चलती ट्रेन में चुदाई – भाग २

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ध्यान दे: इस कहानी में औरत ने पति और दो दूसरे मर्दों को उकसाने के लिए धन का आदान-प्रदान करबाया। लेकिन चुदाई के बाद उसने सारा रुपया वापस कर दिया। सारी चुदाई मुफ़्त में हुई।

जब मैं ने जोर से कहा कि ब्लाउज़ नहीं उतारुंगी तो उन्होंने हमें अपने साथ रहने का निमंत्रण दिया। और यह कहा कि गुप्ता जी ५०००/- देकर उनके घर की किसी भी औरत का ब्लाउज़ खोल सकते हैं।

गोपाल – ५०००/- नही, १००००/- देता हूँ, ब्लाउज़ खोल कर बाहर निकाल दो।

ब्लाउज़ उतरवाने की उनकी जिद देख मुझे विश्वास हो गया कि ये दोनों मुझे पूरा नंगा कर चोदना चाहते हैं। सीधे सीधे चुदाई की बात ना कर ये दोनों भाई गुप्ता जी की मर्ज़ी से मुझे चोदना चाहते थे। मैं चुदाई के लिए पूरी तैयार थी।

गोपाल की १००००/ – देने की बात सुन मैं ने गुप्ता जी की ओर देखा। दस हज़ार हमारे लिए बहुत बड़ी रकम थी। गुप्ता जी की मासिक तनख़्वाह से ज़्यादा थी।मैं – अगर गुप्ता जी बोलेंगे तो मैं ब्लाउज़ बाहर निकाल दूँगी।

वो दोनों हमारे साथ खेल रहे थे। मुझे भी इस खेल में मजा आने लगा था। मेरी बात सुन ब्रज ने मुझे दिखाते हुए अपना ब्रिफकेस खोला। ब्रीफ़केस में नोटो के बंडल थे ही। उसमे कुछ मैगज़ीन जैसी किताबें भी थी। उसने एक वैसी किताब निकाल कर गुप्ता जी को दी।

ब्रज – ये किताब पढिये, आपका मन लगेगा। हम मैडम को नंगा होने नही सिर्फ़ ब्लाउज़ ही खोलने के लिए बोल रहे है। यहाँ हम चारों के अलावा और कोई नही है। हम शायद फिर कभी नहीं मिलेंगे। आप अपनी सुंदर घरवाली को बंद कमरे में हज़ारों बार नंगा देंखते हैं, चुदाई करते हैं।

ब्रज – कभी दूसरे के सामने अपने घर की औरतों को नंगा कर देखिए कितना मजा आता है। और वैसे भी दस हज़ार छोटी रक़म नहीं है। आपके तनख़्वाह से ज़्यादा है। न आप बदनाम होंगे ना ही आपकी घरवाली पर कोई अंगुली उठायेगा। मान जाइये गुप्ता जी। हमें भी अपनी खूबसूरत पत्नी की ख़ूबसूरती का दीदार करने दीजिये ।

क़रीब २ मिनट बिलकुल शांति रही। मैंने गुप्ता जी के हाथ से वो मैगज़ीन ली। कवर पेज पर की फ़ोटो देख कर मेरी चूत गीली हो गई, चूचियॉं टाईट हो गई। एक बिल्कुल नंगी औरत के चूत में एक लौडा और दूसरा लौडा उसकी मुँह में था। मैं पन्ने पलटने लगी।

मैं- मैंने ऐसी किताब पहले नहीं देखा कभी।

मेरी बात सुन गोपाल ने अपना ब्रीफ़केस खोला और उस में से ४ वैसी ही किताबें निकाल कर मुझे दिया।

गोपाल – कभी कभी ऐसी किताबें भी पढ़नी चाहिए। इन किताबों में ऐसी ऐसी कहानियों रहती है। चुदाई के ऐसे ऐसे तरीक़े रहते हैं कि जिनके बारे में हम हिन्दुस्तानी कभी सोच भी नहीं सकते। नये नये तरीक़ों से चुदाई करते रहने से पति-पत्नी कभी बूढ़े नहीं होते कभी।

गोपाल बातें कर रहा था लेकिन छोटे भाई को मेरी जवानी देखने की जल्दी थी। दस हज़ार का बंडल वो पहले ही निकाल चूका था, एक हज़ार और निकाला। ग्यारह हज़ार गुप्ता जी के हाथ में देते हुए बोला, “अब और नख़रा मत कीजिए। घरवाली को बोलिए ब्लाउज़ बाहर निकालने।”

गुप्ता जी ने एक बार अपने हाथ में रखे रुपया को देखा और फिर मुझे देखा।

गुप्ता – अनु, ब्लाउज़ बाहर निकाल इन्हें भी दिखा दो तुम्हारी चूचियों कितनी मस्त है। लेकिन अब आप दोनों कुछ और उतारने की बात नहीं करेंगे।

ना मैंने कुछ जबाब दिया न ही दोनों भाइयों ने। मैं उन दोनों की तरफ़ देखती हुई ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी। चार बटन खोलने में मैं ने क़रीब दस मिनट का समय लिया। ब्लाउज़ निकाल कर मैंने गोपाल के उपर फेंका। दोनों हाथों से चूचियों को मसलने लगी।

मैं – ठीक से देखकर बताओ कि मेरा ये माल तुम्हारे घर की किस माल के समान है।

मैंने चूचियों से हाथ का हटा दिया।

गोपाल – भाई, हम कई सालों से चुदाई कर रहे हैं, कम से कम २०० माल को चोदा है लेकिन ऐसी मस्त चूचियॉं पहले नहीं देखी। लाख लाख रुपये की माल है।मैं -और तुमने क्या दिया? कुछ नहीं।

गोपाल – रानी, ये ब्रा भी उतार दो बीस हज़ार दूँगा।

गोपाल ने ब्रीफ़केस खोला और १००-१०० के २ बंडल निकाल कर गुप्ता जी के हाथ में रखा।

गुप्ता – तुमने ये (ब्रा) कब कहॉं से ख़रीदा? बहुत ही ज़्यादा मस्त लग रही हो इस ब्रा में।

मैं – तीन दिन पहले ही कल्याणी के साथ बाजार गई थी। उसने ही खरिदवाया। पहनने में भी बढिया है।

तभी पर्दा हिला। मैं ने झट कंबल को अपने उपर खींचा और गुप्ता जी ने रुपया को भी कंबल के अंदर कर लिया। मैं मन ही मन मुस्कुराई। गुप्ता जी ने ब्रा खोलने का भी एडवांस ले लिया था। मुझे विश्वास था कि ब्रा खोलने के बाद वे साड़ी उतारने बोलेंगे। फिर पेटीकोट उतरेगा और बाद में गुप्ता जी अपनी ऑंखों के सामने घरवाली को दो-दो आदमियों से चुदवाते देखेंगे।

मेरी क़िस्मत बढिया थी। वेटर ने मुझे माइक्रो ब्रा पहने नहीं देखा। ब्रा क्या था, सिर्फ़ चूचियों की घुंडी और उसके चारों तरफ़ मुश्किल से एक इंच घेरा को ही ढँक कर रखा था। चारों तरफ़ से मॉंसल चूचियों खुली थी। वेटर ने पहले सूप परोसा। गुप्ता जी बाहर गये और उनके बाहर जाते ही।

ब्रज – रानी अब बर्दाश्त करना मुश्किल है।

मैं – तो वेटर के सामने चोदोगे? जैसा खेल रहे हो खेलते रहो। गुप्ता जी को जैसे ब्लाउज़ खोलने के लिए तैयार किया वैसे ही दूसरे काम के लिए भी तैयार करो। वो बोलेगा तो मैं सब कुछ करने को तैयार हूँ। उन्हें कम उम्र की माल बहुत पसंद है।

मैं बोलना चाहती थी कि अपनी कमसीन बहन की जवानी की बात कर उन्हें उकसाओ लेकिन बोल नहीं पाई। जब गुप्ता जी अंदर आये तो हम तीनों अपनी जगह पर बैठ सूप पी रहे थे। सूप पीते हुए दोनों भाई अपने परिवार की बातें करने लगे।

गोपाल – आप दोनों को एक राज़ की बात बताता हूँ। आप लोग किसी को बोलेंगे तो जल्दी कोई नहीं मानेगा।

मैं – कौन सी राज की बात?

ब्रज – भैया की शादी हमसे ५ साल पहले हुईं। जैसे अनु जी, आप को देखकर हम दोनों पागल हो रहे हैं वैसा ही पागल मैं भाभी को देखकर हो गया था। भैया की शादी के तीन साल पहले से हम दोनों मिलकर ही किसी की चूदाई करते थे।

ब्रज – लड़की एक ही होती थी लेकिन वो हम दोनों को खुश करती थी। हमारी मॉं और दूसरी औरतों ने बहुत टोका लेकिन हमने कह दिया कि हम अपनी घरवाली को भी मिलकर ही चोदेंगें।

हम दोनों उसकी बात सुन तो रहे थे लेकिन मुझे लग रहा था कि वे जो बोल रहे हैं सब झूठ बोल रहे हैं।

गोपाल – गुप्ता जी, अनु आप दोनों का चेहरा देख लग रहा है कि आपको हमारी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है। हाथ कंगन को आरसी क्या? चलिए आप दोनों गौहाटी में हमारे मेहमान है। आप दोनों जितने दिन रहना चाहे हमारे साथ रहिऐ।

गोपाल – सिर्फ़ हम दोनों की घरवाली ही नहीं, अनु भी उनके साथ रहेगी। तीन औरतें और हम तीन मर्द। एक ही कमरे में एक ही बेड पर। हम तीनों उन तीनों औरतों को चोदेंगें।

मैं – आप दोनों पागल हो।

वेटर अंदर आया और ख़ाली सूप का कटोरा लेकर चला गया। लेकिन कुछ ही देर बात खाना लेकर आया। एक भाई ने वेटर को २००/- दिया और वेटर ने हमें सब कुछ जितना चाहते थे खिलाया। खाने के बाद हमने आईसक्रीम भी खाया। आईसक्रीम खाकर मैंने कंबल हटाया। खड़े होकर ब्लाउज़ पहना और अकेले ही बाहर चली गई। पेशाब कर वापस आई।

गोपाल – अब वेटर हमें रात में डिसटर्ब नहीं करेगा। ब्लाउज़ उतार दो।

मैं ने गुप्ता जी की ओर देखा।

गुप्ता जी – ब्लाउज़ ही नहीं ब्रा भी खोल दो।

मैं समझ गई कि जब मैं बाहर गई तब ज़रूर इन दोनों भाई ने गुप्ता जी के साथ कोई डील किया होगा। मुझे ना रुपये चाहिए था ना ही कुछ और। मेरी ऑंखों के सामने सपना की हरकत। गुप्ता जी को चूमने, लौडा दबाने की हरकत बार बार सामने आ रही थी।

मैं पति के सामने पूरी रात इन दोनों से चुदवाना चाहती थी। लेकिन सच तो यह था कि मेरे पीछे कोई डील नहीं हुआ था। गोपाल ने जो तीनों औरतों को एक दूसरे के सामने चुदाई की बात की थी गुप्ता जी को वह बात सच लग रही थी।

वे अपनी घरवाली को इन दोनों से चुदवा कर दोनों की कम उम्र की घरवालियों को चोदना चाहते थे। मैंने ब्लाउज़ खोल कर फिर गोपाल के उपर फेंका। गुप्ता जी की गोदी में बैठ गई।

मैं – गुप्ता जी, ब्रा तुम ही निकाल दो।

और गुप्ता जी ने देरी नहीं की। उन्होंने हुक खोला, ब्रा स्ट्रैप को मेरी बॉहों से निकाला। ब्रज ने झट ब्रा गुप्ता जी के हाथ से ले सुंघने लगा। अब मैं उन लोगों के सामने कमर से उपर बिलकुल नंगी बैठी थी।

वे चाहते तो हाथ बढ़ाकर चूचियों को मसल सकते थे। लेकिन दोनों को अपने ब्रीफ़केस पर ज़्यादा भरोसा था। ब्रज ने गोपाल से धीरे धीरे कुछ बात की। उसने फिर ब्रीफ़केस खोल कर बहुत सा बंडल निकाला।

ब्रज— गुप्ता जी, आपकी बहुत बहुत मेहरबानी कि आपने इतने बढ़िया चूचियों का दीदार करवाया। आपकी अनु से बढिया चूची किसी और की हो नहीं सकती। आप ये सारा रुपया रख लीजिए। इससे भी आपका मन नहीं भरता है तो तो हमारे घर चलिए। मज़ाक़ नहीं कर रहा हूँ, अपनी १९ साल की कमसीन बहन आपको दे दूँगा। आप उसे जितना चाहे चोदिये कोई मना नहीं करेगा। लेकिन अभी हमें इस खुबसूरत हसीना को प्यार करने दीजिए।

गोपाल— हॉं गुप्ता जी, ट्रेन की बात ट्रेन में ही रहेगी। आपकी ये घरवाली सैकड़ों बार चूद चूकी है लेकिन हमारी बहन शायद अभी कुँवारी ही है। आप जितने दिन चाहे हमारे घर रहकर मेरा बहन को, साथ ही हमारी घरवालियों को भी चोदिये बदले में आप हमें अपनी ये घरवाली दे दीजिए। आपका फ़ायदा ही फ़ायदा है।

कुछ देर चुप्पी रही। मैंने देखा कि गुप्ता जी ने सारे बंडल को उठाया। मैं ने गिनती की। १५-२० बंडल रहे होंगे।

गुप्ता जी – रानी, अगर तुम चाहो तो दोनों से प्यार कर सकती हो।

मैं गुप्ता जी के गोदी में ही बैठी थी।

मैं – तुम्हारी घरवाली हूँ। तुम जो बोलोगे करुंगी। वैसे मुझे तुम्हारे साथ की चूदाई बहुत बढिया लगती है। तुम सपना को चोदो या उसकी मॉं कल्याणी को मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। क्योंकि मैं जानती हूँ कि मैं जब चाहुंगी तुम्हारा लौडा मुझे खुश करने के लिए तैयार है।

मैं – मुझे मालूम है कि तुम बहुत पहले से सपना को चोद रहे हो। मैं तो कहुंगी कि अब किसी होटल में ले जाकर चोदने से बढिया है कि तुम सपना को अपने घर में ही लाकर चोदो। मैं उसे तैयार कर लुंगी।

मैंने गर्म लोहा पर हथौड़ा चलाया था। गुप्ता जी को विश्वास नहीं हो रहा था कि मुझे उनकी और सपना की चुदाई के बारे में जानकारी है। गुप्ता जी ने मुझे खड़ा होने कहा और खूद अपने हाथों से मेरा साड़ी खोला और बाद में साया भी नीचे गिरा दिया। मैं दोनों के सामने नंगी खड़ी थी।

गुप्ता जी – तीन रात पहले चोदा था तों झॉंट थे। मुझे मालूम ही नहीं था कि तुम्हारी चूत इतनी प्यारी है।

मैं – परसों कल्याणी के घर गई थी। उन्होंने ने क्रीम से बूर को चिकना किया। अब मेरे घरवाला ने तुम लोगों के लिए मुझे नंगा कर ही दिया है तो फिर किसका इंतज़ार कर रहे हो।

गुप्ता जी का हाथ बूर पर था ही दोनों गोपाल और ब्रज खड़े हुए। दोनों नंगे हुए। दोनों का लौडा देख मैं खुश हो गई। तब तक मैंने एक ही लंड से चुदवाया था। कल्याणी ने कहा था कि लंबा लौडा देखने में।

पकड़ने में जरुर बढिया लगता है लेकिन चुदाई का असल मज़ा तभी आता है जब लौडा मोटा हो। लौडा जितनी देर बूर में कड़क रहता है चूदाई का मज़ा उतनी ही देर रहता है। दोनों भाई का लौडा गुप्ता जी के लंड से डेढ़-दो इंच छोटा था लेकिन गुप्ता जी के लौडा से बढिया मोटा था।

मैं फिर गुप्ता जी की गोदी में दोनो पॉंव को पूरा फैला कर बैठ गई और एक एक हाथ में एक लौडा लेकर सहलाने, दवाने लगी। ब्रज को बूर में लौडा पेलने की जल्दी थी।

ब्रज – रानी पहले एक बार लौडा अंदर पेलने दो फिर जो करना है करना।

मैं ने गुप्ता जी से उठने कहा। गुप्ता जी खड़े हो गये। मैं ने ब्रज का लौडा छोड़ा। गोपाल के लौडा को पकड़ कर मैं बर्थ पर लेट गई।

मैं – ब्रज, गोपाल बड़ा है, किसी भी माल पर पहला हक़ बड़े भाई का होता है। गोपाल, पहले तुम चोदो।

गुप्ता जी देखते रहे और गोपाल मेरा टॉंगो के बीच आया। दोनों चूचियों को दबाते हुए कई बार गालों और होंठों को चूमा और एक बहुत ज़ोर का धक्का मारते हुए लौडा को बूर में पेलने लगा।

“आह, मज़ा आ गया।”

मुझे सच बहुत बढिया लगा। गोपाल मुझे खुद जमा जमा कर पेल रहा था। मैं ने देखा कि गुप्ता जी ने पर्दा को ठीक से बंद किया कि बाहर से किसी को कुछ दिखाई न दे। ब्रज नंगा खड़ा हो कर हमारी चुदाई देख रहा था। उसका लौडा भी टाईट था। मैं ने एक हाथ से ब्रज के लौडा को पकड़ सहलाने लगी।

मैं – गुप्ता जी, सच बोलिए, अपनी ऑंखें के सामने अपनी घरवाली से चुदवाते देख आपको बहुत ग़ुस्सा आ रहा है ना! आप ने इन्हें रोका क्यों नहीं। आपको ग़ुस्सा आ रहा है तो आये। गोपाल बढिया पेल ह रहा है आपके सामने चुदवाने में मुझे बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है।

मुझे लगा कि मेरी बात सुन गुप्ता जी नाराज़ होंगे। लेकिन नहीं।

गुप्ता जी – जब इन लोगों ने ब्लाउज़ खोलने कहा तब मुझे बहुत ही ज़्यादा ग़ुस्सा आया था। लेकिन अब सच कहता हूँ तुम्हें दूसरों से चुदवाते देख एक अजीब सा मज़ा मिल रहा है।

मैं भी कमर उचका कर, चुत्तर को उछाल कर गोपाल के हर धक्का का जबाब दे रही थी।

गोपाल – ब्रज, सच कहता हूँ भाई, ये अनु सच सबसे बढिया माल है। चुत टाईट तो है ही बहुत रसीली और बहुत गर्म भी है।

गोपाल खुब प्यार से, दोनों हाथों से मेरे बदन को सहलाते हुए पूरी ताक़त से पेल रहा था। उसने गुप्ता जी को देखा जो सामने की सीट पर बैठ कर घरवाली की चूदाई देख रहा था।

गोपाल – गुप्ता जी, गौहाटी में आप दोनों हमारे घर में ही रहेंगे। गौहाटी से आप दार्जिलिंग जायेंगे लेकिन अनु आपके साथ नही जायेगी। अनु हमारे साथ रहेगी और आप के साथ हमारी बहन वीणा जायेगी। वो आपकी घरवाली जैसी रहेगी। वापसी में आप अनु को ले जाइयेगा।

गोपाल के घर में रहने में मुझे कोई समस्या नहीं थी। १५ मिनट से ज़्यादा की चुदाई हो गयी।

ब्रज – भैया बूर के अंदर पानी मत गिराइयेगा।

मैं – हॉं गोपाल, बूर में रस भर जायेगा तो फिर ब्रज को मज़ा नहीं आयेगा। तुमने बहुत चोद लिया अब भाई को चोदने दो। मुझे अपनी बूर का स्वाद लेने दो।लेकिन गोपाल का मन नहीं भरा था। उसने ५-७ मिनट और खुब जमा जमा कर चोदा।

मैं- गोपाल, बहुत ही बढ़िया से पेल रहे हो। बहुत मज़ा आ रहा है।

सच, जो मज़ा गोपाल के साथ आ रहा था वैसा मज़ा गुप्ता जी ने कभी नहीं दिया था। मुझे कल्याणी की बात याद आ गई।”नये लोग. नया लंड बहुत मज़ा आता है।” मैंने फ़ैसला किया कि मैं भी कल्याणी के साथ नये नये लंड से मज़ा लुंगी।

गोपाल बहुत तेज़ी से पेल रहा था। अचानक उसने लौडा बाहर खींचा। मेरे उपर से उठकर वो मेरे बग़ल में आया और मैंने अपनी बूर से लथ पथ लौडा को पकड़ा और धीरे धीरे मुँह के अंदर लेने लगी। मैं लौडा मुँह में ले रही थी और ब्रज बूर में लौडा पेलने लगा।

ब्रज ने चुदाई शुरु की और गुप्ता जी अपने कपड़े उतारने लगे। मैं यह देख खुश हुई की गुप्ता जी का लौडा पुरा टाईट है। गोपाल मुझे मुँह में चोद रहा था और ब्रज का लौडा बूर में अंदर बाहर हो रहा था। मैंने गोपाल का लौडा छोड़ा और गुप्ता जी के लौडा को सहलाने लगी।

५-७ मिनट मुँह में रहने के बाद गोपाल का लौडा पानी छोड़ने लगा। मैं गुप्ता जी का लौडा अक्सर चूसती थी लेकिन तब तक लौडा के पानी का एक बूँद भी मुँह में गिरने नहीं दिया था। लेकिन चलती ट्रेन में पति के सामने चुदवाने में मैं बहुत ही मस्ता गई थी।

कुछ नया नया करने का जी कर रहा था। गुप्ता जी का लौडा छोड़ गोपाल के लौडा को जड़ से पकड़ मुँह में दबाये रखा। गोपाल लौडा बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था लेकिन मैंने पूरी ताक़त से अंदर दबा रखा था।

गरम गरम बुंदे जीभ पर गिर रहा था। एक अजीब सा मज़ा आ रहा था। जब मुझे लगा कि लंड ने सारा पानी छोड़ दिया, लौडा ढीला होने लगा तब मैं ने मुँह खोला। लौडा बाहर निकल गया। मैंने मुँह पूरा खोला।

तीनों ने देखा कि मेरे जीभ पर सफ़ेद गाढ़ा रस का लेयर है। वे तीनों देखते रहे और मैंने सारा रस अंदर ले लिया। मैं मुस्कुराई।

मैं – गोपाल, यह पहला मौक़ा है जब मैं ने रस मुँह में गिरने दिया लेकिन राजा मज़ा आ गया। बहुत ही स्वादिष्ट माल था। आज सबका माल खाऊँगी।

तीनों आश्चर्य से मुझे देखते रहे। ब्रज अपने को सँभाल नहीं पाया और बूर में ही रस गिरा दिया।

मैं – ब्रज, कोई बात नहीं, अभी पूरी रात बाक़ी है।

ब्रज हटा और एक मिनट के अंदर गुप्ता जी मुझे चोदने लगे। गोपाल ने अपना ब्रीफ़केस खोला और मेरे मुँह के उपर उसे ख़ाली कर दिया।

उस रात मैंने तीनों में से किसी को सोने नहीं दिया। बारी बारी से तीनों मुझे चोदते रहे। मैंने सबका रस पिया। सभी के लौडा को बहुत बहुत देर तक चूसा और तीनों ने मेरी बूर चूसी चाटी।

आख़िर तीनों सुबह ५ बजे के बाद सोये लेकिन मुझे नींद नहीं आई। मैं यही सोचती रही कि मैं इतनी बेशर्म कैसे हो गई। बहुत सोचने के बाद इसी नतीजे पर पहुँची कि सपना और गुप्ता जी कि चुदाई तो एक बहाना है मैं खुद ही बहुत चुदासी ह

“मैडम, चाय लेंगी या कॉफी?”

अचानक आवाज़ सुन मैं ने देखा। रात बाला ही वेटर ट्रे और थर्मस लेकर खड़ा था। मैं ने बग़ल में देखा। गोपाल एक कंबल ओढ़ कर सो रहा था। मैंने भी अपने को कंबल से ढक रखा था। मैं ने कंबल को झटका। कंबल नीचे गिरा।

“मेरे लिए एक चाय बनाओ।”

उसने मेरे लिए चाय बनाया। चाय बना कर दोनों हाथों से दोनों चूचियों को दबाते हुए मुझे चुमा। फिर बूर को मसलते हए बोला, “ मैडम, ऐसे ही रहो जल्दी आता हूँ।”

और दस मिनट के बाद एक नया लौडा मेरी बूर के अंदर घुस रहा था। मैंने अपनी दोनों हाथों से उसे खुब ज़ोर से बॉंधा।

मैं – इन तीनों ने मुझे रात भर चोदा लेकिन तुम सबसे बढिया से चोद रहे हो। ट्रेन से उतरने के पहले मुझे एक बार और ये लौडा बूर के अंदर चाहिए।

“मिलेगा मैडम मिलेगा। मेरे और मेरे लौडा की आप पहली औरत हैं।”

और उस वेटर ने सबसे लंबी चुदाई की। वेटर मुझे खुश कर बाहर गया। रात दोनों भाइयों ने जितना रुपया दिया उसे समेट कर गोपाल के ब्रीफ़केस में वापस रख दिया।

दिन में भी मैंने दोनों भाइयों से एक एक राउंड चुदवाया।

गौहाटी पहुँच कर जैसा कहा था गोपाल ने मुझे और गुप्ता जी को अपने ही घर में रखा। गुप्ता जी ने गोपाल की बहन को अपनी घरवाली समझ ७ दिन रात खुब चोदा। रात में मुझे चोदते समय गोपाल और ब्रज ने पूछा कि उसने सारा रुपया वापस क्यों कर दिया।

मैं- मुझे सिर्फ़ बढिया लौडा और तुम्हारे जैसा मस्त चोदने वाला चाहिए, धन दौलत नहीं।

दस दिन बाद जब वे घर लौटे तो मैंने कहा, “गुप्ता जी, मैं आपकी घरवाली हूँ, कोई रंडी नहीं हूँ। उन दोनों ने जो भी रुपया दिया था वो सारा मैंने वापस कर दिया। आप सपना को चोदो या ना चोदो। मैं जल्दी ही सपना के बाप से इसी घर में आपके सामने चुदवाऊँगी।”

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