लॉकडाउन में पड़ोसन टीचर को चोदा- 1

Antarvasna Hindi Sex Stories

स्कूल टीचर सेक्स कहानी मेरे पड़ोस में रहने वाली एक अविवाहित अध्यापिका की है. लॉकडाउन में हम घरों में जैसे कैद हो गये थे. तो समय बिताने के लिए मैंने उससे बात शुरू की.

मित्रो, मैं आपका दोस्त रोहित श्रीवास्तव हूँ.

मेरी पिछली सेक्स कहानी

पर मुझे आप सबके काफ़ी मैसेज मिले.
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद कि आपको मेरी स्टोरी काफ़ी पसंद आई.

आज मैं आपके सामने अपनी एक नयी स्कूल टीचर सेक्स कहानी लेकर हाजिर हुआ हूँ.

मैंने अपने पड़ोस में रहने वाली एक लेडी टीचर और उनकी सहेलियों को लॉकडाउन में कैसे चोदा था, वो मैं आपके साथ आज शेयर करने वाला हूँ.

लॉकडाउन में ऑफिस बंद होने की वजह से मैं वर्क फ्रॉम होम से ही काम कर रहा था.

इस सब में मेरा मन नहीं लग रहा था क्योंकि चूत का इंतजाम नहीं हो पा रहा था.
जब तक कोई चूत ना मिले, मेरे लंड को सुकून नहीं मिलता.

इसी वजह से मैंने अपने पड़ोस में रहने वाली अर्चना मेम को जो कि एक स्कूल में पढ़ाती हैं, लाइन मारना शुरू किया.

वे ज़्यादा खूबसूरत तो नहीं थी लेकिन उसका 36-32-38 का फिगर बड़ा ही कामुक फिगर था.

जब भी मैं उसे देखता था तो मेरा लंड पैंट में तंबू बनाने लगता था.
अर्चना मेम थी तो सांवली … लेकिन जब भी वे चलती थी, तो मैं उसकी मटकती और थिरकती हुई गांड देखता रहता था.
सच में उसकी गांड खूब हिलती थी.

मुझे लगता था कि ये साली बहुत चुदी हुई है लेकिन मैं शत प्रतिशत गलत निकला जब किस्मत से मुझे उसकी सील तोड़ने का अवसर मिला.
ऊपर वाले ने उसकी चूत की दुकान की शटर उठाने का मौका मुझे दिया था.

सच में यार क्या बताऊं, वो जितना हसीन पल था.

मैंने जितना अर्चना मेम के बारे में सोचा था, वह तो उससे भी ज़्यादा मस्त माल निकली थी.

उसकी उम्र 36 साल की जरूर हो गई थी लेकिन वह अभी भी अविवाहित थी.

एक दिन मैंने सोच लिया था कि इस लॉकडाउन में इसी की चूत का ही रस निकालते हैं.
तो मैंने उसे लाइन मारना शुरू कर दिया था.

वह जब भी मुझसे छत पर मिलती तो मैं हमेशा उसे देख कर स्माइल कर देता; वह भी रिप्लाइ में स्माइल दे देती.
धीरे धीरे सिलसिला चल निकला.

मैं अब उसे कुछ ज़्यादा ही देखने लगा था.
उसकी मुस्कान से मुझे भी लगने लगा था कि शायद वो भी मुझे पसंद करती है.

मैंने धीरे धीरे उससे बात करनी शुरू कर दी.
वह भी मुझसे बात करती और हमारे बीच अच्छी दोस्ती हो गयी.

एक दिन मैं रात को गर्मी लगने के कारण ऊपर छत पर ही जाकर सो गया.
मैं अंडरवियर में ही लेटा था.

सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने उसे अपने सामने देखा.
वह मेरे लंड को घूर रही थी जो मेरे अंडरवियर में ही काफ़ी हार्ड और सख़्त हो गया था.

जैसे ही मैंने उसे देखा, तो उसकी नजरें मेरी नजरों से नहीं मिल रही थीं.

वह एकटक मेरे खड़े लंड को देखे जा रही थी.
तो मैंने धीरे से खांस दिया.
अब उसकी नज़र लौड़े से हट कर मेरी नज़रों से मिल गई.

वह शर्मा कर भाग गयी और मैं समझ गया कि लोहा गर्म है. जल्दी से कोई न कोई जुगाड़ करके इसे अपने बिस्तर में लाना होगा.

खैर … मैं भी मुस्कुराता हुआ अपने रूम में आ गया और खिड़की खोल कर खड़ा हो गया.

मैं अपने अंडरवियर से लंड बाहर निकाल कर अपने हाथों से हिला रहा था और उसकी नजरों से अपने लौड़े को निहारने का वो नजारा याद कर रहा था.
साथ ही मुझे उसके सामने वाली खिड़की में आने का इंतजार भी था कि वो आए तो उसे मैं अपना लंड पूरा दिखा दूँ.

पर वो आई ही नहीं.

फिर मैं नहा धोकर तैयार हुआ और रूम में लैपटॉप लेकर बैठ गया और काम करने लगा.

वह छत पर कपड़े फैलाने आई लेकिन उसकी नज़र मेरी खिड़की की ही तरफ थी.
चोर नज़रों से वह बार बार खिड़की की ओर ही देख रही थी.

जब मैं काफ़ी देर नहीं आया तो वह मुझे बुलाने मेरे रूम तक आई.
मेरी तरफ आने के लिए उसे छत पर कूद कर आना होता था.

मैंने जब उसे रूम में आते देखा तो अपने लैपटॉप पर काम करने का नाटक करने लगा.
वह मेरे रूम के दरवाजे के पास आई और दरवाजे को नॉक किया.

मैंने सहज भाव से दरवाजा खोला तो सामने वो खड़ी थी.
उसने काले रंग का सूट पहना हुआ था और डार्क टेन कलर की लिपस्टिक लगा रखी थी.
उसके जिस्म से कमाल की खुशबू आ रही थी.

मैं उसकी क्लीवेज को देख रहा था जो उसके कमीज से साफ दिख रही थी.
उसने मेरी नजरों को ताड़ लिया था कि मैं उसके दूध देख रहा हूँ.

उसने इठला कर मुझसे पूछा- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं, बस नज़ारा ही ऐसा सामने आ गया कि नज़र टिक गयी.

वह स्माइल करके बोली- अच्छा … नज़ारा तो सुबह का भी बहुत अच्छा था.
मैंने कहा- अब क्या करें, इस लॉकडाउन में सब बंद है. बेचारा वो भी मायूस था. आप बताइए क्या सेवा कर सकता हूँ?

वह हंस दी और बोली- मेरे मोबाइल का चार्जर खराब हो गया है, क्या आपके पास कोई चार्जर है, जिससे मेरा मोबाइल चार्ज हो सके.
मैंने अपना चार्जर उसे दे दिया और कहा- लो चार्ज करके दे देना.

वह एक मस्त सेक्सी स्माइल देकर चली गयी और मेरा नंबर भी ले गयी.

आधे घंटे के बाद उसका मैसेज आया जिसमें उसने चार्जर के लिए थैंक्स कहा था.
मैंने भी उसे थैंक्स बोल दिया.

उसने कहा- ये वाला थैंक्स क्यों?
मैंने कहा- सुबह कुछ नज़ारा ही आपने दिखा दिया कि मेरा आज का सारा दिन ही अच्छा हो गया.

उसे शरारत आयी तो वो बोली- आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने कहा- हमें कोई पसंद ही नहीं करती है. इसी लिए अभी तक मेरी कोई गर्लफ्रेंड ही नहीं बन सकी है.

वह बोली- लगता है आप भी मेरी तरह ही हो.
मैंने कहा- मतलब?
उसने धीमे से कहा- प्यासे …

मैंने सुन लिया और कहा- तो क्यों ना हम दोनों ही एक दूसरे की प्यास बुझा दें?
मेरे इस मैसेज के बाद उसने मैसेज नहीं किया.

फिर शाम को मैं छत पर गया तो वह अपनी सहेली के साथ छत पर बैठी थी.
उसकी वो सहेली भी इसी बिल्डिंग में मेरी तरह कमरा किराए पर लेकर रहती थी लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से वो घर नहीं जा पाई थी.

अब इन दोनों ने किराया बचाने के लिए एक ही रूम में रहना शुरू कर दिया था.

मैं छुप छुप कर उससे नजरें मिलाने की कोशिश करता और वह भी मेरी तरफ देख कर अपनी सहेली से बात करने लगती.

तभी उसकी फ्रेंड का कॉल आ गया और वह उठ कर रूम में चली गयी.
अब वह मेरे पास आई तो मैंने कहा- सुबह के प्रपोज़ल के बारे में आपने कुछ सोचा?

उसने सीधे सीधे से कहा- हां आज रात को मैं आपके कमरे में आऊंगी, लेकिन आप किसी को बताना मत.
मैंने खुश होकर उससे आई लव यू बोल दिया.

इस पर उसने मेरे गाल पर एक चपत जड़ दी और बोली- ये प्यार व्यार मुझे नहीं चाहिए … बस जो मुझे चाहिए, वो तुम्हारे पास है. और जो तुम्हें चाहिए वो मेरे पास है. बस अपना रिश्ता यही है कि हम एक दूसरे को खुश करें.

मैंने भी सोचा कि कौन तुझे झेले, मुझे तो खुद तेरा ये सेक्सी बदन चाहिए बस … बाकी तू अपनी मां चुदा.
सामने से मैंने भी कहा- ओके.

मैं अपने रूम में आकर रात होने का इंतज़ार करने लगा कि आज रात को अपने रूम इसकी मस्त चुदाई करूंगा.

फिर जब रात हुई तो मैं उसका इन्तजार करने लगा.
वो पल आ ही गया जब दरवाजे पर दस्तक हुई.

मैंने दरवाजा खोला, तो उफ्फ़ तौबा … वह एक क़यामत लग रही थी यार!

वह मेरे कमरे में अन्दर आई और उसने रूम का डोर लॉक कर दिया.
सीधा वह मेरे सीने से लिपट गयी और हम दोनों के लब आपस में मिल गए.

मैं उसे वहीं दरवाजे पर सटा कर उसे क़िस किए जा रहा था.
वह भी मेरी जीभ से अपनी जीभ लड़ाती हुई खेल रही थी.

वह मेरी जीभ को बड़ी बेताबी से चूस रही थी.
मैं उसके और करीब आ गया और उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया.

उसके बड़े बड़े बूब्स मेरे सीने से दबने लगे और मैं अपने हाथों को उसके गले से निकाल कर एक हाथ से उसके कंधों को पकड़े हुए था, दूसरे को उसको मम्मों पर रख कर उन्हें प्यार से सहला और दबा रहा था.

वह गर्म होकर और ज़्यादा उत्तेजित हो गयी थी.
हम दोनों ने करीब 20 मिनट तक एक दूसरे के मुँह की लार को चूसा और मदहोश होते चले गए.

मैं इसी मदहोशी के आलम में उसके होंठों को काफ़ी देर तक चूसता रहा.

उसके बाद मैं उसके गालों को चूसने चाटने लगा.
फिर उसके दोनों कानों को बारी बारी से चूसने लगा.

वह लगातार गर्म होती जा रही थी और अपने मुँह से कामुक आवाजें निकालने लगी थी- आआह आह!

मैं और नीचे होता हुआ उसके गले के चाटने लगा और उसकी साड़ी के पल्लू को हटा दिया, उसके कंधे को चाटने लगा और उस पर दांत गड़ा कर काटने लगा.

वह और तेजी से आहें भरने लगी.
मैंने उसे वहीं रखे सोफ़े के ऊपर बैठाया और उसे किस करने लगा.

उसके बाद मैंने उसकी साड़ी को उसके घुटनों तक उठा दिया.
उसने मुझे अपने पैरों से जकड़ लिया और वो भी भूखी शेरनी की तरह मेरे होंठों को चूसने लगी थी.

मैंने उसके ब्लाउज को उसके कंधे से खींच दिया.
अब अनावृत हो चुके उसके एक कंधे पर मैंने ढेर सारे चुंबन किए और जीभ से चाटने लगा.
वह बहुत गर्म होने लगी और आह आह करने लगी.

मैं जल्दी जल्दी उसके ब्लाउज के हुक खोलने लगा.
जल्दी जल्दी में दो हुक टूट भी गए और ब्लाउज भी फट गया.

उसने अपने ब्लाउज की ऐसी हालत देखी तो वह खुद से अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी.

मैंने जब उसके ब्लाउज को उतारा तो वह अन्दर लाल रंग की ब्रा पहने थी, जो जालीदार थी.
उसके बड़े बड़े रसभरे दूध वाले लोटे ब्रा से आज़ाद होने के लिए तरस रहे थे.

साथ ही उसने जो पर्फ्यूम लगाया था वह मेरे अन्दर और भी ज़्यादा सेक्स भर रहा था.
मैं उसके मम्मों के बीच में मुँह रख कर अपने गालों को उसके मम्मों से रगड़ने लगा और अपने मुँह से उसके मम्मों को दबाने भी लगा.

मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके दूध चाटने और काटने लगा.
फिर मैंने उसकी ब्रा को ऊपर किया तो उसके दूध वासना की वजह से कुछ ज्यादा ही फूल गए थे.

मैंने जैसे ही उसके एक निप्पल पर अपनी जीभ की नोक से कुरेदा तो वो एकदम से तड़फ उठी और उचक कर आआह ऊहह करने लगी.

मैं उसके एक निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा.
दूसरी तरफ वो भी इतनी ज्यादा मस्त हो गयी थी कि मेरा सर अपने मम्मों पर गाड़ने लगी और ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगी.

मैंने नीचे से उसकी साड़ी में हाथ डाल कर उसकी पैंटी को छुआ.
वह पूरी गीली हो चुकी थी और उसकी चूत का नमकीन अमृत मेरे हाथों पर लग गया था.

मैंने उसके सामने उस नमकीन रस को उंगलियों में लेकर चूसा, तो वह लपक कर मेरी उंगलियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

धीरे से मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चूत में दो उंगलियां डाल दीं.
वह एकदम उचक कर बोली- आह जानू … आराम से … मैं अभी तक कुंवारी हूँ.
मैंने आश्चर्य से कहा- क्या?
वो फिर ‘हूँ …’ कह कर मेरी तरफ देखने लगी.

उसकी इस बात से मैं बेहद आश्चर्यचकित था कि इतनी उम्र में भी मास्टरनी साहिबा को लंड नसीब नहीं हुआ.

अब मैं उस मास्टरनी की चुत का भोसड़ा बनाने वाली चुदाई कहानी को अगले भाग में लिखूँगा.
आप मुझे मेल कीजिएगा कि अब तक की यह स्कूल टीचर सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?
आपका रोहित

स्कूल टीचर सेक्स कहानी का अगला भाग:

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