रिश्तों में चुदाई की गन्दी कहानी

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हम भाई बहन की चुदाई में हमारे माँ बाप रुकावट ना बनें, इसलिए मैंने योजना बनाकर बाप बेटी की चुदाई करवा दी. अब माँ को रिश्तों में चुदाई के खेल में शामिल करना था.

बाप बेटी, भाई बहन की चुदाई कहानी के पहले भाग

में अपने पढ़ा कि कैसे मेरी बहन के साथ मिल कर मैंने बाप बेटी की चुदाई करवायी और उसमें मैं भी शामिल था.
अब आगे:

तो दोस्तो, फिर मैं माँ के कमरे में चला गया और पापा पूर्वी के पास चले गए।

माँ के बारे में मन में सोच सोच के ही मेरा लंड खड़ा हो चुका था।

जब मैं माँ के कमरे में गया तो वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में आँखें बंद करके लेटी हुई थी। माँ को पता नहीं था कि पापा की जगह मैं उनके बाजु में लेटा हुआ हूं.
मैंने थोड़ा सब्र किया।

मैं यह जानता था कि माँ ने भी काफी समय से चुदाई नहीं की है और वो मेरे मनाने से मान जायेगी।

माँ ने पीला ब्लाउज और पेटिकोट पहना हुआ था और वो दूसरी तरफ करवट करके सो रही थी।

मैंने 1 बजने का इंतज़ार किया ताकि माँ सो जाये. और सोचता रहा कि उधर तो पापा अपनी बेटी पूर्वी की चूत फाड़ रहे होंगे।

जब 1 बजा, मैं धीरे धीरे अपना हाथ माँ के पेट पर घुमाने लगा. मेरा मन तो कर रहा था कि हाथ थोड़ा और नीचे ले जा कर नाड़ा खोल दूँ और चूत में अपनी उंगली घुसेड़ दूँ. पर मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहता था।

मुझे जब लगा कि माँ सो गई है, मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उनके दूध दबाने लगा। उनकी इतनी उम्र होने के बाद भी ऐसा लग रहा था मानो जैसे 20 साल की लड़की के गदराए ताज़े ताज़े बोबे हों। मैंने एक एक करके ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए. फिर पीछे से ब्रा का हुक भी खोल कर उनके स्तनों को पिंजरे से आज़ाद कर दिया और उन्हें ब्रा से बहार निकाल कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।

तब मैं अपना खड़ा लण्ड पीछे से ही पेटीकोट के ऊपर से ही उनकी गांड के दरार में फंसाकर घिसने लगा।

कुछ देर में मेरा हाथ माँ ने पकड़ लिया. मैं डर गया पर माँ ने मेरा हाथ पकड़ उनके स्तन से हटाकर उनकी चूत में रख दिया।

मैं समझ गया कि माँ अभी भी जागी हुई है पर वो मुझे अभी भी पापा समझ रही है. पर मैंने अपना काम जारी रखा, उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उनकी काली रंग की पैंटी को नीचे सरका दिया और उनकी चूत में एक उंगली डाल कर आगे पीछे करने लगा।

माँ धीरे धीरे सिसकारियां लेने लगी, मैं उनकी तेज़ हुई साँसों की आवाज़ सुन सकता था।
फिर मैंने उनका पेटीकोट और पैंटी दोनों उतार कर नीचे फेंक दी। फिर उन्हें सीधा करके उनकी चूत के पास अपना मुंह ले गया और चूत की खुशबू सूंघने लगा। माँ की चूत बिल्कुल साफ़ थी. शायद आज ही शेव किया होगा।

माँ की चूत भी मेरी बहन की चूत की तरह ही चिकनी थी.

मैंने उनकी चूत की फांकों को खोला और उसमें अपनी जीभ डालकर उन्हें चूसने लगा. इससे माँ की सिसकारियां थोड़ी तेज़ हो गयी और वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज़ करने लगी। उनकी चूत में से हल्का हल्का पानी निकल रहा था जो बहुत स्वादिस्ट लग रहा था.

मैं माँ की चूत को पूरा मुंह में भरकर चूस रहा था. तब तक माँ ने अपनी ब्रा और पैंटी भी निकाल दिया।

माँ इतनी जल्दी कहाँ झड़ने वाली थी। थोड़ी देर चूत चूसने के बाद अब बारी उनकी थी. मैं भी जल्दी से पूरा नंगा होकर लेट गया और वो मेरा लण्ड चूसने के लिये अपना मुंह मेरे लण्ड के पास ले आई. और धीरे से अपनी जीभ मेरे लण्ड के ऊपर वाले भाग पर घुमायी. फिर मेरा लण्ड पूरा अपने मुंह में भर लिया.

जैसे ही लण्ड को उन्होंने मुंह में लिया … मानो मैं खुद को जन्नत में महसूस करने लगा।
मेरे सुख का अंदाजा नहीं लगा सकते आप दोस्तो!

पर मेरा लण्ड चूसते ही उन्हें शक हुआ क्योंकि वो तो मुझे पापा ही समझ रही थी।
तो उन्होंने लाइट ऑन कर दी।

उस लाइट के उजाले में मैं और माँ दोनों नंगे एक दूसरे को देख रहे थे.
क्योंकि जो पिछले 15- 20 मिनट में जो हम कर रहे थे वो माँ बेटे के बीच सामान्यतः नहीं होता है।

माँ चौंक गयी थी.
फिर उन्होंने पेटीकोट उठाकर अपने आप को ढका और मुझसे डांटते हुआ पूछा- ये सब क्या है?
मैंने कहा- सॉरी माँ, पर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया क्योंकि पहले आप एक औरत है फिर मेरी माँ हैं।
माँ ने कहा- कुछ भी हो पर एक माँ और बेटे के बीच ऐसा कुछ नहीं होता।

फिर मैंने उन्हें समझाया- माँ आप जानवरों को ही देख लीजिए. कैसे एक बार गांव में दादाजी ने बकरी को गर्भ करने के लिए अपने घर के ही एक बकरे के साथ सहवास करवाया था जबकि वह बकरा वही था जो उस बकरी ने 2 साल पहले जना था. इस हिसाब से तो वो बकरी उस बकरे की माँ थी न!

माँ ने संकोच करते हुए कहा- पर बेटा, वो जानवर है हम इंसान, ये सब गलत है।

फिर मैंने उनका एक हाथ लिया और अपने लण्ड पर रखा और कहा- अगर ऐसा नहीं होता प्रकृति में तो क्या ये मेरा लण्ड आपके लिए खड़ा होता? और क्या आपको फिर से गर्भ दिला सकता? बोलो माँ? अगर एक माँ बेटे के बीच ऐसा नहीं होता तो आपने जब तक मुझे नहीं देखा था तो क्या आप चुदाई नहीं करना चाहती थी?
“पर … बेटा!” माँ ने चिंता से कुछ कहना चाहा.

“पर वर कुछ नहीं माँ, अपनी माँ के साथ सेक्स नहीं कर सकते, ये सब मिथ्या है असल में ऐसा कुछ भी नहीं है।”
माँ ने कुछ सोचते हुए कहा- ठीक है. पर तू वादा कर कि बाहर किसी को नहीं बतायेगा।
“पक्का वादा माँ … मैं ये किसी से नहीं कहूंगा। चलो न अब देखो न ये कितना उछाल मार रहा है.” मैंने अपने लण्ड की ओर इशारा करते हुए कहा.

माँ हल्का सा मुस्कुराई और कहा- चल लेट जा।
और वो मेरा लण्ड चूसने लगी।
मैं बस उन्हें ही देखे जा रहा था और सोच रहा था कि मेरी माँ नंगी कितनी ख़ूबसूरत लग रही है. उनका गोरा गोरा जिस्म मेरे दिल को बहुत सुकून दे रहा था।

फिर मैंने कहा- माँ, आप उल्टी होकर मेरे ऊपर आकर लण्ड चूसो।
माँ ने कहा- ओह मतलब बेटा तुझे 69 करना है?
“हां माँ” मैंने कहा।

और वो मेरे ऊपर आ गयी.

माँ की चूत की खुशबू मुझे मदहोश किये जा रही थी. हमने ऐसे ही एक दूसरे को झड़ा दिया। मैं मेरी माँ का सारा माल पी गया. सच में बहुत टेस्टी था.

और झड़ने के बाद मैंने माँ को गले लगाया और शुक्रिया कहा।

उन्होंने कहा- बेटा, अभी तो जरूरी काम बाक़ी है।
वो मेरे लण्ड को सहलाती रही थोड़ी देर में ही लण्ड फिर से टनटनाने लगा।

मैंने माँ को सीधा लिटाया और और उनकी टांगों को फैलाया और माँ ने मेरा लण्ड अपनी चूत पर सेट किया.
उन्हें क्या पता था कि मैं पहले ही चुदाई कर चुका हूं वो भी अपनी बहन की!

मैंने एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा लण्ड उनकी चूत में पेल दिया और उनकी चुदाई करने लगा। उनके चेहरे पर खुशी साफ़ झलक रही थी। वो हल्की हल्की अह उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज़ निकाल रही थी।

फिर थोड़ी देर बाद माँ से मैंने घोड़ी बनने को कहा तो उन्होंने मना किया और कहा- बेटा तेरे पापा आ जायेंगे।
मैंने कहा- नहीं आएंगे माँ, वो सो गए हैं।
और मैंने खुद ही उन्हें पलट दिया, वो घोड़ी बन गयी.

फिर पीछे से मैंने अपना लण्ड सेट किया और चोदना शुरू कर दिया। फिर मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने कहा- माँ पियोगी क्या?
तो उन्होंने कहा- क्यों नहीं बेटा!
और मैंने अपना लण्ड उनकी चूत से निकालकर मुँह में दे दिया और झड़ गया. वो मेरा सारा माल पी गयी।
उस रात मैंने माँ की गांड भी मारी।

दिन के 11 बज चुके थे रात भर चुदाई की वजह से माँ और मैं लेट सो कर उठे. और यही नहीं, पापा और पूर्वी भी देर तक सो ही रहे थे. आखिर उन्होंने भी तो रात भर चुदाई की है।

माँ तैयार होकर दोपहर का खाना बना रही थी, मैं वैसे ही नंगा कमरे से बाहर आया, पूर्वी सो रही थी।
मैं रसोई में चला गया, माँ मुझे नंगा और मेरा खड़ा लण्ड देख चौंक गयी और बोली- बेटा पूर्वी घर में है, वो देख लेगी।
मैंने कहा- वो सो रही है.

फिर मैंने पूछा- क्या आपने नाश्ता किया माँ?
तो उन्होंने- नहीं बेटा, अभी नहीं।

मैंने अपने लण्ड की तरफ इशारा करते हुए कहा- क्या आप ये टेस्टी नाश्ता करना चाहेंगी?
तो माँ मुस्कुरा दी और और नीचे बैठ कर मेरा लण्ड चूसने लगी और चूसने के बाद मेरा रस पी गयी।

फिर माँ ने कहा- चल बेटा, अब जल्दी जा और कपड़े पहन ले।

मैं रात होने का इंतज़ार करने लगा. मैं आज रात को भी माँ को अच्छे से चोदना चाहता था।

शाम को जब पापा घर आये तो वो पूर्वी दोनों बहुत ही खुश लग रहे थे। पापा मेरे पास आये और कहा- आज रात तू सो जा पूर्वी के साथ।
अब उन्हें कहाँ मालूम था कि मेरी इच्छा क्या है।
लेकिन मैंने हाँ में सर हिला दिया।

रात को खाना के बाद माँ ने कहा- तुम सब मेरे कमरे में आना अभी!
यह सुनकर पापा डर गए की कहीं माँ को उनके और पूर्वी के बारे में तो नहीं पता चल गया।

पापा मेरी तरफ देखने लगे.
मैंने धीरे से कहा- मैंने कुछ नहीं बताया।

फिर बाद में मैं और पूर्वी माँ पापा के कमरे में गये। पापा के चेहरे पर डर साफ़ दिखाई दे रहा था साथ ही मैं ये सोच रहा था कि आखिर माँ ने बुलाया क्यों।

हम लोग सभी एक पलंग पर बैठ गए.

माँ ने कहा- पूर्वी, अब तुम अब बड़ी हो चुकी हो इसलिए तुम्हें सेक्स के बारे में बताने की जरूरत नहीं तुम जानती ही होगी।
पूर्वी ने हाँ में सर हिलाया।

“हम लोग एक प्यारा परिवार हैं, पर तब भी हम रिश्तों में उलझे हुए हैं और एक दूसरे से चुदाई नहीं कर पाते।”
पापा ने बन कर कहा- ये तुम क्या बोल रही हो शिवानी? आखिर ये कैसे हो सकता है कि एक बाप अपनी ही बेटी को चोदे।
माँ ने कहा- जी, जब दुनिया में पहली बार इंसान आये तो उनमें कोई रिश्ते नहीं थे और उनकी संतानों ने भी तो आपस में सेक्स किया ही होगा तभी तो और इंसान पैदा हुए।

मैं खुश था कि आखिर माँ कल रात की मेरी बात समझ चुकी है.

पूर्वी ने कहा- तो क्या माँ, भैया भी आप को चोद सकता है?
“सिर्फ मुझे ही नहीं बेटी, तुम्हें भी!” माँ ने कहा
पूर्वी- पर कैसे माँ?

मैंने माँ की साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तन दबाने लगा।
माँ ने मुझे कहा- रुक जा बेटा अभी!
और पूर्वी का एक हाथ पकड़ कर पापा के लण्ड पर रख दिया। पापा का लण्ड पजामे में ही टनटनाने लगा।

फिर माँ ने पापा से कहा- क्या तुम्हारे अंदर वासना नहीं जागी? अगर प्रकृति रिश्ते नहीं देखती तो फिर हम कौन होते हैं।

पूर्वी ने कहा- आप सही कह रही हो माँ।
मैंने कहा- तो देर क्यों कर रहे हो? जल्दी से अपने अपने कपड़े उतारो सब।

हम सबने अपने कपड़े उतार कर नीचे फेंक दिए।

माँ ने कहा- पूर्वी बेटी, पापा बड़े है तो तुम्हें भाई से पहले उनका आदर करना होगा, तुम पहले उनका लण्ड चूसोगी।
मैंने कहा- माँ, तो तुम फिर मेरा लण्ड चूसो।
माँ मुस्कुरायी और कहा- हां बेटा, क्यों नहीं।

पूर्वी पापा का लण्ड बिल्कुल रंडी की तरह अच्छे से चूस रही थी और वो आप लोग जानते ही हो क्यों।
यह देखकर माँ ने मेरा लण्ड मुंह से निकाल लिया और बोली- पूर्वी तुमने ये कहाँ से सीखा?

तो मैंने माँ का चेहरा पकड़ा और उनके मुंह में अपना लण्ड डाल दिया और कहा- माँ, मैं आपको सब बताता हूं. जब आप लोग शादी में बाहर गए थे, तब पूर्वी और मैंने चुदाई की थी. और जब आप आपकी सहेली के साथ बाहर गयी थी तब पापा ने भी पूर्वी की चुदाई की।

माँ ने आश्चर्य से कहा- मतलब बेटा, कल रात जब तुम मुझे चोद रहे थे तब तुम्हारे पापा पूर्वी को चोद रहे थे?

तभी पूर्वी और पापा भी चौक पड़े कि ये जानकर कि मैंने और माँ ने भी चुदाई की हुई है।
अब सबके बीच सबकुछ साफ़ था।

काफी देर लण्ड चूसाई के बाद पूर्वी ने कहा- माँ, आप भैया का रस मत पीना. मैं भैया और पापा का रस साथ में पीना चाहती हूँ.
तो माँ ने हंस कर कहा- ठीक है।
माँ के मुंह से लण्ड चुसवाते मैं झड़ने वाला था और पापा भी।

पूर्वी पलंग से नीचे घुटनों के बल बैठ गयी तो मैंने कहा- माँ आप भी आ जाइये न!
तो माँ भी वहीं पूर्वी के बाजू में घुटनों के बल बैठ गयी.

पूर्वी दोनों हाथ से पापा और मेरे लण्ड को आगे पीछे ज़ोर से करने लगी और दोनों लण्ड मुंह में भर लिया.
और मैंने और पापा ने उसके मुंह में अपना अपना वीर्य गिरा दिया।

माँ ने कहा- मुझे भी मिलेगा या नहीं?
तो पापा और मैंने मुस्कान के साथ अपना थोड़ा माल माँ के मुंह में भी दे दिया.
माँ ने हम दोनों के लण्ड को चाट कर साफ़ भी कर दिया।

पूर्वी बोल पड़ी- वाह, बहुत स्वादिस्ट था ये तो!

माँ बोली- अब हमारी चूत भी तो बाकी है.

तो पापा ने कहा- उसके लिए तेरा बेटा है न … मैं तो मेरी परी जैसी बेटी की चूत चूसूंगा।
पूर्वी ने कहा- हाँ … और मैं सिर्फ पापा की परी हूँ।
तो मैं भी बोल पड़ा- और मेरी माँ परियों की रानी है.

माँ को लिटाया मैंने, उनकी टांगें फैलायी और उनकी चूत में मुंह डाल कर चूसने लगा. माँ ने मेरे बालों पर हाथ फिराया और कहा- सही कहा मेरे राजकुमार।
मैं माँ के स्तनों को भी दबाये जा रहा था. माँ के स्तन पूर्वी से बड़े थे पर पूर्वी के स्तन थोड़े छोटे होने की वजह से पापा तो उनको निचोड़े जा रहे थे.

कुछ देर बाद पूर्वी की एक टांग उठाकर पापा ने अपने कंधे पर रखा और अपना पूरा लण्ड एक बार में ही उसकी कमसिन चूत में पेल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे, पूर्वी भी खुल कर ज़ोर ज़ोर आवाजें निकाल रही थी।

बाप बेटी की चुदाई देख कर माँ ने उत्तेजित होकर कहा- बेटा, अब और मत तड़पा अपनी माँ को, फाड़ दे ये चूत मेरी!
मैंने कहा- ठीक है माँ।
और मैं पलंग पर लेट गया।

माँ समझ गयी कि उनको मेरे ऊपर आना है और वो आ गई।
उन्होंने अपने हाथों से मेरे लण्ड को उनकी चूत में सेट किया और वो उसपर बैठ गयी. मेरा माँ उछल उछल कर अपनी चूत चुदवाने लगी।
मैं भी पूरी उत्तेजना में पूरी ताकत से ज़ोर ज़ोर से अपनी गांड उठाकर उनको चोद रहा था।

माँ मेरे लण्ड पर उछल रही थी और उनके साथ उनके उछलते हुए स्तनों को मैंने अपने दोनों हाथों में थाम लिया और ज़ोर से मसलने लगा।

कुछ देर बाद पूर्वी बोली- माँ को भी डबल मज़ा तो दो।
तो माँ ने कहा- मतलब?

पापा ने बोला- आज तेरी चूत के साथ साथ गांड भी चोदेंगे।
तो माँ ने चौंक कर कहा- मतलब दोनों बाप बेटे एक साथ?
माँ थोड़ा डर गई और कहा- नहीं नहीं … मैं दो लण्ड एक साथ नहीं ले सकती।

तो मैंने कहा- बिल्कुल ले सकती हो माँ आप, अगर पूर्वी ले सकती है तो आप क्यों नहीं माँ!

माँ ने पूर्वी को आँखें बड़ी करके आश्चर्य से देखा।
पूर्वी बोली- हाँ माँ, और तो और इसमें मज़ा भी बहुत आता है।

मैंने माँ को अपने ऊपर लेटा लिया उनके स्तन मेरे सीने से ज़ोर से दबने लगें और मेरा लण्ड उनकी चूत में यूँ ही फंसा रहा।
पापा माँ के पीछे आ गये।

माँ पापा से बोली- देखो जी, आराम से करना आप।
फिर पूर्वी ने माँ की गांड में थूका और और पापा के लण्ड को अपने थूक से मलकर चिकना किया।

माँ ने आँखें बंद कर ली और मैं उनके होंठों को चूसने लगा. पापा ने धीरे धीरे अपना लण्ड उनकी गांड में पूरा डाला। कुछ देर हम ऐसे ही रुके रहे. फिर कुछ देर में पापा लंड आगे पीछे करने लगे और माँ ने आँखें खोल ली और उन्ह उन्ह उन्ह की आवाज़ करने लगी।

फिर मैं भी धीरे धीरे लण्ड आगे पीछे करने लगा और फिर पापा और मैं तेज़ी से माँ को चोदने लगे।
माँ ने कहा- बेटा, तुम दोनों भाई बहन भी तो एक बार मेरे सामने चुदाई करो।

मैंने कहा- क्यों नहीं माँ!
और फिर माँ मेरे ऊपर से हट गई और बाजु में लेट गयी.

पापा अपना लण्ड माँ की चूत में डालकर चोदने लगे।
मैंने कहा- चल आ जा मेरी प्यारी बहन, चल घोड़ी बन जा।
और वो बड़े प्यार से घोड़ी बन कर अपनी गांड मटकाने लगी।

फिर मैं पीछे से उसकी चूत में लण्ड डालकर ज़ोर से चोदने लगा।

अब हम सब चुदाई की अंतिम सीमा पर थे जिस वजह से पूरे जोश में चुदाई कर रहे थे।

कमरे में पूर्वी और माँ की चुदाई की कामुकता भरी आवाजें गूंज रही थी और वो दोनों भी खुलकर ज़ोर ज़ोर से आवाजें निकाल रही थी जो मेरी अन्तर्वासना को बढ़ा रही थी और मैं ज़ोर ज़ोर से पूर्वी को चोदे जा रहा था।

कुछ देर में माँ बोली- मैं झड़ने वाली हूँ।
और पापा भी बोले- मैं भी!
और दोनों झड़ के शांत हो गए.

लेकिन मैं अभी भी पूर्वी को चोदे जा रहा था और कुछ देर बाद हम भी झड़ कर शांत हो गए।
उस रात हमने मिलकर बहुत चुदाई की।

उसके बाद घर में हम नंगे ही घूमते और जब पापा ऑफिस जाते तब पूर्वी और माँ को मैं एक साथ चोदता।

हमें 4 महीने बाद पता चला कि पूर्वी और माँ दोनों पेट से हैं.
9 महीने बाद माँ ने एक लड़की को जन्म दिया और पूर्वी ने एक लड़के को।

जब हमने मेडिकल जांच कराई तो पता चला की माँ के पेट में मेरी बच्ची थी और पूर्वी के पेट में पापा का बच्चा था।
हम सब की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और अब हम सब बहुत खुशी से मिल जुल कर रहते हैं।

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