जवान लड़की का दर्द चूत चुदाई से मिटा

Antarvasna

Xxx दूधवाली सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं एक घर में दूध लेने जाता था. वहां एक जवान लड़की थी. उससे मेरी पहचान कैसे हुई और कैसे मैंने उसे चोदा?

दोस्तो, कैसे हो.
आपने मेरी पिछली कहानी
तलाकशुदा लड़की ने मम्मी पापा के घर में चुत चुदाईhttps://www.freesexkahani.com/indian-sex-stories/divorcee-sex-kahani/
पसंद की. धन्यवाद.

मैं आपके लिए अपनी एक Xxx दूधवाली सेक्स कहानी लेकर आया हूँ. आपको जरूर पसंद आएगी.

पहले आप मेरे बारे में थोड़ा सा जान लीजिए. मेरा नाम रियांश सिंह है. मेरी उम्र 24 वर्ष है. मैं एक आर्किटेक्ट हूँ और भोपाल में रहता हूं.

ये बात लॉक डाउन की है.
लॉक डाउन में मुझे वर्क फ्रॉम होम मिल गया था तो घर का सारा काम ही मुझे करना पड़ता था क्योंकि कोविड के डर से कामवाली बाई वगैरह को हटा दिया था.

सारे काम के साथ साथ डेरी से दूध लाने का काम भी मेरे हिस्से में आ गया था.
यह काम मुझे बहुत खराब लगता था क्योंकि वहां बहुत सारी लेडीज आती थीं और ना जाने क्या क्या बेमतलब की बात करती रहती थीं.
उनकी बातों से मैं पक जाता था.

पर क्या करता, इस बार वर्क फ्रॉम होम के साथ ये काम भी मेरे हिस्से में आ गया था.

आज मेरा दूध लेने जाने का पहला ही दिन था.
हमने अपना दूध डेरी वाला बदल लिया था तो शाम 4 बजे मैं दूध लेने गया.

मैं जैसे ही वहां पहुंचा तो देखा एक आदमी भैंस से दूध निकाल रहा था.

मैं जैसे ही वहां पहुंचा, तो उन्होंने मुझे देखा और बोले- तुम कौन?
मैंने कहा- मैं सिंह साहब का लड़का हूँ.

उन्होंने कहा- तुम बाहर नौकरी करते हो, वही हो न!
मैंने कहा- हां, अभी ये कोविड के कारण वर्क फ्रॉम होम चल रहा है.

ऐसे ही बातचीत में पता ही नहीं चला कि कब दूध निकल गया. उन्होंने मुझे दूध माप कर दे दिया और मैं घर आ गया.

जब मैं अगले दिन दूध लेने गया तो मैंने देखा कि एक सांवली सी लड़की दूध निकाल रही थी.
मैंने देखा तो मुझे थोड़ा अजीब लगा.

वो मुझे देखते ही बोली- आज पापा नहीं है, उन्होंने कहा था कि सिंह साहब का बेटा आएगा, तो उसे दूध दे देना.
मैंने कहा- हां वही, मैं तुम्हें देख कर थोड़ा अचंभित हो गया. मैंने किसी लड़की को दूध निकालते नहीं देखा.

उसने कहा- क्यों … क्या सिर्फ आदमी दूध निकाल सकते हैं!
मैंने कहा- नहीं नहीं, बस देखा नहीं कभी.

फिर बातों बातों में पता नहीं चला कब उस लड़की ने दूध निकाल लिया.
वो बाल्टी लेकर उठी तो वहीं पास पड़े गोबर से फिसल गयी.

वो पिछवाड़े के बल गिरी थी तो थप से आवाज आयी. लेकिन बाल्टी खड़ी गिरी, तो दूध नहीं फैला.
मैं आगे उसकी साइड बढ़ा और उसका हाथ पकड़ कर उसे उठा कर पास वाले चबूतरे पर बैठा दिया.

मैंने पूछा- लगी तो नहीं?
उसने कहा- नहीं नहीं बस ऐसे ही … कुछ नहीं हुआ.

मैंने कहा- अगर ज्यादा दिक्कत हो तो मूव स्प्रे लगा लेना.
वो बोली- हां ठीक है, लेकिन स्प्रे तो है नहीं … और पापा मम्मी शादी में गए हैं. वो 2-3 दिन बाद आएंगे.

मैंने कहा- मैं अभी दे जाऊंगा, मेरे घर पर रखा है.
वो मना करने लगी- अरे ऐसी कोई बात नहीं है, सब ठीक है, तुम परेशान ना हो.

मैं बोला- अरे परेशान होने वाली बात नहीं है. अंदरूनी दर्द बड़ा खराब होता है. तुम दूध माप कर रखो, मैं अभी आता हूँ.

मैं घर आया और अपने रूम से स्प्रे और पेन किलर लेकर वापिस दूध डेरी पर चला गया.

जब मैं वहां पहुंचा तब तक वो दूध माप चुकी थी.
मैंने उसे स्प्रे दिया और टैबलेट देकर कहा- अगर दर्द ज्यादा हो, तो खा लेना.
उसने थैंक्यू कहा.

मैंने कहा- थैंक्यू की जगह चाय पिला दो.
उसने कहा- अरे आओ आओ … ऐसी क्या बात है.

मैंने कहा- अरे, मैं ऐसे ही मजाक कर रहा था.
वो बोली- अरे आ जाओ न … मैं अपने लिए वैसे भी चाय बनाने वाली थी.

मैं ज्यादा भाव ना खाते हुए उसके घर में अन्दर आ गया और सोफे पर बैठ गया.
वो चाय बनाने के लिए किचन में चली गयी.

किचन रूम के सामने ही था.
मैं बैठा था तो अन्दर का नजारा साफ़ दिखाई दे रहा था.

वो अन्दर से बोली- आपने मेरी हेल्प की और मैं आपके लिए चाय भी बना रही हूँ. लेकिन मैंने अब तक आप का नाम तक नहीं पूछा.
मैंने कहा- मेरा नाम रियांश है और आप का?

वो बोली- मेरा नाम मीनाक्षी है.
मैंने कहा- नाम तो बड़ा अच्छा है तुम्हारा. तुम वैसे करती क्या हो?

मीनाक्षी- मैंने बी.कॉम किया है और मेरे लिए घर वाले रिश्ता देख रहे हैं.
मैंने कहा- इतनी जल्दी … ये उम्र तो बॉयफ्रेंड बनाने की है.
वो हंसने लगी- उम्र तो किसी चीज की नहीं होती.

इतने मैं उसकी चाय बन गयी और वो चाय ट्रे में लेकर आ गयी.
जैसे ही उसने चाय की ट्रे टेबल पर रखी तो एकदम से आह की आवाज निकल गयी.

मैंने कहा- क्या हुआ?
वो कहने लगी- दर्द हो रहा है.

मैंने कहा- स्प्रे लगा लो.
वो बोली- हां थोड़ी देर से लगा लेती हूँ.

फिर वो मेरे पास वाली कुर्सी पर बैठ गयी और हम दोनों ने अपनी चाय खत्म की.
अब मैंने कहा- चलता हूँ, चाय के लिए थैंक्यू.
वो बोली- थैंक्यू की कोई बात नहीं.

मैंने कहा- मालिश कर लेना, आराम मिल जाएगा.
वो बोली- खुद से खड़े होने में तो दिक्कत हो रही है, मालिश कैसे करूंगी!

मैंने कहा- किसी से करवा लेना.
मीनाक्षी- अरे कोई है ही नहीं.

मैंने कहा- अगर तुम्हें कोई दिक्कत ना हो, तो मैं लगा सकता हूँ.
वो बोली- अरे ना बाबा … मैं कर लूंगी.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं वापिस घर आ गया.
उस रात में मैं उस लड़की के बारे में सोचता रहा कि मीनाक्षी बहुत ही प्यारी है और खुले विचारों वाली लड़की है.

उसी को सोचते सोचते मैं कब सो गया, कुछ पता ही न चला.

अगले दिन मैं फिर से दूध लेने गया.
जब मैं वहां पहुंचा तो देखा वो मेरा ही इंतजार कर रही थी.

वो काफी प्यारी लग रही थी.
उसने लाल रंग की कुर्ती और गुलाबी रंग की प्लाजो पहन रखी थी और छोटी सी काली रंग की बिंदी उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थी.

मैं उससे कुछ कहता, इतने में उसने मुझसे कहा- आज दूध नहीं मिलेगा. मैं नहीं निकाल पाऊंगी. क्योंकि मेरी कमर के नीचे काफी दर्द बढ़ गया है.
मैंने उससे पूछा- तुमने मालिश नहीं की?

मीनाक्षी- अरे खुद से कैसे करती, जो तुमने पेन किलर दी थी, उस से थोड़ा आराम मिला.
मैंने कहा- दूध की कोई बात नहीं, मैं मालिश कर देता हूँ. तुम परेशान ना हो. तुम ये समझना कि डॉक्टर को दिखाने आई हो. तुम मुझ पर भरोसा कर सकती हो.

मीनाक्षी- बात भरोसे वाली नहीं, बस तुम ये समझो ना बाबा कि मैं एक लड़की हूँ और मुझे ये सुनकर ही थोड़ा अजीब सा लग रहा है.
मैंने कहा- ये सब बातें बाद में कर लेना … जाओ पहले स्प्रे लाओ, मैं लगा दूँ.

उसने कहा- अच्छा ठीक है. रूम में चलो, वहीं लगा देना.
मैं जैसे ही रूम में गया तो उसने मेरे हाथ में स्प्रे दे दिया और कहा- लो लगा दो.

स्प्रे देने के बाद वो बिस्तर पर लेट गयी. मैं बिस्तर पर बैठा और कहा- अपनी कुर्ती थोड़ी ऊपर करो.
उसने वहीं उल्टे लेटे हुए अपने एक हाथ से थोड़ी कुर्ती ऊपर कर दी.

मैंने स्प्रे का ढक्कन खोला और स्प्रे को उसकी कमर के पास ले जाकर दबा दिया.
उसने कहा- ठंडा ठंडा लग रहा है.

मैंने अपने हाथ उसकी कमर के पास रखे और अपने दोनों हाथों से उसकी मालिश करने लगा.

मैंने मालिश करते हुए पूछा- दर्द कहां है?
वो बोली- थोड़ा सा कमर के नीचे.
मैंने कहा- तुम अपना प्लाजो थोड़ा नीचे सरकाओ.

उसने बिना कुछ कहे अपना प्लाजो थोड़ा सा नीचे कर लिया.
जब उसने प्लाजो नीचे किया तो उसके थोड़े से कूल्हे दिखने लगे थे.

मुझे अपने शरीर में थोड़ी झुरझुरी सी होने लगी. मैंने उसके कूल्हे पर थोड़ा स्प्रे डाला और हाथ से दबाने लगा.
मैं अपने दोनों हाथ ऊपर से नीचे करते हुए उसके बदन की मालिश करने लगा.

मीनाक्षी गहरी गहरी सांसें लेने लगी.
मुझे भी कुछ कुछ होने लगा.

मैं उसकी मालिश कर ही रहा था तो मीनाक्षी ने कहा- रियांश बहुत मजा आ रहा है. एक बात कहूँ?
मैंने कहा- हां बोलो.

उसने कहा- कल जब तुम्हें देखा था तभी से तुम मुझे काफी अच्छे लगे थे.
मैंने कहा- थैंक्यू, तुम भी बहुत प्यारी हो.

मेरी बात सुनकर उसने एकदम से मुड़ कर मेरी गर्दन पर हाथ रखा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए.

मैं एकदम से समझ नहीं पाया कि ये क्या हुआ. मैं तुरंत पीछे हट गया.
वो एकदम से सॉरी सॉरी बोलने लगी.

मैंने बिना कुछ सोचे उसे अपनी साइड खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं उसके होंठों को चूसने लगा. मैं उसके ऊपर वाला होंठ चूस रहा था और वो मेरे नीचे वाला होंठ दबाए हुई थी.

हम दोनों ने वो किस बहुत देर तक किया.
फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठों से हटाए और उसके गाल पर किस कर दिया.

वो गर्म गर्म सांसें ले रही थी.
अब मैं उसके गाल और गर्दन पर धीरे धीरे किस करता गया और उसके एक कान को अपनी जीभ से चाटने लगा.

जब आप इस तरह का किस किसी लड़की को करते हैं, तो वो और उतवाली हो जाती है.
मीनाक्षी के साथ भी यही हुआ. वो और तेज तेज सांसें लेने लगी.

मैं किस करते करते अपने एक हाथ से उसके मम्मे को कुर्ती के ऊपर से ही धीरे धीरे दबाने लगा.
मीनाक्षी ने भी अपने हाथ को मेरे लंड पर रख दिया और वो पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को हल्के हल्के से मसलने लगी.

मेरी भी तेज तेज सांसें चल रही थीं.
उसने अपना हाथ हटाया और अपनी कुर्ती निकाल दी.

मैं उसकी जवानी को कामुक नजरों से देखने लगा. अगले ही पल उसने अपनी काले रंग की ब्रा भी निकाल दी.

वो बहुत ज्यादा उतावली हो गई थी.
मैंने उससे कहा- तुम लेट जाओ.

वो वहीं बिस्तर पर लेट गयी.

मैंने भी अपनी शर्ट निकाली और उसके ऊपर चढ़ गया.
पहले मैंने उसे होंठों पर किस किया और किस करते करते धीरे धीरे उसकी ठोड़ी पर चूम लिया. थोड़ी देर उसकी ठुड्डी को चूसा भी.

वो लंबी लंबी सांसें ले रही थी और अपने सीधे हाथ से मेरा लंड तेज तेज दबा रही थी.
मेरा लंड पहले ही खड़ा हो चुका था.

उसने मेरे पैंट का बटन खोला और पैंट की चैन खोल कर थोड़ा सा खिसका दिया.
फिर मेरी चड्डी में हाथ डाल कर लंड को मसलने लगी.

मैं उसकी ठोड़ी को चूसते चूसते उसकी गर्दन पर किस करने लगा और अपने उल्टे हाथ से उसके दूध दबा रहा था. उसके मम्मे ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन काफी टाइट थे.
मुझे बड़ा मजा आ रहा था.

उसके चूचुक खड़े हो गए थे और बहुत टाइट हो गए थे.
चूचुक हल्के से ब्राउन रंग के थे.

मैं उसकी गर्दन चाटते हुए नीचे आया और उसके एक मम्मे को मुँह में ले लिया.
उसकी सिसकारी निकल गई और मैं दूध चूसने लगा. साथ ही उसके दूसरे वाले मम्मे को बहुत तेज तेज दबाने लगा.

बीच में मीनाक्षी बोली- आंह लग रही है … थोड़ा आराम से करो न!
मैं कहां कुछ सुनने वाला था. मैं अलग ही नशे में था.

मैंने अब अपना मुँह दूसरे वाले मम्मे पर रख दिया और उसे चूसने लग गया.
मैं एक हाथ से उसका दूसरा दूध दबा भी रहा था. दूसरे हाथ से उसके प्लाजो के ऊपर से ही उसकी चूत दबा रहा था.

थोड़ी देर तक चूसने के बाद मैं उठा और उसका प्लाजो अपने दोनों हाथों से पकड़ कर एक बार में ही उतार दिया.
प्लाजो के बाद उसकी ब्लैक पैंटी भी मैंने अपने हाथों से उतार दी.

जब मैंने उसकी चूत देखी तो वो ऐसी थी जैसे आज ही साफ़ की हो.
मैंने कुछ न सोचते हुए अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया और उसकी चूत को चाटने लगा.

उसकी चूत थोड़ी गीली थी. मैंने अपने हाथ की उंगलियों से उसकी चूत खोली, तो वो ज्यादा खुल ही नहीं रही थी.
मीनाक्षी लंबी लंबी सांसें ले रही थी और मेरा सर अपनी चूत पर दबा रही थी.

वो कह रही थी- जल्दी करो प्लीज़ प्लीज़ अब मुझसे रुका नहीं जाता.

मेरा भी लंड काफी टाइट हो चुका था. मैंने उसकी चूत पर थोड़ा थूका और अपना पैंट उतार कर अलग कर दिया.

अब मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखे और उसकी चूत पर जो थूक पड़ा था, उसे अपने हाथ से मलकर अपने लंड को उसके छेद पर सटा दिया.

लंड का सुपारा चुत की फांकों में सैट हो गया था तो मैंने हल्का सा धक्का मार दिया.

मेरा थोड़ा सा लंड चुत में घुस गया.
वो एकदम से ‘उन्ह आह …’ करने लगी. वो बोली- जल्दी अन्दर कर दो प्लीज़.
मैंने उसकी पीठ के नीचे दोनों हाथ घुसेड़ दिए और उसको उठा कर अपनी तरफ खींच लिया.

फिर खुद थोड़ा झुक कर उसको किस करने लगा. उसके होंठों को चूसने लगा.
उसको भी काफी मजा आ रहा था.

वो पूरी मस्ती से मेरे होंठों को चूसती जा रही थी.

मैंने महसूस किया कि उसकी चूत थोड़ी गीली हो गयी है; लंड भी जरा घुसने की कोशिश करने लगा था.

मैंने अचानक से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाया और एक तेज धक्का मार दिया.
वो फिर से बिस्तर पर पीठ के बल गिर गयी.

मैं धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करने लगा.
मुझे अपने लंड पर बहुत गर्मी महसूस हो रही थी.
वो तड़फ रही थी.

धीरे धीरे मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज तेज अन्दर बाहर करता गया.
वो अब मजा लेने लगी थी और उसकी कमर भी लंड के साथ हिलने लगी थी.
चुदाई की मस्त आवाजें आने लगी थीं.

कुछ समय बाद मैं झड़ गया.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और 69 की अवस्था में अपना लंड उसके मुँह की ओर कर दिया.

मेरा मुँह उसकी चूत की तरफ आ गया था.
मैं मीनाक्षी की चुत चाटने लगा.
वो मेरे लंड को चाटने लगी.

मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में पेलीं और तेज तेज पेलने लगा.
कुछ देर बाद वो भी झड़ गयी.

अब तक उसने मेरा लंड का सारा वीर्य चाट चाट कर लंड साफ कर दिया था.
उसके बाद उसने भैंस का दूध भी निकाला और फ्रिज में रख दिया.

उस दिन मैं पूरी रात वहीं रुका. उस दिन हमने 4 बार सेक्स किया. अलग अलग अवस्थाओं में मीनाक्षी ने मेरे लंड से चुदकर मजा लिया.

हमने साथ में पोर्न मूवी भी देखी.
इसके बाद लॉकडाउन में हम दोनों कई बार मिले और मैंने Xxx दूधवाली सेक्स का मजा लिया.

आपको मेरी कहानी कैसी लगी? आप मेल करके अपना सुझाव जरूर दें और जरूर बताएं कि मेरी Xxx दूधवाली सेक्स कहानी में आपको कितना मजा आया.

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