बैंकॉक में मिली इक प्यारी सी लड़की

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स्वीट गर्ल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे थाईलैंड के बैंकॉक में मेरी मुलाक़ात वहीं की एक सुंदर सी लड़की से हुई. हमारी दोस्ती हुई और फिर हमारे बीच सेक्स हुआ.

यों तो थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक जाना मेरा कई बार हुआ लेकिन उस ट्रिप की बात ही अलग है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता।

यह स्वीट गर्ल सेक्स स्टोरी है आज से चार-पांच साल पहले की … तब मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ बैंकॉक गया था.
जैसे कि अधिकांशत लोग जानते होंगे थाईलैंड में गर्म गोश्त, जवानी की कमी नहीं है, और मैं भी कई बार इसका मजा ले चुका था।

हम सब दोस्त बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर शाम को उतरे.
हमारा होटल बुक था. हम सब टैक्सी लेकर सीधे होटल चले गए.

सुबह मेरे सब दोस्तों ने जवानी की राजधानी पताया जाना था. लेकिन मुझे बैंकॉक में कुछ काम था अपने व्यापार से सम्बन्धित … तो मैंने एक दिन रुक कर अगले दिन पताया जाना था.

दो दोस्तों को छोड़ कर बाक़ी सब पहली बार थाईलैंड आये थे तो उन सबको पताया पहुँचने की जल्दी थी, उन्होंने पताया की जिस्म की मंडी के बारे में काफी सुन रखा था.
सब खूब डॉलर लेकर यहाँ नंगे बदनों पर लुटाने आये थे.

वे सबह ट्रेन से पताया चले गए. मैंने अपने काम से चला गया.

लेकिन इस ट्रिप के दौरान मॉल में एक अलग ही लड़की से मिलना हुआ वो हिंदी भाषा समझ और बोल सकती थी.

जहां मुझे काम था, उन लोगों को हिंदी समझ आने का तो सवाल ही नहीं था, वे लोग अंग्रेजी भी नहीं समझ पाते थे.
तो उन्होंने एक दुभाषिया लड़की को बुला रखा था जिसे हिंदी और थाई दोनों भाषाएँ आती थी.

नाम था उसका पैंग!

उम्र रही होगी उसकी 19 साल, गोरा इकहरा बदन, शरारती आँखें, गुलाबी रसभरे होंठ!
कमसिन बलखाती कमर, टॉप से बाहर झांकते उसके उभरे हुए मम्मे किसी को भी अपनी ओर खींच सकते थे।

उस लड़की की मदद से मैंने अपनी बातचीत की और काम निपटाया.
इस पहली मुलाकात के बाद पैंग मेरी अच्छी दोस्त बन गई और उसने मुझे बैंकॉक घुमाने का वादा किया।

वो उस शाम मुझे घुमाने के बाद होटल रूम तक मुझे छोड़ने आई तो मैंने उसे कॉफ़ी के लिए रोक लिया.

उसने मुझे बताया था कि थाई भाषा में बहुत सारे शब्द हिंदी, संस्कृत से आये हुए हैं. उसने मुझे भारत में पूजे जाने वाले देवताओं की कुछ मूर्तियाँ भी दिखायी थाईलैंड में!

मैंने उससे पूछा कि तुम्हें हिंदी कैसे आती है.
तो उसने बताया कि उसे पता नहीं क्यों हिंदी और भारत से अनजाना सा लगाव है. जबकि वो कभी भारत नहीं आयी.
इसी लिए उसने हिंदी भाषा का ज्ञान अर्जित किया.

पता नहीं क्यों मुझे उसका साथ अच्छा लगने लगा था; मैं उसकी ओर खिंच सा रहा था।

जब तक कॉफी आ रही थी, वो वाश रूम गई.

थोड़ी देर में वाश रूम से उसकी आवाज़ आई.
वो मुझे बुला रही थी.

उससे शावर खुल गया था और वो बंद नहीं हो रहा था।

उसने मुझे बुलाया, जैसे ही मैंने दरवाजा खोला देखा तो वो पूरी भीगी हुई थी.
उसके बालों से पानी रिसकर उसके मम्मों के बीच में जा रहा था. उसकी अधखुली भीगी कमर और नशीली आँखों ने मुझे पागल कर दिया था.

मैंने शावर बंद करने की बजाय उसकी कमर को पकड़ उसे अपने पास खींच लिया.
मेरे छूने भर से वो सिहर गई थी.

पर आज वो भी मुझमें सिमट जाना चाहती थी.
उसने अपने रसीले गीले होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मेरे होंठों को चूसने लगी.

धीरे से उसने मेरा हाथ कमर से हटाकर अपने मम्मों पर रख दिया.

मैं भी उसके नर्म, मखमली मम्मों को दबाने लगा वो सिसकारियां भर रही थी.

उसकी सिसकारियां सुनकर मेरे लंड में भी हरकत शुरू हो गई थी.
मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसके मम्मों को चूमने लगा।

उसने मेरी पैंट का बटन खोला और अंडरवियर में से मेरे लंड को बाहर निकाल कर सहलाने लगी.
उसके हाथों की गर्मी से मेरा लंड पूरे जोश पर आ गया था।

मैंने भी उसकी ब्रा का हुक खोल दिया. अब उसके मम्मे आजाद हो चुके थे.

उसके मम्मों के गुलाबी चूचुक पूरे शवाब पर तने हुए थे.
मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया.

उसने भी मेरा सिर पकड़कर अपनी चूचियों पर भींच लिया।

उसकी चूचियां चूसते चूसते मेरा हाथ उसकी पैंटी के अंदर चला गया.
इतना भीगने के बाद भी उसकी चूत गर्म थी.

अपनी उंगली को चूत में अंदर कर उसकी गर्माहट को महसूस करने लगा.

अब उसने मेरा अंडरवियर पूरा उतार दिया था, धीरे से मैंने भी उसकी पैंटी उतार दी।

उसकी चिकनी, गोरी, गुलाबी चूत देखकर मैं बस उसे चूसते ही रहना चाहता था.

मैंने जैसे ही उसकी चूत को चूसना शुरू किया, उसकी सिसकारियां तेज हो गई थी. वो तड़प सी रही थी.
उन्हें सुनकर मेरा लंड भी अब कुछ चाहने लगा था।

हम वाशरूम से कब बेड पर आ गए पता ही नहीं चला.
अब उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया था.
तब मैं चरम पर पहुंच चुका था।

उसके हिलते हुए मम्मे और गर्म गुलाबी चूत मेरे लंड को बुला रहे थे।
उसे अपनी बांहों में लेकर मैं उसके ऊपर आ गया.

जैसे ही मैंने अपना खड़ा हुआ लंड उसकी गरम चूत पर रगड़ा वो तड़प उठी.

उसने इशारे से लंड अंदर पेलने को कहा.
मैं भी अब रुक नहीं पा रहा था, धीरे से मैंने अपना लंड उसकी चूत में धकेल दिया.

उसकी चूत बिलकुल चिकनी हो चुकी थी, पूरा लंड फिसलकर उसकी चूत में समा गया.

जोर जोर से धक्के लगाने में मुझसे ज्यादा उसे मजा आ रहा था; वो भी अपनी गांड हिला-हिलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी।

बीच-बीच में उसकी गुलाबी चूचियों को चूसते और ऐसा करते हुए तीस मिनट हो चुके थे, वो दो बार झड़ चुकी थी और मैं भी अपने अंतिम पड़ाव पर था.

पर वो थी कि मेरे लंड को आजाद ही करना नहीं चाहती थी.
मेरे पुरुषत्व ने उसकी चूत को पूरा भर दिया था.

उसके बाद भी उसकी चूत में धक्के देने से पूरे कमरे में पच-पच की आवाज गूँज रही थी।

अब शायद मैं थक चुका था तो उसे अपनी बांहों में भरकर दो घंटे ऐसे ही पड़ा रहा।

उस रात वो घर नहीं गई, उसकी जवानी का, स्वीट गर्ल सेक्स का दो बार और मजा लिया, वो भी मेरे साथ खुश थी।

फिर तो उस ट्रिप के आखिरी दिन तक उसके मम्मों और गुलाबी चूत का हर रात साथ रहा.
मैं पताया गया ही नहीं … दोस्तों को मेसेज करके मैंने अपने ना आने के बारे में बता दिया था.

वापिसी की फ्लाइट वाले दिन ही मैं अपने दोस्तों से एअरपोर्ट पर मिला.
स्वीट गर्ल पैंग भी मुझे एअरपोर्ट छोड़ने आयी थी.

मेरा लंड आज भी उसकी के लिए तड़प उठता है।

प्रिय पाठको, मुझे आशा है कि आपको इस छोटी सी लेकिन रोमांटिक कहानी में मजा अवश्य आया होगा.
मेरी स्वीट गर्ल सेक्स स्टोरी पढ़ने के लिए धन्यवाद.
ज्योतिराम

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