गांव में बिल्लो रानी की जबरदस्त चुत चुदाई- 1

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गाँव की लड़की की सेक्स कहानी में पढ़ें कि लॉकडाउन में मैं अपने गाँव चला गया. वहां पड़ोस की छत पर एक नयी लड़की दिखी मुझे. वो मुझे देखने लगी.

दोस्तो, मैं नील दिल्ली में सरकारी कार्यालय में कार्यरत हूँ. वैसे तो मैं बिहार के एक गांव से ताल्लुक रखता हूं और गांव से मेरा प्यार अभी तक वैसा ही बना हुआ है, जैसा बचपन में था.

मेरी लंबाई 5 फुट 7 इंच है और मेरे छोटू की लंबाई आम भारतीय की तरह 7 इंच के लगभग है. लेकिन यह मोटा सामान्य से कुछ ज्यादा है. इसकी खासियत यह है कि यह चलता काफी देर तक है.
मेरा रंग गोरा है और स्मार्ट दिखता हूँ.

वैसे तो मैं बहुत सारी लड़कियों और औरतों की चुदाई कर चुका हूं. उन सभी सेक्स कहानियों को मैं एक एक करके आपके लिए लिखूंगा.

अभी तो इस लॉक डाउन में गाँव की लड़की की सेक्स कहानी बता रहा हूँ.

मैं इस लॉकडाउन में दिल्ली में रहकर परेशान हो चुका था, क्योंकि यहां छोटे से घर में बंद होकर रहना पड़ रहा था. इसीलिए जून में लॉक डाउन खुलते ही मैं अपने गांव चला आया.
इस बार मैं गांव काफी समय के बाद आया था. मैं गांव में भी कम ही घर से बाहर निकलता था, शाम का समय छत पर ही बिताता था.

एक शाम बगल के घर में एक औरत पर नजर पड़ी, जो मुझे ही देख रही थी, वो भी बिना पलक झपकाए.
आखिर में मुझे ही नजर नीचे करना पड़ा.

उसकी चुचियां बिना ब्रा के ब्लाउज में से बाहर से साफ़ झलक रही थीं. उसका रंग सांवला था मग़र नैन नक्श बहुत ही तीखे थे.
उसका नाम भी बाद में मुझे पता चला था. असली वाला नाम तो रहने ही दो, मैंने उसका नाम बिल्लो रख दिया था.

उसको पहली नजर में देखते हुए ही मुझे अपने लौड़े में कुछ कुछ होने लगा था. गजब के मदमस्त मम्मे थे मेरी बिल्लो रानी के.
मैं बिहारी में कहूँ, तो बिल्लो रानी कही, तो जान दे देयी, हाय रे मोर बिहार वाली विपाशा.

उसे देखते ही बड़ा अजीब सा लगा.
ये औरत, औरत क्या लड़की ही बोलो, जो साड़ी पहनकर खड़ी थी .. पर थी कौन?
क्योंकि मुझे पता था कि उस घर में कोई भी लड़का या लड़की अच्छी शक्ल का नहीं था, पता नहीं ये लड़की कौन थी. किधर से आई थी.

उस लौंडिया की ख़ासियत यह थी कि उसकी चुचियां 36 साइज की होंगी और एकदम सामने तोप सी तनी हुई थीं.
बिना ब्रा के ब्लाउज से आधी नंगी दिखतीं चूचियां, मेरे लौड़े की मां चोद रही थीं.
मैंने जब भी उसे देखा तो पल्लू तो उसकी चुचियों पर क़भी देखा ही नहीं.

उसकी उम्र करीब 19-20 साल की होगी. फिगर वही विपाशा टाइप की. उसे आप देशी बिपासा बोल सकते हो. बिल्लो को देखकर लंड तो बुड्ढों का भी खड़ा हो जाए, एकदम देसी माल.

मैं तो चोदुभगत हूँ ही, क्योंकि हमने (बिहार में मैं को हम बोलते हैं) दिल्ली में कई बार ग्रुप में बहुत सारी चुत चोदी थीं. हमारा पूरा ग्रुप ही चोदू था.
इस ग्रुप के बेवड़े, जिनको हर लड़की या औरत में चुत और उसके मम्मे ही दिखते थे.

कभी बाहर किसी धार्मिक स्थल पर भी जाना होता था, तो ग्रुप में लड़कियों और शराब के साथ ही जाते थे. तो गांव में भी मुझे इस लौंडिया में फन एंड फ़ूड दिख रहा था.

दिल्ली की मस्ती की सुनाऊं, तो उधर के वाटर पार्क के पूल में एक ही लड़की कभी मेरी पैंट में, कभी मेरे दोस्त की पैंट में हाथ डाले रहती थी और दूसरी रंडी किस्म की लड़कियां इस सीन को देखने में इंटरेस्ट दिखाती रहती थीं.

मतलब हमारा ग्रुप एक बड़ा वाला चोदू था और मैं उस ग्रुप का एक बड़ा वाला चोदूभगत था. ग्रुप में सबके पास अपनी चुत हर समय उपलब्ध रहती थीं मतलब उनके पास बीबियां थीं और मेरी गर्लफ्रेंड थी, जिसको हर रोज या जब मन करे, चोद सकता था.

मेरे साथ आफिस का एक दोस्त था, वो मुझसे सीनियर था. वो केवल रंडियों पर ही निर्भर था.

उस सब मस्ती के के बारे में मैं फिर कभी बताऊंगा, अभी बिल्लो रानी की चुत चुदाई की कहानी लिख रहा हूँ.

मैंने गांव में अपने भाई से उस लड़की बिल्लो के बारे में पूछा, तो पता चला कि उस घर के लड़के ने बिल्लो को भगाकर शादी की थी.
उस लड़की के पहनावे से उसकी गरीबी साफ़ झलकती थी.

उसके बाद 4-5 दिन तक तो ऐसे ही दोनों एक दूसरे को निहारते रहे थे.
मैंने भी अब उसे देखते समय अपनी पलकों को झपकाना बंद कर दिया था. उसे एकटक घूरने में मजा आने लगा था.

वो भी मुझे एकटक देखने लगी थी.

एक दिन मैंने उसको देखते हुए उसके चूचों की तरफ देखकर मस्त होने का इशारा कर दिया था. वो शर्मा गई और चली गई.

उसके अगले दिन मैंने बिल्लो को देखा तो अपने होंठों पर कामुक तरीके से जीभ फिराकर, उसकी चुचियों की तरफ इशारा किया.
हालांकि मुझे ये सब करते हुए डर भी लग रहा था, फिर भी हिम्मत करके मैंने कर दिया.

वो कुछ नहीं बोली, बस पहले की तरह शर्मा कर चली गई.

अब मेरे सामने सवाल ये था कि मामला आगे कैसे बढ़े. क्योंकि मैं उससे सबके सामने बात नहीं कर सकता था.
उसका घर भी दूसरी गली में था. मेरे घर की छत औऱ उसकी छत के बीच में एक घर का फासला था.
मतलब छत पर से भी सीधे बात नहीं हो सकती थी.

उसके घर और मेरे घर के बीच में जो छत थी, वो एक खाली घर था, उस घर में कोई रहता नहीं था.

हम दोनों का घर दोमंजिला था. इसलिए बीच वाले घर की छत पर उतर कर बिल्लो के घर की छत पर जाना भी दुरूह था.

फिर मैंने एक दिन उसकी तरफ देखकर मोबाइल की तरफ इशारा किया.
तो बिल्लो ने भी अपने ब्लाउज में हाथ डाला और एक मोबाइल दिखा दिया.

मैंने इशारों में नंबर मांगा तो उसने कुछ जबाब नहीं दिया.

मैं लगभग निराश हो गया था, लेकिन अगली शाम को छत पर आते ही देखा कि वो पहले से ही मौजूद थी.
आज मैंने जानबूझकर उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया. कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसने बीच वाली छत पर मुझे दिखाकर एक कागज फेंका.

वो घर खाली था, तो मैंने इसका फायदा उठाया और उस छत पर उतर कर नीचे कागज ले आया. कागज देखा, तो उसमें एक नंबर लिखा हुआ था और दिन में फोन करने के लिए लिखा हुआ था.

अगले दिन जब मैंने फोन किया, तो मानो वो मेरे फ़ोन का ही इंतजार कर रही थी.

उस दिन हम दोनों के बीच काफी देर तक बातें होती रहीं.

क्या बातें हुई ये आप समझ ही सकते हैं.
बस इतना समझ लीजिए कि पहली बार फोन पर बातचीत में मेरी उससे सीधे चुदाई की बात नहीं हुई थी. मगर हमने एक दूसरे का साइज जरूर पूछा था. वो भी जब मैंने पहले उससे उसकी चूचियों का नाप पूछा तो उसने ब्रा का साइज़ बता दिया था.

फिर उसने मेरे लौड़े का नाप पूछा, तो मैंने 7 इंच बता दिया. वो समझी नहीं कि सात इंच कितना हुआ. मैंने हाथ के बालिश्त से लंड का नाप बताया.

वो फोन में बोली- झूठ बोल रहे हो.
मैंने पूछा- तुम्हारे पास कोई टच वाला मोबाइल है, उसमें मैं अपने छोटू का फ़ोटो भेज देता हूं.

वो बोली- वो वाला मोबाइल तो मेरे उसके पास रहता है. मेरे पास तो ये छोटा मोबाइल ही है.
मैंने जब पूछा कि आपको सामने से देखना है?
वो बोली- हां देखना है .. लेकिन कैसे देख सकती हूँ?

मैं भाग कर भाई वाले रूम में गया, जहां किस्मत ने मेरा साथ दिया. उस वक्त रूम में मेरा भाई नहीं था. उस रूम की खिड़की उसके घर की तरफ़ को थी.

मैंने तुरन्त ही उस रूम में जाकर दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया और उसको फोन पर बोला कि तुम नीचे वाली छत की बाल्कनी में आ जाओ.
वो बोली कि वो वहां नहीं आ सकती, क्योंकि घर का वो हिस्सा उसके पति के भाई के हिस्से का था. उसके हिस्से का निचला तल और छत था.

निचले तल के सामने तो बीच वाला घर था, वहां से उसे कुछ दिखा पाना सम्भव नहीं था.

वो ऊपर की छत पर आ गयी और बोली- आपकी खिड़की तो यहीं से दिखती है, वहीं से दिखा दो.

उससे बात करते करते ही मेरा लंड पूरा तन गया था. मैंने सीधे लंड निकाल कर उसे दिखाने लगा. लेकिन दूरी होने की वजह से उसे लंड साफ नहीं दिख रहा था.

मैंने मजाक में ही उससे चुचियां दिखाने के लिए बोला, जो कि मुझे लगता था कि संभव नहीं होगा. क्योंकि वो छत पर थी.

वो मना करने लगी तो मैंने बोला- यार, ये तो खड़े लंड पर धोखा हो गया, तुमने मेरा देख लिया, जबकि तुम अपना माल दिखाया ही नहीं.
वो बोली- आपको देखना होगा तो कोई जुगाड़ खुद सोच लेना.

मैंने उसको बीच वाले घर में आने को बोला.

उस घर में छत की तरफ से नीचे जाने का रास्ता था. उस घर के अन्दर के सभी कमरों के दरवाजे बंद थे. केवल सीढ़ी के पास ही थोड़ी जगह थी.

मैं उस घर का मुयायना कर चुका था. वहां पर चुदाई तो संभव नहीं थी. क्योंकि टूटे दरवाजे से अन्दर का भाग दिखता था. लेकिन चुचियां, चुत और लंड का मसलना चूसना हो सकता था.
मुझे ऐसी बिना मज़े की चुदाई पसंद नहीं है. चुदाई में बिल्कुल एकान्त औऱ भरपूर समय पसंद है.

उसने भी मना कर दिया, क्योंकि जहां से बीच वाले घर की छत पर आने का रास्ता था, वो उसके पति के भाई के हिस्से में था.

अब मुझे गुस्सा आ रहा था और लंड मसोस कर खामोश था. मैं कर भी क्या कर सकता.

दो दिन तक ऐसे ही चलता रहा.
मैं उसे अपना लंड भी नहीं दिखा पा रहा था क्योंकि भाई अपने कमरे में रहता था.
केवल फोन पर ही लंड चुत चुदाई की बात होती रहती थी और मैं बैठ कर लंड हिला कर ठंडा हो जाता था.

एक दिन वहीं बगल के खाली घर वाले अंकल आए और अपने घर की चाभी मांगकर ले गए और 15-20 मिनट बाद चाभी वापस दे गए.
उन्होंने चाभी वहीं दरवाजे के पास खूंटी में टांग दी थी.

खाली घर की चाभी मुझे किसी खजाने की चाभी से कम नहीं लग रही थी. चाभी देखते ही मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मेरा छोटा चोदुभगत अपनी ही खुशी में उछलने लगा.

मैंने तुरंत बिल्लो को फ़ोन करके अपना प्लान बताया, तो आने को राजी हो गयी.
बिल्लो बोली- आज नहीं, अगले दिन आऊंगी.

मैं अगले दिन का इंतजार करने लगा. हालांकि शाम को इशारों में ही अगले दिन पक्का मिलने का करार भी करवा लिया था.

अगले दिन जैसे ही 11 बजे, तो मैंने देखा कि उसका मिस्ड कॉल आ गया.
मिलने की खुशी से लंड टनटना गया और मैंने तुरंत वापिस कॉल किया.

मैंने बिल्लो से दस मिनट के बाद बगल के घर में आने को बोला. मैं उस घर का बाहर का दरवाजा पहले ही खोलकर आ गया था.

मैं छत पर से ही उस घर में चला गया और अन्दर का रूम खोलकर अपनी बिल्लो का इंतजार करने लगा.

मुझसे ज्यादा जल्दी उसको थी, वो बहुत जल्दी ही आ गयी. उसके आते ही मैंने उसको दबोच लिया और उसकी चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जोर जोर से दबाने लगा.

वो छुड़ाने का नाटक करने लगी और बोली- मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ, थोड़ा आराम से कर लीजिए.

मैं समझ गया कि लौंडिया आज चुदाई के मूड में ही आयी है और पूरे मजे लेना चाहती है. मैं भी उसके मजे लेने लगा.

मैं बोला- पहले तुम पर तुम्हारी चुचियां दिखाने की उधारी चढ़ी हुई है, तुम अपनी बड़ी बड़ी चुचियां मुझे दिखाओ.
किन्तु लज्जावश बिल्लो बोली- मना किसने किया किया है, खोलकर देख लीजिए न.

उसको मजा लेने का मन तो था लेकिन अभी भी बहुत शर्म कर रही थी.

मैंने उसके ब्लाउज को खोल दिया. ब्लाउज खोलते ही उसके बड़े बड़े चुचे मुझे ललचाने लगे.
मैंने एक पल की देर नहीं की और उसकी चुचियों को चूसने लगा.
वो झूठमूठ का छुड़ाने का नाटक करने लगी.

जब उससे रहा नहीं गया, तो वो मेरा लंड पैंट के ऊपर से दबाने लगी और साइज का अंदाजा लेने लगी.
उसके हाथ लगाते ही मेरा लंड पैंट फाड़ने को तैयार हो गया लेकिन मैंने जानबूझकर अपना पैंट नहीं निकाला.

वो भी लज्जावश मेरा पैंट नहीं उतार रही थी.
मैं उसके बड़े बड़े मम्मों को सहलाने दबाने और चूसने में मस्त था.

फिर धीरे से मैंने उसके पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल दिया तो देखा उसने अन्दर पैंटी नहीं पहनी थी.
उसकी चूत से पानी की धार निकल रही थी.

अचानक से हुए इस हमले से वो चौंक गयी और बोली- इस सबकी बात नहीं हुई थी, उसको छोड़ दीजिए.

लेकिन वो केवल बोलकर मना कर रही थी, उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश भी नहीं की.

फिर बोली- अब जल्दी से अपना निकाल कर दिखा दीजिए … नहीं तो मैं बिना देखे ही चली जाऊंगी.

मैंने जल्दी से उसका हाथ पकड़ कर अपने पैंट के अन्दर डाल दिया और अपना लंड उसके हाथों में दे दिया.

वो मेरा लंड पकड़ते ही चौंक गयी और उसके मुँह से निकला- बाप रे बाप … इतना मोटा!

लंड बिल्लो रानी के हाथ में क्या गया उसकी तो मानो लॉटरी खुल गई थी.

अब इस मोटे लंड से मेरी बिल्लो रानी की देसी चुत की चुदाई की कहानी का अगला भाग लिखूंगा, तो आप अपना लंड चुत हिलाए खुजआये बिना नहीं रह पाएंगे.

आप बस जल्दी से मुझे मेरी इस गाँव की लड़की की सेक्स कहानी के लिए अपने मेल लिख कर भेजिए. मुझे इंतजार रहेगा.

गाँव की लड़की की सेक्स कहानी का अगला भाग:

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