मुंहबोली बहन को रंडी बनाकर चोदा

Family Sex Stories

नंगी लड़की देसी कहानी में पढ़ें कि मेरे मामा की बेटी हमारे यहाँ रहने आई तो सोते हुए मैंने उसे छेड़ा. उसने कुछ नहीं कहा तो मैं उसके कपड़े उतारने लगा. उसके बाद …

दोस्तो, अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, जो मैं आपके सामने लेकर आया हूँ.
मेरा नाम विकास है और मैं इंदौर का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 22 साल है और कद 6 फुट का है.

मैं अभी कॉलेज में हूँ.
मैं घर पर पापा और मम्मी के साथ रहता हूँ. हमारे घर में 2 बेडरूम हैं. एक में पापा मम्मी रहते है और एक मेरे लिए है.

यह नंगी लड़की देसी कहानी एक साल पहले की है जब मेरी मम्मी ने कहा कि उनके मुँहबोले भाई की बेटी हमारे घर आने वाली है.
दरअसल मेरी मम्मी को घर के काम में मदद के लिए कोई चाहिए था और उसी समय मेरे उन दूर के मामा ने कहा कि वो अपनी बेटी रचना को भेज देंगे.

रचना गांव की रहने वाली थी और उसकी उम्र 19 साल थी.
रचना की हाइट 5 फुट 6 इंच थी वो बहुत गोरी थी. उसका बदन भरा हुआ था.

उसके सामने आने पर पहली नज़र उसकी चूचियों पर ही जाती थी.
मेरे पापा का गांव जाना हुआ तो वो रचना को अपने साथ लेकर आ गए.

मैं रचना को पहले से अच्छे से जानता था.
हम लोग जब भी गर्मी की छुट्टियों में गांव जाते थे, तब मेरा रचना से मिलना होता ही था और हम दोस्तों की तरह रहते थे.

गांव में एक बार जब सब लोग छत पर सो रहे थे, तब रचना मेरे पास वाले बिस्तर पर ही सो रही थी.
तब मैंने उसके दूध दबाए थे और उसने कोई विरोध भी नहीं किया था.

मुझे नहीं पता था कि वो जग रही थी या नहीं, पर किसी के देख लेने के डर से मैंने बात आगे नहीं बढ़ाई थी.

हम दोनों एक दूसरे को छूने और गुदगुदी करने में जरा भी नहीं चूकते थे.
इससे मुझे लगता था कि उसके मन में भी मेरे लिए कुछ चल रहा है.

पर अब वो यहां हमारे घर पर कम से कम 6 महीने रुकने वाली थी.
उसकी स्कूल की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और वो पत्राचार से कॉलेज कर रही थी.

रचना को अकेले सोने की आदत नहीं थी, इस लिए वो मेरे बेडरूम में हो सोने लगी.

हम लोग देर रात तक बातें करते और एक दूसरे को छूने और गुदगुदी करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे.
एक बार रात में जब मैं उसे कमर पर गुदगुदी कर रहा था, तब वो मेरी गोदी में बैठ गई और मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर रख दिए.

उसे भी गुदगुदी करवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. कमरे में अंधेरा था इसलिए मैं उसके सेक्सी बदन को देख नहीं पा रहा था, पर उसे महसूस कर सकता था.

मेरा लंड अब खड़ा हो चुका था और रचना की गांड मेरे लंड के बिल्कुल ऊपर ही थी.
मुझे लग रहा था कि पता नहीं वो मेरे बारे में क्या सोचेगी लेकिन मुझे ऐसा लगा कि उसे भी मेरे लंड का अहसास अच्छा लग रहा था.

मैं अपने हाथ उसकी कमर से हटा रहा था, तभी वो आगे की तरफ झुक गई और मेरे दोनों हाथ उसके दूध से टकरा गए.
मैंने हाथ हटाने की कोशिश की, तब तक उसके दोनों दूध मेरे हाथों में आ गए थे.

मैंने झट से हाथ पीछे किए और उसे सॉरी बोला.
पर रचना इससे ज्यादा असहज नहीं लगी.

उसने कहा- अरे कोई बात नहीं.
तभी पापा के उठने की आवाज आई तो वो मेरी गोद में से उठकर अपने बिस्तर पर जाकर लेट गई.

रात काफी हो चुकी थी तो हम दोनों सो गए.

बीच रात में मेरी नींद खुली, कमरे में बहुत हल्की रौशनी थी.

तब मैंने उसकी ओर देखा.
वो नींद में थी और उसका एक हाथ उसके लोअर में था.
तो मैं समझ गया था कि मेरी उस हरकत के बाद वो भी गर्म हो गई थी.

मैं उसके पास जाकर लेट गया और मैंने अपना एक हाथ उसके पेट पर रख दिया.
थोड़ी देर तक जब उसने कोई हरकत नहीं की, तब मैंने अपना हाथ उसके दूध पर रख दिया.
अब भी वो वैसी ही लेटी थी.

इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई और अब मैं धीरे धीरे उसके दूध दबाने लगा.
फिर मैं उसके पास जाकर उससे चिपक गया और उसकी सांसें महसूस करने लगा था.

उसकी सांसें जोर जोर से चल रही थीं और मैं समझ गया था कि वो नींद में नहीं है.
मतलब साफ़ था कि वो मेरा साथ दे रही थी.

अब मैंने उसका टॉप ऊपर किया और उसकी ब्रा खोल दी.
उसके दोनों दूध मेरे सामने थे. उसके मम्मों का साइज 34 का रहा होगा.

अब मैं बड़े ही मज़े से उसके दूध दबा रहा था और एक को चूस भी रहा था.
उसकी सांसें अब और तेज हो गई थीं.

मैं समझ गया कि बंदी लंड का मजा लेने को रेडी है.
मैंने उसका लोअर भी उतार दिया और साथ में पैंटी भी.

फिर मैंने जल्दी ही अपने सारे कपड़े उतारे और उससे चिपक गया.

मेरा लंड अपने पूरे उफान पर था और मैं पागल हो रहा था.
मैंने उसे सर से चाटना शुरू किया. उसके गाल चूसे, फिर उसके होंठ चूसे, उसकी गर्दन को चाटते हुए मैं उसके दूध तक आ गया और दोनों दूध और निप्पलों को चाटा.

फिर मैंने उसके नाभि के आस पास चाटा और झट से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिए.
जैसे ही मैंने अपने होंठ उसकी चूत पर रखे, वो थोड़ी हिल गई.

पर मैं पागलों की तरह उसकी चूत चाट रहा था.
उसकी चूत में से ऐसी जबरदस्त खुशबू आ रही थी कि मेरा पागलपन और बढ़ गया था.

पर मैंने उस नंगी लड़की का जिस्म अच्छे से नहीं देखा था.

अब मैंने अपने हाथ उसके दूध पर रखे और उसकी चूत चाटते हुए उसके दूध दबाने लगा.
पांच मिनट तक मैंने ऐसा ही किया.

अब तक उसकी चूत की गर्मी बहुत बढ़ चुकी थी और मुझे समझ में आने लगा था कि वो झड़ने वाली है.
मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में पेलने लगा.

वो उन्ह आंह करती हुई अपनी मुट्ठियां भींचे हुई थी.
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ जमाए और पूरा का पूरा लंड उसकी मस्त चूत में पेल दिया.

वो छटपटाती हुई चुदने लगी.
कुछ देर में वो सामान्य हो गई.

अब मैंने अपनी कमर चलानी शुरू की.

थोड़ी देर तक उसकी चुदाई करने के बाद मैंने अपने हाथ उसके दूध पर रखे और चुदाई के साथ उसके दूध भी दबाने शुरू किए.
कुछ मिनट तक ऐसी ही चुदाई चली.

मुझे पापा मम्मी के उठने का डर भी लगा हुआ था तो मैंने चुदाई तेज़ की और जल्दी ही उसकी चूत में वीर्य झाड़ दिया.

मेरे झड़ने के पहले वो भी झड़ चुकी थी.
मैं थोड़ी देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा, फिर उठकर अपने कपड़े पहने और उसके नंगे बदन पर चादर डालकर मैं अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया.

मैं सोया नहीं था और देखना चाहता था कि वो अब क्या करेगी.

मेरे बिस्तर पर लेटने के मुश्किल से 5 मिनट के अन्दर वो उठी और उसने चादर से अपनी चूत से बहता हुआ वीर्य साफ़ किया.

फिर उसने मेरी तरफ देखा कि मैं सो रहा हूँ या नहीं.
मैंने सोने का नाटक किया पर मैं उसे ही देख रहा था.

उसने अपने कपड़े पहने और बाथरूम होकर आई. उसने मुझे एक किस किया और अपने बिस्तर पर जाकर सो गई.

दो रातों तक मैंने ऐसे ही रचना की चुदाई की.
पर किसी के जग जाने के डर से रात में एक बार से ज्यादा चुदाई नहीं हो पाती थी.

अब मेरा मन उसे खुल्लम खुल्ला चोदने का था और मेरी वो इच्छा भी जल्दी ही पूरी होने वाली थी.

पापा मम्मी को मेरे चाचा ने अपने शहर बुला लिया. उनके घर कोई ऐसा कार्यक्रम था कि पापा मम्मी का होना जरूरी था.
पर मैंने जाने से मना कर दिया और रचना ने भी.

वो लोग 3 दिन के लिए चले गए.
अब पूरे घर में मैं और रचना ही थे.

रात में खाना खाने के बाद हम दोनों बातें करने लगे.
फिर मैंने उससे उसकी शादी के बारे में पूछा तो वो उदास हो गई.

मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो बहुत परेशान रहती है और उसे नीचे बहुत ज्यादा बेचैनी होती है.

मैंने उससे नीचे बेचैनी होने का कारण पूछा तो वो बोली- जैसे ही आप मुझे छूते हो, मुझे बहुत तेज उत्तेजना होती है. इससे मुझे अजीब सा लगता है.
तो मैंने कहा- इसमें डरने वाली बात नहीं है, ये तो सामान्य बात है. मुझे भी कोई लड़की हाथ लगाएगी तो मुझे भी उत्तेजना होती है.

वो मेरी तरफ देखने लगी.
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके होठों पर किस किया.

फिर मैंने उसके साथ बैठकर एक ब्लू फिल्म देखी.

मैंने उससे कहा- मुझे भी ऐसे ही करना है.
तो उसने कहा- अब तो मैं आपकी हूँ, जो चाहे कर लो.

मैंने उसे अपने मोबाइल में सेक्स स्टोरी पढ़ाई. उसे चूत और लंड जैसे शब्द बोलने में हिचकिचाहट हुई, तो मैंने उसे सिखाया कि कैसे बोलना है.

मैं- रचना, तुम्हें देखने की इच्छा हो रही है यार!
रचना- तो देख लो न.

मैंने हिचकिचाते हुए कहा- यार ऐसे नहीं.
रचना- तो कैसे, आप शर्माओ मत, जो चाहे बोलो.

मैं- रचना, मेरा मन कर रहा है कि तुम्हें पूरी नंगी कर दूँ, मेरा तुम्हारी नंगी जवानी देखने का मन है.

उसके बाद मैंने उसका टॉप उतारा और उसका लोअर भी उतार दिया.
वो ब्रा पैंटी में थी और बहुत सेक्सी लग रही थी.

हालांकि मैंने उसे दो बार चोद चुका था पर वो सब अँधेरे में ही हुआ था तो वो थोड़ा शर्माई.

मैं- अगर तुम शर्माओगी तो मैं आगे नहीं करूंगा, तुम्हें तो हद से ज्यादा बेशर्म बनना है रचना … नहीं तो तुम्हारी परेशानी ठीक नहीं होगी.
रचना- ठीक है तो आपने मेरे ये दो कपड़े क्यों छोड़ दिए, इन्हें भी तो उतारो और आपने अपने कपड़े क्यों नहीं उतारे?

फिर मैंने उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी और अपने भी सारे कपड़े उतार दिए.
अब हम दोनों पूरे नंगे थे. उसके नंगे बदन को ऊपर से नीचे देखते हुए मैंने कहा- वॉव यार रचना, तुम्हारा नंगा बदन तो बहुत मस्त है. तुम्हारी नंगी जवानी देखकर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है.

रचना- मेरी जवानी आपके लिए है मेरी जान … जी भरकर इस जवानी के मज़े ले लो.
मैं- यार, तुम्हारी चूचियां कितनी मस्त हैं, इन्हें तो दबाने और चूसने का मन कर रहा है.

रचना मेरे हाथ अपनी चूचियों पर रखकर बोली- तो दबाओ न इन्हें मेरे राजा जी … भरकर दबाओ चूसो और मसल कर रख दो.
अब मैं उसके सामने खड़े होकर उसके दूध दबा रहा था और हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे की ओर देख रहे थे.

फिर उसने मेरे खड़े लंड की तरफ देखा और बोली- जवानी तो तुम्हारी भी बहुत उबाल मार रही है विकास!
मैं- तो सम्भालो न मेरी जान इस जवानी को.

उसने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और मस्त तरीके से उससे खेलने लगी.

मैं उसकी चूचियां दबा रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी.

मैं- यार रचना, अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा. मन कर रहा है कि तुम्हारे नंगे बदन को सर से पैर तक चाट लूँ.
रचना- तो शुरू हो जाओ न विकास

मैंने उसे चाटना शुरू कर दिया और चाटते हुए उसे बिस्तर पर लिटा दिया.
मैंने उस नंगी देसी लड़की के पैर ऊपर कर दिए, तो उसकी चूत मेरे सामने थी.

मैं- रचना तुम्हारी चूत कितनी मस्त है यार इसे भी चाटने का मन कर रहा है.
रचना- विकास, को भी … आह पागलों की तरह चाटो.

मैं उसकी चूत को पागलों की तरह चाट रहा था.
रचना- विकास, मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है.

मैं- हां मेरी जान मैं भी यही चाहता हूँ.

फिर हम दोनों 69 के पोज़ में आ गए और उसने भी मेरा लंड पागलों की तरह चूसना शुरू कर दिया.

मैं- रचना यार, अब तो तुम्हें चोदने का मन कर रहा है.
रचना- हां विकास, मेरा भी मन कर रहा है कि तुम मुझे गचागच चोदो.

उसकी ऐसी बातें सुनकर मैं फटाक से बैठ गया और उसकी चूत पर अपना लंड रख दिया.
मैं बेशर्मों की तरह उसकी आखों में आखें डालकर देख रहा था.

मैंने कहा- रचना मैं बता नहीं सकता कि तुम्हें चोदने के लिए मैं कितना पागल हूँ.
रचना- मैं भी आपने अपनी चूत मरवाने के लिए पागल हुई जा रही हूँ विकास. अब तड़पाओ मत घुसा दो अपना लंड मेरी चूत में.

मैंने धक्का मारा और पूरा लंड एक बार में ही उसकी चूत में पेल दिया.
वो भी कांप गई.

मैंने उसे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया.
उसकी आहों से पूरा माहौल जबरजस्त हो गया. वो पागलों की तरह चिल्लाये जा रही थी.

रचना- आह्ह विकास उम्मंह हहह चोदो मुझे … आंह पागलों की तरह चोदो बहुत मज़ा आ रहा है यार!
मैं- रचना कितनी मस्त चूत है यार तुम्हारी … बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हारी मस्त नंगी जवानी को चोदने में!

थोड़ी देर ऐसे ही जबरदस्त चुदाई चली.
फिर उसने मुझसे कहा- विकास, जैसे ब्लू फिल्म में अलग अलग तरीके से चुदाई करते हैं, वैसे तुम भी करो न.

रचना की यह बात सुनकर तो मेरे भी रोंगटे खड़े हो गए और मैंने उससे पूछा कि उसे सबसे अच्छा तरीका कौन सा लगा?
रचना- विकास तुम मुझे अब कुतिया बना कर मेरी चुदाई करो.

इतना बोलने के बाद वो खुद ही कुतिया बन कर हो गई.
पर अब मुझे उसकी गांड दिखाई दे रही थी तो मैंने लंड वहीं टिका दिया और कहा कि जानेमन या तो तुम खुद ही मेरा लंड अपनी चूत में डाल लो या अब मैं तुम्हारी गांड मारने वाला हूँ.

तब उसने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और बोली- मारो धक्का मेरे राजा.
मैंने भी ऐसा झटका मारा कि पूरा लंड एक बार में ही उसकी चूत में उतर गया.

मैं- तुम्हारा छेद एकदम मस्त है मेरी जान, बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हें कुतिया बना कर चोदने में.
रचना- आअह विकास, अब मैं झड़ने वाली हूँ आआह विकास … मेरा पानी निकलने वाला है. पूरा दम लगा दो उहह.

मैं- रचना जानेमन मेरा भी पानी निकलने वाला है आअह्ह्ह.
हम दोनों एक साथ झड़ गए. मेरा पूरा वीर्य उसकी चूत में ही झड़ गया था.

उसके बाद तो हम दोनों ने 3 दिनों तक ग़दर चुदाई मचाई.

मेरी ये नंगी लड़की देसी कहानी आपको कैसी लगी दोस्तो, मुझे जरूर बताना.

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