे ही करते रहने के बाद हमारे होंठ मिल गए और हम पागलों की तरह किस करने लगे.

हम दोनों एक दूसरे के होंठ को खाने लगे. मेरा एक हाथ उसके चूचों पर चला गया जिसे मैं जोर से दबाता और वो और जोश में आ जाती.

ऐसे ही किस करते हुए उसकी जीभ को कभी मैं चूसता तो कभी वो मेरी जीभ को चूसती.
ऐसे ही कुछ मिनट तक होंठों का रसपान चलता रहा.

फिर मैंने उसके उसके पूरे चेहरे पर गले पर कान पर हर जगह किस किया.
वो सहम सी गई.

अब हम दोनों अलग हुए.
मैंने उसके कुर्ते को निकाल कर अलग कर दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स चूसने लगा.

वो मेरे बालों में हाथ घुमाने लगी.
मैंने धीरे से उसकी सिलेक्स को खोल कर नीचे कर दिया.
वो मेरी टी-शर्ट उतार कर इधर उधर चूमने लगी.

जल्द ही उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, बस अंडरवियर बाकी रह गया.

फिर मैंने उसको बेड पर लेटाकर उसकी पूरी बॉडी को चूसा, मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसकी पूरी बॉडी पर शहद लगा हो.

होंठों पर किस करते हुए गले पर चूचों पर पेट पर नाभि पर किस किया.

फिर मैंने उसको पलट कर उसकी गर्दन से लेकर कमर को मस्ती से चूसा.
धीरे धीरे चूमते हुए मैं उसकी गांड पर आ गया.

मैंने उसके दोनों चूतड़ों पर किस की और पैरों पर आ गया, उसके पूरे पैर चूसे.

अब मैंने उसको सीधा किया और उसके चूचे दबाते हुए किस करने लगा.

फिर वो मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी. मेरे हाथ उसकी कमर पर चलने लगे.
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोलना चाहा, पर वो अटक गया.

वो सीधी हुई और हंसती हुई बोली- मेरे बुद्धू आशिक को ब्रा भी खोलनी नहीं आती.
उसने खुद से ब्रा उतार दी और मेरा मुँह अपनी एक चूची पर लगा दिया.

मैंने उसको बहुत कस कस कर चूसा और दूसरी को जोर से दबाता रहा.
उसकी आहें निकलने लगीं.

काफी देर उसकी दोनों चूची चूस कर मैंने उसे लेटा दिया और उसकी पैंटी नीचे करते ही मुझे उसकी गुलाबी चूत के दर्शन हुए, जो बहुत गीली हो चुकी थी.

मैं एक उंगली चूत में घुसा दी और उसे किस करता रहा.

फिर दो उंगलियां घुसा दीं.
उसको दर्द हुआ, पर वो सह गई.

फिर मैंने उसकी चूत को चूसा.
वो सीत्कार के साथ तड़पने लगी और बालों में हाथ चलाने लगी.

उसने अचानक से मुझे नीचे किया और ऊपर आकर मेरा अंडरवियर नीचे कर दिया.
वो मेरी आंखों पर हाथ रख कर उस पर किस करके मुझे चूमने लगी.

अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, मैंने उसे पीठ के बल लेटाया और टांगें खोल कर बीच में आ गया.
अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा और लंड को पकड़ कर चूत पर मारने लगा.

वो और ज्यादा गर्म होकर सीत्कार करने लगी.
प्रिया बोली- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा … कुछ जल्दी से करो.

मैंने अपनी जींस की जेब से कंडोम निकाला और लंड पर चढ़ा लिया.
वो लंड को ललचाई नजरों से देखने लगी.

मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और एक धक्का दे मारा.
थोड़ा सा ही कि वो रोने लगी.

मैंने उसको किस करना शुरू किया. वो जैसे ही शांत हुई, मैंने एक और धक्का दे मारा.
वो उछल पड़ी- हाय … मर गई.

मैं एक मिनट रुका रहा, फिर धक्का मारना शुरू किया तो उसको भी मजा आने लगा.
वो भी सिसकारती हुई चुदाई का मजा लेने लगी.

मेरा लंड अन्दर बाहर होने लगा.
हम दोनों ही चुदाई में ऐसे खो गए कि ये भी याद ना रहा कि हम किसी और के घर पर हैं.
दोनों को ही जन्नत का मजा आ रहा था.

कुछ 15 मिनट की चुदाई में वो एक बार झड़ चुकी थी.
हम दोनों ही पसीने में भीग चुके थे.

फिर मेरा भी होने वाला था तो मैंने कंडोम में ही वीर्य भर दिया.

हॉट GF चुदाई के बाद उसके चेहरे पर संतुष्टि दिख रही थी और मुझे स्माइल करके उसने फिर से किस की.
कुछ देर आराम करके हमने रूमाल से लंड चूत को साफ़ किया. फिर कपड़े पहने और नीचे आ गए.

उसकी सहेली ने मुझे एक बुक दी और बोली- अगर कोई बाहर निकलते हुए देख ले, तो कह देना बुक लेने आया था.

फिर हम अपने अपने घर चले गए.
उसके बाद हमारे बीच कई बार चुदाई हुई.

आपको ये सेक्स कहानी अच्छी लगी हो तो मैं आगे और भी लिखूंगा.

तो ये थी मेरी पहली चुदाई की कहानी, आशा है आपको यह हॉट GF चुदाई कहानी पसंद आई होगी.
कृपया मुझे अपनी राय जरूर भेजें.
धन्यवाद.

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