बुआ के लड़के से मेरी बुर चुदाई

Family Sex Stories

कज़िन सिस्टर चुदाई कहानी में पढ़ें कि कैसे मैं अपनी बुआ के बेटे की ओर आकर्षित हुई. कैसे वो हमारे घर आया और हमें अकेले रहने का मौक़ा मिला.

दोस्तो, कैसे हो आप सब! मेरा नाम अंजू है.

इस पटल पर यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. यह कज़िन सिस्टर चुदाई कहानी तब की है जब मैं कॉलेज के सेकंड ईयर में थी.

उन दिनों मैं अपनी बुआ की लड़की की शादी में गई थी. वहां मेरी मुलाकात मेरे बुआ के लड़के से हुई जो विदेश रहता था मगर भारत आया हुआ था.
उसका नाम नरेन्द्र था.

यह हमारी पहली मुलाकात थी.

पता नहीं क्यों … उसको देखते ही मुझे कुछ अजीब से फीलिंग होने लगी और जहां तक मुझे लगता है, उसको भी वैसी ही फीलिंग हो रही थी.

उधर मुझे कुछ दिन रहना था, तो रोज ही नरेंद्र से मुलाक़ात होती थी.
मेरी उससे बातचीत भी होने लगी थी. हमारे बीच कुछ मधुर और आत्मीय सम्बन्ध से बन गए थे.

मुझे जब भी कोई बाजार का काम होता तो मैं उससे ही कहती और वो भी मेरे कहने पर हमेशा तैयार रहता.

ऐसी ही नजरों से मन की बात करते हुए बुआ की लड़की की शादी कब हो गई, पता ही नहीं चला.

शादी के अगले दिन जब मैं वापस घर आ रही थी तो उसने मुझे अपना फोन नम्बर दिया और बात करने को बोला.

वहां से निकल कर घर आने तक सिर्फ मैं उसके बारे में ही सोचती रही.

जब मैं घर आई तो आते ही उसको मैसेज कर दिया.
तो उसने भी रिप्लाई कर दिया.
ऐसे ही हमारी बातें होने लगीं.

कुछ दिन बाद उसने मुझसे कहा- मुझे तुमसे मिलना है.
मैंने उसको घर बुला लिया.

जब वह मेरे घर आया तो मेरे घरवाले भी उसको देख कर बहुत खुश हुए.

शाम को जब वह वापस जाने लगा तो मेरे मम्मी पापा ने कहा- तुम कुछ दिन यहीं रुक ज़ाओ.
क्योंकि मम्मी पापा को किसी शादी में जाना था और मेरे प्रेक्टिकल चल रहे थे जिस कारण से मैं मम्मी पापा के साथ नहीं जा रही थी.

ये सारी परिस्थियों को देख कर नरेन्द्र मेरे घर पर रुकने को मान गया.

अगले दिन पापा और मम्मी शादी में चले गए और मैं कॉलेज चली गई.

जब मैं कॉलेज से घर आई, तो उसने मेरे लिए चाय बनाई.
उसके बाद उसने मुझे घर के कामों में हेल्प भी करवाई.

रात को खाने के बाद हम दोनों जब साथ बैठ कर टीवी देख रहे थे तो वह मुझसे बोला- मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ.
मैंने कहा- हां बोलो.
वह बोला- मैं तुमसे प्यार करता हूँ.

यह सुनते ही मेरे दिल की धड़कन तेज होने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरा चेहरा ऊपर करके मुझसे बोला- आई लव यू अंजू. मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.
ये कह कर उसने मुझे गाल पर चूम लिया.

मैंने शर्म से अपना चेहरा नीचे कर लिया.

इससे पहले आज तक किसी ने मुझे छुआ तक नहीं था पर मैं उसको दूर नहीं कर पाई.
आखिर प्यार तो मुझे भी उससे था … पर मैं बोल नहीं पा रही थी.
बस अपनी हामी में मैं अपनी आंखें बन्द करके उसके साथ बैठी रही.

कुछ देर बाद वह खड़ा हुआ और टीवी बन्द करके मुझसे बोला- चलो सोते हैं.

मैंने भी हामी भर दी और हम दोनों अलग अलग रूम में सोने चले गए.

पर उससे अलग होकर मुझे नींद नहीं आ रही थी.

लगभग 30 मिनट बाद उसका मैसेज आया- सो गई?
मैंने जवाब दिया- नहीं, नींद ही नहीं आ रही है.
उसने कहा कि मुझको भी नहीं आ रही है.

मैंने लिखा- क्यों?
वो बोला- पता नहीं … आज कुछ दिल बेचैन सा है.

मैंने समझ लिया कि उसकी हालत भी मेरे जैसी ही हो रही है.

तब भी मैंने लिखा- किस तरह की बेचैनी है?
वो बोला- वो छोड़ो … तुम बताओ तुम्हें नींद क्यों नहीं आ रही है?

मैंने लिखा- समझ ही नहीं आ रहा है. आज कुछ अलग सा लग रहा है.
उसने एक स्माइली भेज कर लिखा- क्या अलग सा लग रहा है?

मैंने लिखा- शायद जो बेचैनी तुम्हें हो रही है … उसी तरह से मुझे भी कुछ हो रही है.
अब वो बोला- क्या तुम्हारे कमरे में आ सकता हूँ.

मैंने भी हां बोल दिया.

मेरे कमरे में एक सिंगल बेड ही है.

जब वह मेरे कमरे में आया, तो आकर बैठ गया … पर सर्दी का सीजन था, तो मैंने उसको मेरी रजाई में आने को कह दिया.
अब हम दोनों एक ही रजाई में आ गए थे.

कुछ देर बाद उसने अपने एक हाथ को मेरी कमर में डाला और मुझे अपनी ओर खींच लिया.

मैं उस अप्रत्याशित झट के से एकदम से उसकी बांहों पूरी समा गई.
मुझे उसका ये झटके से खींचना अच्छा लगा और मैंने कोई विरोध नहीं किया.
मैं तो न जाने कब से उसके इस एक्शन की प्रतीक्षा में थी.

उसके सीने से लगते ही मेरी सांसें भारी होने लगीं और मेरी चूचियां उसके सीने में गड़ने लगीं.
उसके चौड़े सीने से मुझे मेरे मम्मों में एक अजीब सी हलचल सी मचने लगी.

तभी उसने मुझे धीरे धीरे किस करना शुरू कर दिया.
उसके होंठ मेरे होंठों पर लग गए.

आह … उसके गर्म होंठ जब मेरे गर्म होंठों से जुड़े तो मैं लरज कर रह गई.
उसके होंठों ने मेरे होंठों को चुभलाना शुरू कर दिया था जिसमें मैं भी उसका साथ देने लगी थी.

हम दोनों की चूमाचाटी जोर पकड़ने लगी और तभी उसने अपने एक हाथ से मेरे दोनों गाल पकड़ कर दबा दिए तो मेरा मुँह खुल गया.
उसी पल उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और वो अहसास आह … कितना मीठा था, मैं शब्दों में बयान ही नहीं कर पा रही हूँ.
उसकी जीभ ने मेरी जीभ को अपनी गर्लग्रेंड बना लिया था.

हम दोनों एक दूसरे की जीभ का स्वाद लेने लगे और लार को चूसने लगे.
गर्म सांसों का झंझावात हम दोनों को वासना की आग में झुलसाने लगा था.

इस वक्त मेरी तो एक समाधि की सी स्थिति बन गई थी.
शायद ऐसा ही नरेंद्र को भी लग रहा होगा.

फिर कुछ पल बाद उसने मेरे होंठों को आजादी दे दी और मुझे हाथ का सहारा देकर बिठा लिया.
मैं एक कठपुतली की तरह बैठ गई और उसके अगले एक्शन का इंतजार करने लगी.

उसने मेरी आंखों में देखा और मानो एक जादू सा कर दिया.
मैं बस उसकी आंखों में खो सी गई थी.

तभी उसका एक हाथ आगे बढ़ा और उसने मेरी एक चूची को पकड़ कर दबा दिया.
मेरी मीठी सी आह निकल गई और मैं फिर से उसकी बांहों में समा गई.

उसने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए मेरे कान में कहा- चलो कपड़े उतारते हैं.
मैंने हां कह दी.

उसने एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए, साथ में अपने कपड़े भी निकाल दिए.

अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे थे.

सर्दी अपनी औकात में आ गई थी, उसे दो गर्म प्रेमियों के सामने हार माननी पड़ी.
हम दोनों निवस्त्र हो चुके थे … पर सर्दी के अहसास का नामोनिशान तक नहीं था.

उसने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और मेरी चुचियों को दबाते हुए एक निप्पल को होंठों में दबा कर चूमने चूसने लगा.

आह … मेरी तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई थी; मैं अपने आपको बहुत मुश्किल से संभाल पा रही थी.

कुछ देर तक उसने मेरे दोनों दूध दबा दबा कर पिए और मसले.
मुझे अपनी चूचियों को चुसवाने में बड़ा आनन्द आ रहा था.
मैं मीठी सीत्कार करती हुई उसे अपने निप्पल पकड़ कर चुसा रही थी.

फिर उसने मुझे पीठ के बल लिटा दिया और खुद नीचे को सरक गया.
वो मेरी चूत को सूंघने लगा.

उसकी गर्म सांसों ने जैसे ही मेरी चूत को छुआ, मेरा तो बहुत बुरा हाल हो गया था.
तभी उसने अपनी जीभ से मेरी चूत की दरार को चाटा … आह मेरी सिसकारी निकल गई- आह नरेंद्र … उई मां … क्या कर रहे हो … आह मर गई मैं!

मैं जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.

उसने मेरी कामुक आवाजें सुनी तो जैसे उसे जोश चढ़ गया और वो मेरी दोनों टांगों को फैला कर मेरी पूरी चूत की मां चोदने लगा.
चूत के अन्दर तक जीभ को पेल कर मेरी रिसती हुई चूत का स्वाद लेने लगा.
बीच बीच में नरेंद्र मेरी चूत के दाने को अपने होंठों से दबा कर खींचता तो मेरी गांड खुद ब खुद ऊपर को उठ जाती.

कुछ देर यूं ही मेरी चूत चाटने के बाद उसने अलग होकर मुझे देखा.
मेरे चेहरे पर एक गुस्से का सा भाव था कि चूत को चाटना क्यों छोड़ा.

उसने मेरी बात को शायद समझ लिया था और जवाब में उसने अपने मोटे लम्बे लंड को हाथ से मुठिया कर मुझे आश्वस्त किया कि बना कर ही रहूँगा.

उसने अपने टनटनाते लौड़े पर तेल लगाना शुरू कर दिया.
फिर उसने मेरी चूत पर भी तेल लगा दिया.

मैं समझ गई थी कि अब चूत की सील टूटने का वक्त आ गया है.
मुझे अन्दर से बड़ी उत्तेजना हो रही थी कि सहेलियों की बात आज सच होने जा रही है, जब मेरी चूत में लंड अन्दर जाने वाला है.

इसी बीच नरेंद्र अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा.
उसके गर्म सुपारे से मेरी हालत खराब हो गई और मैंने उससे कहा- अब देर न करो नरेंद्र … जल्दी से कुछ करो.

बस मेरा इतना कहना था और उसने अपने लंड मेरी चूत की फांकों में फंसा कर एक जोर का धक्का लगा दिया.

आह … उसका लंड चूत में क्या घुसा … मानो मेरी तो जान ही निकल गई थी.

मैं तड़फ उठी थी और चीखने ही वाली थी कि नरेंद्र ने अपने होंठों का ढक्कन मेरे होंठों पर कस दिया.
मेरी चीख निकलने से पहले ही दब गई.

फिर उसने मेरे बोबों को दबाना शुरू कर दिया.
ऐसे ही उसने कुछ मिनट तक किया.

और जब मेरा दर्द कम हुआ, तो उसने धक्के मारने शुरू कर दिए.

कुछ देर बाद मुझे भी लंड के प्रहार अच्छे लगने लगे और मैं उसके नीचे दब कर पिसती रही.

वो करीब 20 मिनट तक मुझे ताबड़तोड़ चोदता रहा. इस बीच मैं दो बार झड़ गई थी.

फिर उसने अपना पानी मेरे अन्दर ही छोड़ दिया.

ऐसे ही उस रात उसने मुझे 2 बार ओर चोदा.

अगली सुबह जब मैं उठी तो मुझसे उठा भी नहीं गया.
उसने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और बाथरूम में ले जाकर मेरी चूत की गर्म पानी से सिकाई की.

उसके बाद उसने ही मुझे नहलाया और फिर से कमरे में लाकर लिटा दिया.

बिस्तर पर आते ही मुझे नींद आ गई.
और जब उठी तो 1 बज रहा था.

मैं उठी … और बाहर जाकर देखा तो उसने खाना बना लिया था और मुझे उठाने ही आ रहा था.

फिर हमने साथ बैठ कर खाना खाया और टीवी देखने लगे.

अगले 2 दिन तक, जब तक मेरे घरवाले वापस नहीं आ गए, उसने मुझे बहुत प्यार किया. घर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था, जहां उसने मुझे न चोदा हो.

आज हमारे रिश्ते को बने 4 साल हो गए हैं. वो विदेश से वापस अब भारत में यहीं मेरे शहर में रहने लगा है.

जब हम दोनों का मिलने का मन करता है तो या तो वो मेरे घर आ जाता है या मैं उसके घर चली जाती हूँ और हम दोनों जम कर चुदाई का मजा लेते हैं.

मैं आशा करती हूँ कि आपको मेरी कज़िन सिस्टर चुदाई कहानी अच्छी लगी होगी. कोई गलती हुई हो … तो माफ कर देना..

आपकी रिया वर्मा. मेरी इस सेक्स कहानी के लिए आपके कोई सुझाव हों, तो मेरी मेल आईडी पर मेल कर सकते हैं.

Related Posts

Leave a Reply

DMCA Notice: RedHotStories.com respects the intellectual property rights of others and complies with the Digital Millennium Copyright Act (DMCA). If you believe that any content on this website infringes upon your copyright, please send a detailed notice to admin@redhotstories.com including: (1) your contact information, (2) a description of the copyrighted work you claim has been infringed, (3) the exact URL(s) of the allegedly infringing material, (4) a statement that you have a good faith belief that use of the material is not authorized by the copyright owner, and (5) a statement made under penalty of perjury that the information in your notice is accurate and that you are authorized to act on behalf of the copyright owner. Upon receiving a valid DMCA request, we will review and remove the infringing content promptly.