फ्री सेक्स कहानी की पाठिका की इच्छा पूरी हुई- 2

Antarvasna

सेक्सी भाभी वांट फक़ … और वो मेरे साथ मजे लेने के लिए मेरे होटल के कमरे में आ गयी. जल्दी ही हमारे कपड़े उतरने लगे. लेकिन तभी रूम की डोर बेल बज गयी.

कहानी के पहले भाग

में आपने पढ़ा कि मेरी एक पाठिका से दोस्ती हुई और मैं उससे मिलने उसके शहर पहुँच गया. वो मुझसे मिलने मेरे होटल के कमरे में आ गयी.

अब आगे सेक्सी भाभी वांट फक़:

ये सुन कर अंजलि समझ गई कि मैं क्या बोलना चाह रहा हूँ।
अंजलि मेरे सामने आकर अपने घुटनों पर बैठकर मेरी अंडरवीयर के इलास्टिक को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगी.

मेरी चड्डी जांघों तक आ गई और मेरा 6 इंच लम्बा लण्ड अंजलि के मुँह के सामने 90 डिग्री पर सलामी मारने लगा।

अंजलि ने प्यार से मेरे लण्ड को जैसे ही अपने कोमल हाथों से पकड़ा तो ऐसा लगा कि अभी मेरा पूरा लावा अंजलि के मुँह पर ही गिर जाएगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
वो इसलिए कि मेरे पेग इस टाइम काम आ गए।

अब अंजलि मेरे लण्ड को सहलाने लगी, आगे पीछे करने लगी और दूसरे हाथ से मेरे लण्ड के दोनों साथियों को भी सहलाने लगी।

अब मुझ से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था।
मैंने अंजलि को लण्ड को मुँह में लेने को बोला.
तो उसने मना कर दिया, बोली- ये नहीं हो पायेगा।

‘कोई नहीं!’ बोल के मैंने अंजलि के दोनों हाथों को पकड़ के उठाया और बोला- चलो अब बेड पर चलते हैं।
और अंजलि को बेड पर जाने का इशारा किया.

तो वो बेड की तरफ चलने लगी.

मेरी नज़र उसकी ब्लैक कलर की पैंटी से निकलती हुई मोटी गांड पर ही थी।
उसकी गांड बिल्कुल गोल गोल शेप में थी।

चलते एक चपत उसके चूतड़ पर मैंने जोर से लगा दी।
आहह हह की एक जोरदार आवाज आई और वो मेरी तरफ देख के मुस्कुरा के बेड पर जाने लगी।

मैंने अंजलि को बोला- मैं अभी वाशरूम होकर आता हूँ।
कह कर अपनी अंडरवीयर को पूरा निकाल के नंगा ही वाशरूम चला गया.

वाशरूम से आकर मैंने एक 60 एम एल ऑन दी रॉक पेग बना कर बॉटम अप कर दिया और अंजलि की तरफ जाने लगा.

मैं बेड के बिल्कुल सामने था जहाँ पर अंजलि पिलो लगा कर लेटी हुई थी।
उसकी पैंटी के बीच का हिस्सा डबलरोटी की तरहा फूला हुआ अलग ही दिख रहा था। उसकी नंगी गोरी गोरी जांघें ट्यूबलाइट की रोशनी की तरह से चमक रही थी।

मैं बेड पर चढ़ गया और अंजलि के होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
एक अच्छा सा किस करने के बाद अपना मुंह अंजलि के दोनों बूब्स के बीच में डाल कर एक एक निप्पल के आस पास अपनी जीभ फेरने लगा।
फिर एक निप्पल को मुँह में लेकर बच्चे की तरह उसको चूसने लगा और दूसरे हाथ से दूसरे बूब की सहलाने लगा।

अंजलि अपनी आंखें बंद कर के लंबी लंबी सांसें लेने लगी।

तकरीबन 2 से 3 मिनट बूब्स के साथ खेलने के बाद मैं नीचे की तरफ आया और अपनी जीभ और होंठ से उसके पेट को चाटने लगा।
फिर धीरे धीरे अपना मुँह अंजलि की पैंटी के ऊपर रख दिया और पैंटी के ऊपर से ही अपनी जीभ फेरने लगा।

अब अंजलि लंबी लंबी सिसकारियां भरने लगी।

तभी मेरे रूम की डोर बैल बजी.
हम दोनों चौंक गए कि इस टाइम कौन आ गया।

मैंने आवाज़ लगाकर के पूछा- कौन है?
तो आवाज़ आई- मैं हूँ राजवीर, दरवाजा खोल यार!

मैंने अंजलि को बोला- तुम बाथरूम में चली जाओ, मैं इसको देखता हूँ।
अंजलि ने अपने कपड़े लिए और बाथरूम में चली गई.

मैंने अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया।
राजवीर बोला- इतना टाइम क्यों लगा दिया दरवाजा खोलने में? क्या कर रहा था इतने देर से?
मैं बोला- यार कुछ नहीं, मैं सो रहा था।

राजवीर मेरे शार्ट की तरफ देख कर बोला- देखकर नहीं लग रहा है कि तू सो रहा था।
उसको मेरा खड़ा हुआ लण्ड शॉर्ट में साफ दिख रहा था।

फिर हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा दिए।
मैंने राजवीर को पूछा- तू तो रात तक आने वाला था, इतनी जल्दी कैसे आ गया?
राजवीर बोला- मीटिंग कैंसिल हो गई तो वापस आ गया।

वो सोफे पर बैठ गया और स्कॉच की बोतल देख कर बोला- अकेला अकेला ही लगा हुआ है।
और एक ग्लास लेकर अपना पेग बना लिया।

अब मुझे लगा कि राजवीर तो जाने से रहा … क्यों ना अब इसको सारी सच्चाई बता दी जाए।
मैंने राजवीर को सब कुछ बता दिया अंजलि के बारे में!

तो राजवीर बोला- अभी कहाँ है वो?
मैंने बोला- बाथरूम में है।

राजवीर बोला- उसको बुला ले बाहर! तुम दोनों एन्जॉय करो, मैं फ्रेश होकर बाहर चला जाऊंगा।

फिर मैंने अंजलि को आवाज लगाई- बाहर आ जाओ, राजवीर जाने वाला है।
इतना बोलते ही अंजलि बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर आ गयी.

मैंने देखा कि अंजलि ने अपने कपड़े नहीं पहने थे, वो अभी भी सिर्फ पैंटी में ही थी।
वो अपने कपड़ों से अपने बदन को छुपा रही थी.

आगे से तो सिर्फ उसकी नंगी जांघें दिख रही थी और पीछे से उसकी गोल गोल गांड साफ दिख रही थी।

मेरी और राजवीर की नज़र उसकी गांड पर ही थी.

वो हमारे सामने से होती हुई बेड पर चली गई और चादर ओढ़ कर लेट गई।

राजवीर ने अपना पेग खत्म किया और बोला- तुम एन्जॉय करो, मैं फ्रेश होकर चला जाऊंगा, तुम को डिस्टर्ब नहीं करूँगा।
कह के राजवीर बाथरूम में घुस गया और दरवाजा बंद कर लिया।

अब मुझ से भी नहीं रहा जा रहा था, मैं बेड पर आ गया और अंजलि की चादर को खींच कर उसके बदन से अलग कर दिया।
फिर मैंने अपने कपड़े उतार के फेंक दिए और पूरा नंगा हो गया।

मैं सीधा अंजलि के पास आ गया, उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़ के मसलने लगा और बीच बीच में दोनों निप्पलों को मुँह में लेकर चूसने लगा।
फिर मैं धीरे से नीचे की तरफ आया और उसकी पैंटी के इलास्टिक के दोनों साइड में अपनी उंगली डाल कर नीचे खींचने लगा।

कुछ ही क्षणों में अंजलि पूरी तरह से नंगी हो गई और उसकी क्लीन शेव की हुई चूत की दरार साफ दिखने लगी।

मैंने अपने एक हाथ से उसकी चूत की दरार को खोल के चूत का जायजा लेते हुए अपना मुँह उसकी चूत में घुसा दिया और अपनी जीभ को अंदर डाल कर आगे पीछे करने लगा।

ऐसा करने से अंजलि जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी। शी वांट फक़.
वह अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत में घुसाने लगी।

2-3 मिनट तक ऐसे करने के बाद मुझे लगा कि अब चूत पानी छोड़ने वाली है तो अपना मुंह बाहर निकाल लिया।

अब मेरे से भी रहा नहीं जा रहा था तो मैंने एक तकिया गांड के नीचे लगाया और उसकी दोनों टांगों को चौड़ा किया और अपने लण्ड को उसकी चूत के ऊपर रख कर आगे पीछे करने लगा।
अंजलि बोली- सनी अब बस भी करो … प्लीज डाल दो ना अंदर! अब रहा नहीं जा रहा है।

ये सुनते ही मैंने कहा- ले साली रंडी!
और अपना पूरा लण्ड एक ही बार में अंदर तक घुसा दिया.
उसके मुंह से एक हल्की सी आह निकली.

फिर मैंने भी झटके देना स्टार्ट कर दिया और उसको पूरे जोश में चोदने लगा।
उसके मुँह से आह आह आह आह की आवाजें निकलने लगी.

कुछ ही देर में कमरे में अंजलि की सिसकारियां गूंजने लगी।
चुदाई के इस माहौल में हम दोनों ये भूल गए कि मेरा एक दोस्त अभी भी कमरे में ही है।

करीब 10 मिनट तक इसी पोज़ में चोदने के बाद मैंने अंजलि को बोला- अब डॉगी स्टाइल में करूँगा।

अंजलि अपनी मोटी सी गांड उठा कर घोड़ी बन गई।
वाह क्या सीन था … मस्त मोटी मोटी गोरी गांड मेरे सामने थी।

मैंने भी 2 चपत उसकी गांड पर लगा दी और अपना लण्ड उसकी चूत में डाल कर उसके बाल पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा।

अंजलि भी अपना मुँह बिस्तर में दबा के सिसकारियां लेने लगी।
तभी मेरी नजर सोफे पर पड़ी.

मैंने देखा कि राजवीर सोफे पर चुपचाप बैठा हुआ हमारी लाइव चुदाई देख रहा है और अपनी पैन्ट की ज़िप खोल के लण्ड को बाहर निकाल कर हिला रहा है।

मैं बोला- भोसड़ी के, क्या कर रहा है ये?
वो बोला- तुम्हारी चुदाई देख के रहा नहीं गया यार … मेरा भी मन कर रहा है।

मैं बोला- मेरा हो जाये तो तू भी कर लेना।
राजवीर बोला- इतना टाइम नहीं है. अब नहीं रहा जा रहा है मुझसे!

कह कर वो अपने कपड़े उतारने लगा।

और जैसे ही उसने अपनी अंडरवियर निकाली, मैं तो साले का लण्ड देखता ही रह गया. पूरा 7 इंच जितना लंबा और 2 इंच मोटा लग रहा था।
मुझे लगा कि ये तो अंजलि को मार ही डालेगा।

अब राजवीर भी हमारे पास आ गया और अंजलि के बालों से मेरा हाथ हटा कर उसके बाल पकड़ के सर को ऊपर उठाया और उसके मुँह में अपना लण्ड घुसाने लगा।

अब मैं अंजलि की कमर को पकड़ के जोर जोर से चोदने लगा और आगे से राजवीर अपना लंड उसके मुँह में आगे पीछे करने लगा।

मैं सोचने लगा कि जब मैंने बोला तो मेरा मुँह में नहीं लिया अब राजवीर का कैसे ले रही है।
बाद में मुझे अंजलि ने बताया था कि उस टाइम वो इतनी गर्म हो गई थी कि उसको पता ही नहीं चल रहा था कि वो लण्ड को मुँह में ले रही है। उसको तो बस यही लग रहा था कि चुदाई करवा लूं हर तरीके से आज तो!

कुछ देर तक ऐसे ही चुदाई करते करते अंजलि के मुँह से एक जोरदार आहह निकली और उसके पैर कांपने लगे. उसकी चूत से पानी छूट गया।
मैंने भी अपना लंड बाहर निकाल लिया और राजवीर ने भी निकाल लिया अंजलि मुँह के बल ही बेड पर लेट गई।

मैं राजवीर को बोला- अब तू कर ले, मैं कुछ रेस्ट लेता हूँ.
बोल के मैं सोफे पर आ गया और एक पेग बना कर लेने लगा।

करीब 10 मिनट बाद अंजलि भी नार्मल हो गई.
राजवीर ने उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत के ऊपर अपना लण्ड रगड़ने लगा।

कुछ ही देर में एक झटका दिया उसने … अंजलि की चीख़ सी निकल पड़ी.
मैं समझ गया कि साले का घोड़े जैसा लण्ड है।

कुछ देर में अंजलि के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी और वो मजे से चुदवाने लगी।

फिर कुछ ही देर बाद राजवीर बेड पर लेट गया और अंजलि को बोला- ऊपर आ जा!
अब अंजलि राजवीर के लण्ड के ऊपर बैठ कर चुदाई का मजे लेने लगी।

मेरी नजर अंजलि की गांड पर थी और कुछ ही देर में मेरा लण्ड सलामी मारने लगा।

मैं उठा और अपने लण्ड पर नारियल का तेल लगाने लगा।
लंड को तेल से गीला कर अंजलि के पास पहुंच गया।

मैंने अंजलि को पीठ से दबा के राजवीर के सीने से मिला दिया और राजवीर ने अपने दोनों हाथों से अंजलि को पकड़ लिया।

अब मैंने अपना लण्ड अंजलि की गांड से सटा दिया.
तो अंजलि भी समझ गई थी कि सेन्डविच चुदाई होने वाली है।

मैंने जोर लगाना शुरू किया तो अंजलि के मुँह से एक जोरदर सी चीख निकल पड़ी और मेरा आधा लण्ड अंजलि की गांड में घुस गया।
फिर मैंने एक जोदार झटका दिया तो मेरा पूरा लंड अंजलि की गांड में घुस गया।

इस बार अंजलि के मुंह से अच्छी वाली चीख़ निकल पड़ी।
लेकिन अब तक दोनों छेदों में लण्ड जा चुके थे।

फिर धीरे धीरे हम दोनों ने एक साथ अंजलि को चोदना शुरू किया।

अब धीरे धीरे अंजलि को भी मजा आने लगा और जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी।

वैसे सच कहूं तो सेन्डविच चुदाई का मजा ही कुछ और होता है. इस मजे को सिर्फ वो ही समझ सकते हैं जिन्होंने सेन्डविच सेक्स किया है।

अब हम तीनों एक सेक्स के अलग से नशे में डूबे हुए अपनी मंजिल के करीब कब पहुंच गए, पता ही नहीं चला।

मेरा शरीर अकड़ने को हुआ तो एक जोरदार झटके के आह आह आह करता हुआ अंजलि को पीछे से कस के पकड़ कर सारा माल अंजलि की गांड में भर दिया और अंजलि की पीठ पर सर रख के चित हो गया।

मैं अपना लण्ड अंजलि की गांड से बाहर निकाल के साइड में ही लेट गया।

फिर राजवीर ने अंजलि को सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ कर अंजलि की चूत में अपना 7 इंच के लण्ड से जोर जोर से चोदने लगा।
ये देख कर ऐसा लग रहा था कि कोई पोर्न मूवी मेरे सामने चल रही हो।

अंजलि के मुँह की सिसकारियों और आह हहह आहहह हहह की आवाजों से कमरा गूंजने लगा।

कुछ ही देर बाद दोनों के मुँह से एक लंबी सी आह निकली.
मैं समझ गया कि दोनों का भी हो गया।

और राजवीर अंजलि के ऊपर निढाल सा पड़ गया।

कुछ देर बाद दोनों अलग हुए तो मैंने अंजलि की तरफ देखा और पूछा- कैसा रहा आज का एक्सपेरियन्स?
अंजलि मुस्कुरा कर बोली- ऑसम … मजा आ गया आज तो सच में! कब से मैं ऐसा सेक्स करना चाह रही थी. आज तुम दोनों ने मेरी ये इच्छा भी पूरी कर दी।
ये बोल कर अंजलि अपनी आंखें बंद कर के लेट गई।

तो ये थी मेरी पाठिका की इच्छा हुई पूरी कहानी।
आप सबको मेरी सेक्सी भाभी वांट फक़ कहानी कैसी लगी?
प्लीज मुझे मेल और कमेंट्स में जरूर बताएं।

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